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ऑक्सीजन की कमी से मौत का मामला : केंद्र ने मांगा ब्योरा, दिल्ली सरकार कर रही एलजी का आदेश भेजने की तैयारी

Fri, 06 Aug 2021 03:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 06 Aug 2021 03:14 AM IST
सार

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों से मांगी है जानकारी
  • दिल्ली सरकार ने कहा, उसके पास फिलहाल कोई आंकड़ा नहीं
  • जांच के लिए बनाई गई कमेटी एलजी ने कर दी थी भंग

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Case of death due to lack of oxygen: Center sought details, Delhi government is preparing to send LG's order
कोरोना वायरस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन या इलाज न मिलने की वजह से जिन लोगों की मौत हुई है उनकी जानकारी केंद्र सरकार ने मांगी है, लेकिन दिल्ली सरकार ने इसका जवाब अलग तरीके से देने का फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार ने जब कमेटी बनाई थी तो उपराज्यपाल ने उसे भंग कर दिया था। इसलिए पत्र के जवाब में एलजी अनिल बैजल के निर्देश पत्र की चर्चा करने के लिए कहा गया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के पास अप्रैल से जून के बीच ऑक्सीजन की कमी, बिस्तर न मिलने या फिर अस्पतालों के बाहर कितने लोगों की मौत हुई है? इससे जुड़ी जानकारी नहीं है। 

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उधर, दिल्ली सरकार के अस्पतालों ने भी ऑक्सीजन की कमी से एक भी मरीज की मौत न होने का दावा किया है, जिसमें केंद्र सरकार के एम्स, आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार के लोकनायक अस्पताल, डीडीयू, बाबा भीमराव आंबेडकर और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने ऐसा कोई भी रिकॉर्ड होने से इनकार किया है। 
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जानकारी के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखते हुए 13 अगस्त तक ऑक्सीजन की कमी या फिर इलाज न मिलने की वजह से हुई मौतों का पूरा ब्यौरा मांगा है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग फिलहाल इस पत्र का जवाब देने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार लिखित तौर पर बताना चाहती है कि वे उन मौतों का पता लगाना चाहते थे, लेकिन एलजी ने इसमें दखलदांजी करते हुए कमेटी को भंग कर दिया।
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अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि उनके पास ऐसा कोई आंकड़ा वर्तमान में नहीं है। इसकी जानकारी लेने के लिए एक ऑडिट कराना होगा। साथ ही घर-घर सर्वे या पब्लिक फोरम में आकर लोगों से आवेदन लेकर जांच करनी होगी। इसके बाद ही यह जानकारी पता चल सकती है। हालांकि, वर्तमान स्थिति देखें तो अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी जांच और जानकारी मिलने में कम से कम तीन से चार महीने का वक्त लग सकता है।


हाल ही में गंगाराम, बत्रा और जयपुर गोल्डन अस्पताल में हुई घटनाओं को लेकर भी उन्होंने कहा कि यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। अस्पतालों से ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है, लेकिन आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि, इसे साबित करने का एक सिस्टम ही विकसित नहीं है।

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