गांधी जयंती: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ 'गोडसे जिंदाबाद', भाजपा सांसद वरुण बोले - शर्मनाक
देशभर के लोग सोशल मीडिया पर ट्वीट और पोस्ट कर महात्मा गांधी को याद कर रहे हैं, वहीं आज ही कुछ लोगों ने इसके विरोध में भी ट्वीट किया है जिसके कारण ट्विटर पर '#नाथूराम-गोडसे-जिंदाबाद' (#nathuram_godse_zindabad) ट्रेंड कर रहा है।
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विस्तार
देशवासी आज के दिन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मना रहे हैं। एक तरफ करोड़ों लोग बापू को याद कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर समाज में कुछ ऐसे तत्व भी हैं जो इस दिन अपनी हरकतों के कारण माहौल बिगाड़ने से बाज नहीं आ रहे हैं। देशभर के लोग सोशल मीडिया पर ट्वीट और पोस्ट कर महात्मा गांधी को याद कर रहे हैं, वहीं आज ही कुछ लोगों ने इसके विरोध में भी ट्वीट किया है जिसके कारण ट्विटर पर '#नाथूराम-गोडसे-जिंदाबाद' (#nathuram_godse_zindabad) ट्रेंड कर रहा है। आम लोगों समेत कई नेताओं ने इसका विरोध कर इसे शर्मनाक भी बताया है।
वरुण गांधी ने लगाई लताड़
सांसद वरुण गांधी ने ट्वीट किया कि भारत हमेशा से ही आध्यात्मिक महाशक्ति रहा है, लेकिन वो महात्मा गांधी ही थे जिन्होंने हमारे देश के आध्यात्म को एक नई पहचान दिलाई और हमें इसे संभालने का नैतिक अधिकार दिया। यह आज की तारीख में भी हमारी सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में जो लोग आज के दिन गोडसे जिंदाबाद ट्वीट कर रहे हैं वो गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण देश का सिर शर्म से झुका रहे हैं।
India has always been a spiritual superpower,but it is the Mahatma who articulated our nation’s spiritual underpinnings through his being & gave us a moral authority that remains our greatest strength even today.Those tweeting ‘Godse zindabad’ are irresponsibly shaming the nation
विज्ञापन विज्ञापन— Varun Gandhi (@varungandhi80) October 2, 2021
कौन था नाथूराम गोडसे
एक समय तक महात्मा गांधी का सम्मान करने वाले और उन्हें बेहद गंभीरता से पढ़ने वाले नाथूराम गोडसे ने आजादी के बाद 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर बापू की हत्या कर दी थी। इसके लिए उसे पहले कैद और बाद में फांसी की सजा सुनाई गई थी। कैद के दौरान उसने 'मैंने गांधी को क्यों मारा' नाम से एक किताब भी लिखी थी।
इसमें उसने स्पष्ट लिखा था कि ''32 साल तक विचारों में उत्तेजना भरने वाले गांधी ने जब मुस्लिमों के पक्ष में अपना अंतिम उपवास रखा तो मैं इस नतीजे पर पहुंच गया कि गांधी के अस्तित्व को तुरंत खत्म करना होगा। गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों को हक दिलाने की दिशा में शानदार काम किया था, लेकिन जब वे भारत आए तो उनकी मानसिकता कुछ इस तरह बन गई कि क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला लेने के लिए वे खुद को अंतिम जज मानने लगे। अगर देश को उनका नेतृत्व चाहिए तो यह उनकी अपराजेयता को स्वीकार्य करने जैसा था। अगर देश उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं करता तो वे कांग्रेस से अलग राह पर चलने लगते।"