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व्हॉट्सएप और फेसबुक की नई निजता नीति को आम लोगों के हितों के खिलाफ : सीसीआई
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नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने व्हॉट्सएप और फेसबुक की नई निजता नीति को आम लोगों के हितों के खिलाफ बताया है। हाईकोर्ट के समक्ष संदेश भेजने के मंच व्हॉट्सएप की नई निजता नीति की जांच के आदेश देने के अपने निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा कि विज्ञापन के लिए अपने उपभोक्ताओं का डाटा एकत्रित करना और उसका उपयोग करना पूरी तरह से गलत है। यह अपने प्रभाव का दुरुपयोग है। वहीं व्हॉट्सएप और फेसबुक ने जांच आदेश को गलत बताया है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इन कंपनियों ने सीसीआई के 24 मार्च के नई निजता नीति की जांच के आदेश को चुनौती दी है। इस मामले में व्हॉट्सएप और फेसबुक की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी की निजता संबंधी नीति सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। इसमें सीसीआई को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
वहीं सीसीआई के तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने अपने मुवक्किल के जांच केेे आदेश को उचित ठहराया। उन्होंने कोर्ट से कहा कि सीसीआई इस मामले में प्रतिस्पर्धा के पहलुओं पर गौर कर रहा है। प्रतिस्पर्धा नियामक व्यक्तिगत निजता के उल्लंघन के मामले को नहीं देख रहा है। निजता के अधिकार से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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उन्होंने कहा कि इस मामले में अधिकार क्षेत्र की गलती का सवाल नहीं है। व्हॉट्सएप और फेसबुक ने जो सीसीआई के फैसले को चुनौती दी हैं वे अनुचित और मिथ्या अवधारणा पर आधारित हैं। लेखी ने कोर्ट को बताया कि व्हॉट्सएप द्वारा डाटा का संग्रहण और उसके फेसबुक से साझा करना प्रतिस्पर्धा रोधी है या नहीं, यह सिर्फ जांच के बाद ही तय हो सकेगा।
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न्यायमूर्ति नवीन चावला ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इन कंपनियों ने सीसीआई के 24 मार्च के नई निजता नीति की जांच के आदेश को चुनौती दी है। इस मामले में व्हॉट्सएप और फेसबुक की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी की निजता संबंधी नीति सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। इसमें सीसीआई को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
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वहीं सीसीआई के तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने अपने मुवक्किल के जांच केेे आदेश को उचित ठहराया। उन्होंने कोर्ट से कहा कि सीसीआई इस मामले में प्रतिस्पर्धा के पहलुओं पर गौर कर रहा है। प्रतिस्पर्धा नियामक व्यक्तिगत निजता के उल्लंघन के मामले को नहीं देख रहा है। निजता के अधिकार से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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उन्होंने कहा कि इस मामले में अधिकार क्षेत्र की गलती का सवाल नहीं है। व्हॉट्सएप और फेसबुक ने जो सीसीआई के फैसले को चुनौती दी हैं वे अनुचित और मिथ्या अवधारणा पर आधारित हैं। लेखी ने कोर्ट को बताया कि व्हॉट्सएप द्वारा डाटा का संग्रहण और उसके फेसबुक से साझा करना प्रतिस्पर्धा रोधी है या नहीं, यह सिर्फ जांच के बाद ही तय हो सकेगा।