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दिल्ली: अस्पताल में 50 दिन से भर्ती कोरोना मरीज अब हुआ डिस्चार्ज, डॉक्टर बोले- अभी रहना होगा कुछ समय घर पर

Sun, 04 Jul 2021 08:59 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 04 Jul 2021 08:59 PM IST
सार

डॉक्टरों ने बताया कि मरीज 50 दिनों तक आईसीयू में थे और लगभग 35-40 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। जब हम उनके फेफड़ों को ठीक कर पाए, तो उन्होंने क्वाड्रिपैरिसिस विकसित कर लिया। एक न्यूरोलॉजिस्ट की मदद से उस स्थिति का इलाज किया। तब रोगी में न्यूमोथोरैक्स विकसित हुआ जिसके तहत में फेफड़ों के अंदर हवा भर जाती है लेकिन इलाज के जरिए डॉक्टर इसे दूर करने में कामयाब रहे। 

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corona patient discharged from hospital after 50 days in delhi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोरोना वायरस के नए मामले भले ही कम हो रहे हैं लेकिन दूसरी लहर का असर काफी गंभीर था। इसका अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि रविवार को 50 दिन से अस्पताल में भर्ती मरीज को डॉक्टरों ने डिस्चार्ज किया। राहत की बात है कि मरीज को स्वस्थ्य बताते हुए डॉक्टरों ने फिलहाल कुछ समय के लिए घर पर ही रहने की सलाह दी है। 

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मूलचंद अस्पताल में भर्ती 38 वर्षीय मरीज एक बहु राष्ट्रीय कंपनी में कर्मचारी हैं। इन्हें कोरोना संक्रमण के साथ साथ मधुमेह भी था। बीते सात मई को इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जब शहर कोविड की दूसरी लहर से जूझ रहा था। 
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अस्पताल में क्रिटिकल केयर की निदेशक डॉ. सुरभि अवस्थी ने कहा कि मरीज को गंभीर निमोनिया था और उन्हें एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) भी हो गया था। यह स्थिति काफी गंभीर होती है। उनके अनुसार मरीज के रिश्तेदारों ने उसे एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ईसीएमओ) और फेफड़े के प्रत्यारोपण के लिए एयरलिफ्ट करने पर विचार किया था, लेकिन किसी तरह सुविधा में इलाज जारी रखने के लिए आश्वस्त थे। 
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डॉक्टरों ने बताया कि मरीज 50 दिनों तक आईसीयू में थे और लगभग 35-40 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। जब हम उनके फेफड़ों को ठीक कर पाए, तो उन्होंने क्वाड्रिपैरिसिस विकसित कर लिया। एक न्यूरोलॉजिस्ट की मदद से उस स्थिति का इलाज किया। तब रोगी में न्यूमोथोरैक्स विकसित हुआ जिसके तहत में फेफड़ों के अंदर हवा भर जाती है लेकिन इलाज के जरिए डॉक्टर इसे दूर करने में कामयाब रहे।

डॉक्टर ने कहा कि हर तीन से चार दिन में उसके बच्चे उसे खुश करने के लिए चित्र भेजते थे। उनका एक दो साल का बेटा और दूसरा पांच-छह साल का बच्चा है। वे उसके घर वापस आने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि मरीज की आत्मशक्ति उपचार में काफी अहम बनी और इतनी गंभीर स्थिति से बाहर लाया जा सका। 


अपने चारों ओर लोगों की मौत होने के बाद भी मरीज का हौसला कम नहीं हुआ। वे खुद को संभालते रहे। फिलहाल मरीज के ऊपरी अंगों में मूवमेंट होने लगा है लेकिन अभी निचले अंग कमजोर हैं। वह कुछ सेकंड के लिए अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। उसे ठीक होने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है और अभी भी अपने पैरों पर वापस आना है।

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