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दिल्ली में ब्लैक फंगस : जानें म्यूकरमाइकोसिस के बारे में, संक्रमण को रोकने के लिए डॉक्टर ने दिए सुझाव

Tue, 25 May 2021 08:40 PM IST
सुशील कुमार कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 25 May 2021 08:40 PM IST
सार

लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि ब्लैक फंगस उन लोगों में होता है, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है या वे मधुमेह से पीड़ित होते हैं।

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Black Fungus in Delhi Learn about Mucormycosis doctor gave advice to stop infection
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

दिल्ली में कोरोना की लहर का कहर अभी थमा भी नहीं कि ब्लैक फंगस ने कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। दिल्ली में पांच सौ से अधिक मामले सामने आ गए और धीरे-धीरे अपना पैर पसारता ही जा रहा है। रोजाना ब्लैक फंगस के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है। 

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इस बीच दिल्ली के डॉक्टरों ने ऐसे उपाय बताए हैं, जिससे संक्रमण के प्रसार को रोका जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना संक्रमित या इससे ठीक हुए लोग म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) की चपेट में आ रहे हैं। यह नाक, आंख और नसों को प्रभावित करता है। किडनी, हृदय और लिवर के मरीजों को भी संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है।
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लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि ब्लैक फंगस उन लोगों में होता है, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है या वे मधुमेह से पीड़ित होते हैं। उन्होंने कहा कि स्टेरॉयड के इस्तेमाल से ब्लड शुगर बढ़ जाता है और फंगस सांस के जरिए अंदर घुस जाता है। फिर यह फेफड़ों और पूरे शरीर में फैल जाता है और किडनी को भी नुकसान पहुंचाता है।
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डॉ. सुरेश कुमार ने म्यूकरमाइकोसिस संक्रमण को रोकने के तरीके बताते हुए कहते हैं कि ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखना होगा, साथ ही केवल डॉक्टरों की सलाह पर स्टेरॉयड का सेवन करना चाहिए और फेस मास्क को साफ रखना होगा। एलएनजेपी अस्पताल ने अब तक म्यूकरमाइकोसिस के 36 मामले दर्ज किए हैं। डॉ कुमार ने कहा कि उनमें से 30 कोविड रोगी हैं। 
 

वहीं, एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग म्यूकरमाइकोसिस, कैंडिड और एस्पोरोजेनस संक्रमण से संक्रमित होते हैं। ये फंगस मुख्य रूप से नसें, नाक, आंखों के आसपास की हड्डी में पाए जाते हैं और मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं। कभी-कभी फेफड़ों (पल्मोनरी म्यूकरमाइकोसिस) या जठरांत्र संबंधी मार्ग में पाए जाते हैं। 

डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि कुछ लक्षण हैं जो कोरोना संक्रमण के बाद देखे जाते हैं। यदि लक्षण 4-12 सप्ताह तक देखे जाते हैं, तो इसे ऑनगोइंग सिम्प्टोमैटिक कोविड या पोस्ट-एक्यूट कोविड सिंड्रोम कहा जाता है। यदि लक्षण 12 सप्ताह से अधिक समय तक दिखाई देते हैं, तो इसे पोस्ट-कोविड सिंड्रोम कहा जाता है। 

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