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कोरोना संक्रमण का दायरा सिकुड़ा: दिल्ली में कोरोना के सभी मानक अब सबसे निचले स्तर पर, सतर्कता जारी रखने से ऐसे ही रहेंगे हालात
Tue, 13 Jul 2021 12:02 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 13 Jul 2021 12:02 AM IST
सार
दैनिक मामलों का औसत भी 65 रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के आंकड़े दर्शा रहे हैं कि महामारी का दायरा सिकुड़ चुका है, लेकिन अभी भी लगातार सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि वायरस का प्रसार रूका है। यह खत्म नहीं हुआ है।
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फाइल फोटो
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
राजधानी में कोरोना की पहली लहर की शुरुआत के बाद संक्रमण अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। कोरोना के सभी मानक इसकी तस्वीर पेश कर रहे हैं। दिल्ली में अब 800 से कम सक्रिय मरीज बचे हैं। संक्रमण दर 0.10 फीसदी से भी कम हो गई है।
दैनिक मामलों का औसत भी 65 रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के आंकड़े दर्शा रहे हैं कि महामारी का दायरा सिकुड़ चुका है, लेकिन अभी भी लगातार सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि वायरस का प्रसार रूका है। यह खत्म नहीं हुआ है।
दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में दूसरी लहर आई थी। तब अप्रैल में सक्रिय मरीजों की संख्या करीब एक लाख हो गई थी। इस कारण अस्पताल भी पूरी तरह भर गए थे और घर पर इलाज कराने वालों की संख्या भी 50 हजार के पार पहुंच गई थी, तब महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक सक्रिय मरीज दिल्ली में ही थे।
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यहां जितने तेजी से महामारी फैली थी। उतनी ही तेजी से कम भी हुई। आंकड़े बताते हैं कि दो माह में ही 81 हजार सक्रिय मरीज कम हो गए। इससे अस्पतालों में रोगियों की संख्या भी घटी और वायरस भी काबू में आ गया। अब सक्रिय मरीजों की संख्या 743 रह गई है और अस्पतालों में केवल 421 रोगी भर्ती हैं। दूसरी लहर में दैनिक मामलों की जो संख्या 28 हजार के पार थी अब 60 से कम है। यह सभी मानक पहली लहर की शुरुआत के बाद अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं।
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दैनिक मामलों का औसत भी 65 रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के आंकड़े दर्शा रहे हैं कि महामारी का दायरा सिकुड़ चुका है, लेकिन अभी भी लगातार सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि वायरस का प्रसार रूका है। यह खत्म नहीं हुआ है।
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दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में दूसरी लहर आई थी। तब अप्रैल में सक्रिय मरीजों की संख्या करीब एक लाख हो गई थी। इस कारण अस्पताल भी पूरी तरह भर गए थे और घर पर इलाज कराने वालों की संख्या भी 50 हजार के पार पहुंच गई थी, तब महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक सक्रिय मरीज दिल्ली में ही थे।
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यहां जितने तेजी से महामारी फैली थी। उतनी ही तेजी से कम भी हुई। आंकड़े बताते हैं कि दो माह में ही 81 हजार सक्रिय मरीज कम हो गए। इससे अस्पतालों में रोगियों की संख्या भी घटी और वायरस भी काबू में आ गया। अब सक्रिय मरीजों की संख्या 743 रह गई है और अस्पतालों में केवल 421 रोगी भर्ती हैं। दूसरी लहर में दैनिक मामलों की जो संख्या 28 हजार के पार थी अब 60 से कम है। यह सभी मानक पहली लहर की शुरुआत के बाद अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं।
इन कारणों से कोरोना है सबसे निचले स्तर पर
सफदरजंग अस्पताल के कम्यूनिटी मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर जुगल किशोर के मुताबिक, दिल्ली में कोरोना के सबसे निचले स्तर आने के चार प्रमुख कारण है। इनमें पहला यह है कि दूसरी लहर में करीब 80 फीसदी आबादी संक्रमित हो चुकी है। इन सभी लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी है।
इसलिए अभी यह वायरस की चपेट में नहीं आ रहे हैं। दूसरा यह है कि भले ही अन्य राज्यों में वायरस के कई म्यूटेशन सामने आ रहे हैं, लेकिन दिल्ली में फिलहाल क नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। तीसरा यह है कि इस बार कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए सरकार ने काफी सख्ती की हुई है। चौथा यह है दिल्ली कि करीब 45 फीसदी आबादी का वैक्सीनेशन हो चुका है।
