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मीटू टू मामला: अकबर मानहानि मामले में फैसला सुरक्षित, 10 को आएगा फैसला
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नई दिल्ली। अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर मानहानि मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने अकबर व मानहानि मामले में आरोपी बनाई गई महिला पत्रकार से कहा कि यदि वे कोई भी अन्य तर्क रखना चाहते हैं तो पांच दिन में लिखित रूप से पेश कर सकते हैं।
राउज एवेन्यू अदालत के अतिरिक्त मुख्य मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार ने दोनों पक्षों की जिरह पूरी होने पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि वे अपना निर्णय 10 फरवरी को सुनाएंगे।
महिला पत्रकार ने मीटू अभियान के तहत वर्ष 2018 में एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। उस समय अकबर केंद्रीय मंत्री थे और उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने महिला पत्रकार पर मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि महिला पत्रकार ने उनकी प्रतिष्ठा खराब करने के लिए 20 वर्ष बाद झूठे आरोप लगाए हैं। यदि यौन शोषण हुआ था तो वह इतने वर्ष चुप क्यों रही। इसके अलावा वह ऐसा एक भी साक्ष्य पेश नहीं कर पाईं कि उसके साथ कब और कहां यौन शोषण हुआ न ही कोई गवाह है। ऐसे में मानहानि के आरोप में उसे दंडित किया जाए।
वहीं दूसरी तरफ महिला पत्रकार ने कहा कि अकबर की साफ छवि नहीं है और कई अन्य महिलाओं ने भी उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बंद कमरे में हुई घटनाओं के कोई गवाह नहीं होते। ऐसे में याचिका खारिज की जाए।
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राउज एवेन्यू अदालत के अतिरिक्त मुख्य मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार ने दोनों पक्षों की जिरह पूरी होने पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि वे अपना निर्णय 10 फरवरी को सुनाएंगे।
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महिला पत्रकार ने मीटू अभियान के तहत वर्ष 2018 में एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। उस समय अकबर केंद्रीय मंत्री थे और उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने महिला पत्रकार पर मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि महिला पत्रकार ने उनकी प्रतिष्ठा खराब करने के लिए 20 वर्ष बाद झूठे आरोप लगाए हैं। यदि यौन शोषण हुआ था तो वह इतने वर्ष चुप क्यों रही। इसके अलावा वह ऐसा एक भी साक्ष्य पेश नहीं कर पाईं कि उसके साथ कब और कहां यौन शोषण हुआ न ही कोई गवाह है। ऐसे में मानहानि के आरोप में उसे दंडित किया जाए।
वहीं दूसरी तरफ महिला पत्रकार ने कहा कि अकबर की साफ छवि नहीं है और कई अन्य महिलाओं ने भी उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बंद कमरे में हुई घटनाओं के कोई गवाह नहीं होते। ऐसे में याचिका खारिज की जाए।