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Delhi News: चिप के निर्माण की खामियां कुछ सेकेंड में होंगी दूर
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यशोभूमि में शुरू हुए तीन दिवसीय सेमिकॉन इंडिया 2026 में बेंगलुरु की डीप टेक कंपनी रेवेक्टर टेक्नोलॉजीज ने तकनीक प्रदर्शित की
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। सेमीकंडक्टर उद्योग में चिप की गुणवत्ता और सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है। निर्माण के दौरान चिप में होने वाली छोटी सी गड़बड़ी भी कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में गड़बड़ी को समय रहते पहचानने वाली तकनीक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यशोभूमि में बृहस्पतिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय सेमिकॉन इंडिया 2026 में बेंगलुरु की डीप टेक कंपनी रेवेक्टर टेक्नोलॉजीज ने ऐसी ही तकनीक प्रदर्शित की, जो चिप निर्माण के दौरान होने वाली खामियों को तेजी से पहचानने में मदद करती है।
कंपनी ने प्रदर्शनी में बहु-सेंसर मॉड्यूल आधारित वेफर हैंडलिंग तकनीक पेश की। कंपनी के अनुसार, यह तकनीक बेहद छोटे स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों को कुछ ही सेकेंड में पहचान सकती है। इससे निर्माण प्रक्रिया में खामी का समय रहते पता लगाने और बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका कम करने में मदद मिलती है। कंपनी का दावा है कि सैमसंग, इंटेल और टीएसएमसी जैसी कंपनियां उसकी तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।
सेंसर, चित्रांकन और एआई का मेल
सेमीकंडक्टर के निर्माण में अब केवल चिप तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। चिप की जांच, सटीक चित्रांकन, सेंसर आधारित निगरानी और आंकड़ों के विश्लेषण की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। रेवेक्टर इन क्षेत्रों में शोध और वास्तविक औद्योगिक उपयोग के बीच की दूरी कम करने पर काम कर रही है।
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प्रयोगशाला से उद्योग तक पहुंचाने पर जोर
कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी चक्रवर्ती एलुमलाई के मुताबिक, रेवेक्टर का जोर नई तकनीकों को केवल प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यावहारिक और बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले उत्पादों में बदलने पर है। कंपनी की भारत के साथ अमेरिका में भी मौजूदगी है। अमेरिका के ओरेगन स्थित टुआलाटिन में उसका इंजीनियरिंग केंद्र काम कर रहा है। कंपनी के अनुसार, भारत की शोध और विकास क्षमताओं को अमेरिकी सेमीकंडक्टर उद्योग के तंत्र से जोड़कर वैश्विक विस्तार की दिशा में काम किया जा रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। सेमीकंडक्टर उद्योग में चिप की गुणवत्ता और सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है। निर्माण के दौरान चिप में होने वाली छोटी सी गड़बड़ी भी कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में गड़बड़ी को समय रहते पहचानने वाली तकनीक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यशोभूमि में बृहस्पतिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय सेमिकॉन इंडिया 2026 में बेंगलुरु की डीप टेक कंपनी रेवेक्टर टेक्नोलॉजीज ने ऐसी ही तकनीक प्रदर्शित की, जो चिप निर्माण के दौरान होने वाली खामियों को तेजी से पहचानने में मदद करती है।
कंपनी ने प्रदर्शनी में बहु-सेंसर मॉड्यूल आधारित वेफर हैंडलिंग तकनीक पेश की। कंपनी के अनुसार, यह तकनीक बेहद छोटे स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों को कुछ ही सेकेंड में पहचान सकती है। इससे निर्माण प्रक्रिया में खामी का समय रहते पता लगाने और बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका कम करने में मदद मिलती है। कंपनी का दावा है कि सैमसंग, इंटेल और टीएसएमसी जैसी कंपनियां उसकी तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।
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सेंसर, चित्रांकन और एआई का मेल
सेमीकंडक्टर के निर्माण में अब केवल चिप तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। चिप की जांच, सटीक चित्रांकन, सेंसर आधारित निगरानी और आंकड़ों के विश्लेषण की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। रेवेक्टर इन क्षेत्रों में शोध और वास्तविक औद्योगिक उपयोग के बीच की दूरी कम करने पर काम कर रही है।
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प्रयोगशाला से उद्योग तक पहुंचाने पर जोर
कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी चक्रवर्ती एलुमलाई के मुताबिक, रेवेक्टर का जोर नई तकनीकों को केवल प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यावहारिक और बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले उत्पादों में बदलने पर है। कंपनी की भारत के साथ अमेरिका में भी मौजूदगी है। अमेरिका के ओरेगन स्थित टुआलाटिन में उसका इंजीनियरिंग केंद्र काम कर रहा है। कंपनी के अनुसार, भारत की शोध और विकास क्षमताओं को अमेरिकी सेमीकंडक्टर उद्योग के तंत्र से जोड़कर वैश्विक विस्तार की दिशा में काम किया जा रहा है।