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तिहाड़ जेल में बन गया जितेन्द्र गोगी गिरोह का शूटर
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बदमाश जितेंद्र गोगी गिरोह का शूटर प्रदीप गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपी के पास से कट्टा व दो कारतूस बरामद किए
लूट, झपटमारी और आर्म्स एक्ट के 20 से ज्यादा दर्ज हैं केस
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नरेला निवासी प्रदीप उर्फ गुर्री (32) तिहाड़ जेल क्या गया, वह बदमाश जितेंद्र गोगी गिरोह का शूटर बन गया और जेल से बाहर आते ही आपराधिक वारदात को ताबड़तोड़ अंजाम देने लगा। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने प्रदीप को पूठखुर्द इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी नरेला का घोषित बदमाश है। पुलिस ने इसके पास से कट्टा व दो कारतूस बरामद किए हैं। आरोपी जितेंद्र गोगी गिरोह के बदमाशों को अवैध हथियार भी सप्लाई करता था। प्रदीप के खिलाफ लूट, झपटमारी व आर्म्स एक्ट के 20 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
अपराध शाखा के डीसीपी डॉ. जी. रामगोपाल नायक के अनुसार, जितेंद्र उर्फ गोगी व सुनील उर्फ टिल्लू गिरोह में गैंगवार चल रही है। इस गैंगवार में दोनों गिरोह के कई बदमाश मारे जा चुके हैं। जितेंद्र गोगी गिरोह के बदमाश अरमान की सुनील उर्फ टिल्लू गिरोह के बदमाश मंजीत चामरा और उसके साथियों ने हत्या कर दी थी। हत्या का बदला लेने के लिए जितेंद्र गोगी के कहने पर मुकेश, हिमांशु, राकेश दहिया उर्फ राका, प्रदीप उर्फ गुर्री व अन्य साथी तैयार हो गए थे। राकेश दहिया पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। राकेश ने बताया था कि उसे व गिरोह के अन्य बदमाशों को हथियार प्रदीप ने दिए थे, ताकि सुनील टिल्लू गिरोह के बदमाशों को खत्म किया जा सके।
इंस्पेक्टर जतन सिंह व एसआई आशीष कुमार को दो फरवरी को सूचना मिली थी कि वांछित बदमाश प्रदीप वाल्मीकि अस्पताल, पूठखुर्द मार्केट (बवाना रोड) के पास आएंगे। इस पर एसआई आशीष कुमार की टीम ने घेराबंदी कर प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया।
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बिहार से मंगवाता था अवैध हथियार
वर्ष 2001 में पिता की मौत होने के बाद प्रदीप रॉकी के संपर्क में आया और झपटमारी करने लगा। ये नरेला में गिरफ्तार हुआ और जेल गया। वर्ष 2014 में इसके साथी रॉकी गोविंद उर्फ छोटू ने हत्या कर दी थी। वर्ष 2014 में प्रदीप फिर गिरफ्तार हुआ और जेल गया। इस बार जेल में उसकी मुलाकात बदमाश जितेंद्र उर्फ गोगी से हुई। वर्ष 2018 में इसके साले अमित बवाना की नीरज बवानिया के शूटर ने हत्या कर दी थी। सितंबर 2018 में इसके दोस्त अरमान की भी हत्या कर दी थी। इन दोनों हत्याओं का बदला लेने के लिए प्रदीप ने हथियारों का प्रबंध किया था। अवैध हथियार बिहार से मंगवाता था। बदला लेने के लिए उसने जितेंद्र गोगी गिरोह से हाथ मिलाया।
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पुलिस ने आरोपी के पास से कट्टा व दो कारतूस बरामद किए
लूट, झपटमारी और आर्म्स एक्ट के 20 से ज्यादा दर्ज हैं केस
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नरेला निवासी प्रदीप उर्फ गुर्री (32) तिहाड़ जेल क्या गया, वह बदमाश जितेंद्र गोगी गिरोह का शूटर बन गया और जेल से बाहर आते ही आपराधिक वारदात को ताबड़तोड़ अंजाम देने लगा। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने प्रदीप को पूठखुर्द इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी नरेला का घोषित बदमाश है। पुलिस ने इसके पास से कट्टा व दो कारतूस बरामद किए हैं। आरोपी जितेंद्र गोगी गिरोह के बदमाशों को अवैध हथियार भी सप्लाई करता था। प्रदीप के खिलाफ लूट, झपटमारी व आर्म्स एक्ट के 20 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
अपराध शाखा के डीसीपी डॉ. जी. रामगोपाल नायक के अनुसार, जितेंद्र उर्फ गोगी व सुनील उर्फ टिल्लू गिरोह में गैंगवार चल रही है। इस गैंगवार में दोनों गिरोह के कई बदमाश मारे जा चुके हैं। जितेंद्र गोगी गिरोह के बदमाश अरमान की सुनील उर्फ टिल्लू गिरोह के बदमाश मंजीत चामरा और उसके साथियों ने हत्या कर दी थी। हत्या का बदला लेने के लिए जितेंद्र गोगी के कहने पर मुकेश, हिमांशु, राकेश दहिया उर्फ राका, प्रदीप उर्फ गुर्री व अन्य साथी तैयार हो गए थे। राकेश दहिया पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। राकेश ने बताया था कि उसे व गिरोह के अन्य बदमाशों को हथियार प्रदीप ने दिए थे, ताकि सुनील टिल्लू गिरोह के बदमाशों को खत्म किया जा सके।
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इंस्पेक्टर जतन सिंह व एसआई आशीष कुमार को दो फरवरी को सूचना मिली थी कि वांछित बदमाश प्रदीप वाल्मीकि अस्पताल, पूठखुर्द मार्केट (बवाना रोड) के पास आएंगे। इस पर एसआई आशीष कुमार की टीम ने घेराबंदी कर प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया।
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बिहार से मंगवाता था अवैध हथियार
वर्ष 2001 में पिता की मौत होने के बाद प्रदीप रॉकी के संपर्क में आया और झपटमारी करने लगा। ये नरेला में गिरफ्तार हुआ और जेल गया। वर्ष 2014 में इसके साथी रॉकी गोविंद उर्फ छोटू ने हत्या कर दी थी। वर्ष 2014 में प्रदीप फिर गिरफ्तार हुआ और जेल गया। इस बार जेल में उसकी मुलाकात बदमाश जितेंद्र उर्फ गोगी से हुई। वर्ष 2018 में इसके साले अमित बवाना की नीरज बवानिया के शूटर ने हत्या कर दी थी। सितंबर 2018 में इसके दोस्त अरमान की भी हत्या कर दी थी। इन दोनों हत्याओं का बदला लेने के लिए प्रदीप ने हथियारों का प्रबंध किया था। अवैध हथियार बिहार से मंगवाता था। बदला लेने के लिए उसने जितेंद्र गोगी गिरोह से हाथ मिलाया।