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बृजेश ठाकुर की जुर्माना माफी याचिका का सीबीआई ने किया विरोध
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नई दिल्ली। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम दुष्कर्म मामले में दोषी बृजेश ठाकुर की 32 लाख का जुर्माना रद्द करने की मांग वाली याचिका का सीबीआई ने हाईकोर्ट में विरोध किया है। इस मामले में अदालत ने ठाकुर को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा के साथ 32 लाख का जुर्माना भरने का आदेश दिया था। पीठ ने अगली सुनवाई 15 सितंबर के लिए तय की है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ के समक्ष सीबीआई ने बृजेश ठाकुर की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ठाकुर पर 32 लाख का जुर्माना लगाए जाने में कोई पक्षपात नहीं हुआ है। यह जुर्माना उचित और न्याय हित में है तथा इस जुर्माने को अदा करने के लिए ठाकुर बाध्य है। पीठ ने कहा कि सीबीआई का जवाब रिकॉर्ड पर नहीं है। पीठ ने वकील को जवाब रिकार्ड पर लाने के लिए कहा है।
इस याचिका में बृजेश ठाकुर और सह-दोषी तथा बाल कल्याण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप वर्मा ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। इस मामले में बृजेश ठाकुर के साथ वर्मा को भी निचली अदालत ने अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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निचली अदालत का रिकार्ड 86,000 पन्नों का है। इसलिए पीठ ने वर्मा की ओर पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर और ठाकुर की ओर से पेश वकील प्रमोद कुमार दुबे को निर्देश दिया कि वे संबंधित दस्तावेजों का संकलन कर पेश करें।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ के समक्ष सीबीआई ने बृजेश ठाकुर की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ठाकुर पर 32 लाख का जुर्माना लगाए जाने में कोई पक्षपात नहीं हुआ है। यह जुर्माना उचित और न्याय हित में है तथा इस जुर्माने को अदा करने के लिए ठाकुर बाध्य है। पीठ ने कहा कि सीबीआई का जवाब रिकॉर्ड पर नहीं है। पीठ ने वकील को जवाब रिकार्ड पर लाने के लिए कहा है।
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इस याचिका में बृजेश ठाकुर और सह-दोषी तथा बाल कल्याण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप वर्मा ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। इस मामले में बृजेश ठाकुर के साथ वर्मा को भी निचली अदालत ने अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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निचली अदालत का रिकार्ड 86,000 पन्नों का है। इसलिए पीठ ने वर्मा की ओर पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर और ठाकुर की ओर से पेश वकील प्रमोद कुमार दुबे को निर्देश दिया कि वे संबंधित दस्तावेजों का संकलन कर पेश करें।