इसी स्थिति को बनाए रखना एक चुनौती
एम्स के पूर्व डॉक्टर प्रवीण कुमार का कहना है कि दिल्ली में वायरस दम तोड़ रहा है। हालात काफी बेहतर हैं, लेकिन तीसरी लहर के खतरे के बीच इस स्थिति क बनाए रखना एक चुनौती है, क्योंकि वायरस लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है। ऐसे में अगर कोई नया स्ट्रेन आता है तो वह तेजी से फैल सकता है। इससे बचने के चार तरीके हैं। पहला की इसी तरह कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाए।
दूसरा संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिग लगातार क जाए और इसमें अगर कोई नया स्ट्रेन का मरीज मिले तो उसके इलाके के तुरंत कंटेन किया जाए। तीसरा यह है कि सरकार ने जो कलर कोड प्रणाली शुरू की है, उसको प्रभावी रूप से लागू करें। चौथा अधिक से अधिक टीकाकरण हो। इस सभी कदमों से स्थिति नियंत्रण में रहेगी और अगली लहर आने की आंशका काफी कम हो जाएगी।
इसलिए अभी यह वायरस की चपेट में नहीं आ रहे हैं। दूसरा यह है कि भले ही अन्य राज्यों में वायरस के कई म्यूटेशन सामने आ रहे हैं, लेकिन दिल्ली में फिलहाल क नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। तीसरा यह है कि इस बार कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए सरकार ने काफी सख्ती की हुई है। चौथा यह है दिल्ली कि करीब 45 फीसदी आबादी का वैक्सीनेशन हो चुका है।
इसी स्थिति को बनाए रखना एक चुनौती
एम्स के पूर्व डॉक्टर प्रवीण कुमार का कहना है कि दिल्ली में वायरस दम तोड़ रहा है। हालात काफी बेहतर हैं, लेकिन तीसरी लहर के खतरे के बीच इस स्थिति क बनाए रखना एक चुनौती है, क्योंकि वायरस लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है। ऐसे में अगर कोई नया स्ट्रेन आता है तो वह तेजी से फैल सकता है। इससे बचने के चार तरीके हैं। पहला की इसी तरह कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाए।
दूसरा संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिग लगातार क जाए और इसमें अगर कोई नया स्ट्रेन का मरीज मिले तो उसके इलाके के तुरंत कंटेन किया जाए। तीसरा यह है कि सरकार ने जो कलर कोड प्रणाली शुरू की है, उसको प्रभावी रूप से लागू करें। चौथा अधिक से अधिक टीकाकरण हो। इस सभी कदमों से स्थिति नियंत्रण में रहेगी और अगली लहर आने की आंशका काफी कम हो जाएगी।
ऐसे कम हुए सक्रिय मरीज
दिन- मरीज
12 मई-82,725
20-40,214
30-11,789
12 जून-3610
20-2091
30-1379
1 जुलाई-1379
इस साल अभी तक के रिकॉर्ड
दिल्ली की कोरोना टाइमलाइन
12 मई-82,725
20-40,214
30-11,789
12 जून-3610
20-2091
30-1379
1 जुलाई-1379
इस साल अभी तक के रिकॉर्ड
- रिकॉर्ड दैनिक मामले- 20 अप्रैल को 28,375
- रिकॉर्ड दैनिक मौतें- 3 मई को 448
- अस्पतालों में भर्ती मरीजों की अधिकतम संख्या-20,010
- फरवरी में पांच दिन मौत का आंकड़ा शून्य रहा था
- सबसे कम मामले- 11 जुलाई- 53
- सबसे कम सक्रिय मरीज 11 जुलाई -743
- सबसे कम संक्रमण दर-0.07 11 जुलाई
दिल्ली की कोरोना टाइमलाइन
- कोरोना का पहला मामला 2 मार्च 2020
- 13 मार्च 2020 को पहली मौत
- 16 मार्च को पहले मरीज ने संक्रमण से जंग जीती।
- 15 अप्रैल को पहली बार कोरोना मरीज को प्लाजमा दिया गया
- 02 जुलाई को देश का सबसे पहला प्लाज्मा बैंक दिल्ली में बना
- 13 जनवरी को दिल्ली पहुंची वैक्सीन की पहली खेप
- 16 जनवरी को लगा कोरोना का पहला टीका
छह माह में ऐसे घटा और बढ़ा संक्रमण का ग्राफ
16 जनवरी
दैनिक मामले- 299
संक्रमण दर-0.42
मौत-06
रिकवरी- 97.12
16 फरवरी
दैनिक मामले- 110
मौते- 01
संक्रमण दर -0.55
रिकवरी- 98
23 मार्च
दैनिक मामले- 1101
मौत-04
संक्रमण दर- 1.31
रिकवरी- 95.37
20 अप्रैल(पीक)
दैनिक मामले- 28,395
मौत- 277
संक्रमण दर-33
रिकवरी दर- 88
23 मई
दैनिक मामले- 1649
मौतें-189
संक्रमण दर-2.42
रिकवरी दर 94
11 जून
दैनिक मामले- 238
मौतें-24
संक्रमण दर-0.31
रिकवरी दर-97.8
11 जुलाई
दैनिक मामले-53
मौतें-03
संक्रमण दर-0.07
रिकवरी दर-98.8
नोट - सभी आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं और दर फीसदी में है
दैनिक मामले- 299
संक्रमण दर-0.42
मौत-06
रिकवरी- 97.12
16 फरवरी
दैनिक मामले- 110
मौते- 01
संक्रमण दर -0.55
रिकवरी- 98
23 मार्च
दैनिक मामले- 1101
मौत-04
संक्रमण दर- 1.31
रिकवरी- 95.37
20 अप्रैल(पीक)
दैनिक मामले- 28,395
मौत- 277
संक्रमण दर-33
रिकवरी दर- 88
23 मई
दैनिक मामले- 1649
मौतें-189
संक्रमण दर-2.42
रिकवरी दर 94
11 जून
दैनिक मामले- 238
मौतें-24
संक्रमण दर-0.31
रिकवरी दर-97.8
11 जुलाई
दैनिक मामले-53
मौतें-03
संक्रमण दर-0.07
रिकवरी दर-98.8
नोट - सभी आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं और दर फीसदी में है