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बर्ड फ्लू: पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से बचें, बरतें सावधानी, पक्षी पालन से जुड़े लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
Mon, 11 Jan 2021 11:58 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 11 Jan 2021 11:58 PM IST
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बर्ड फ्लू को लेकर केंद्रीय टीम ने दौरा किया।
- फोटो : अमर उजाला
राजधानी में कोरोना वायरस के घटते मामलों के बीच अब बर्ड फ्लू की भी पुष्टि हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग पक्षी पालन से जुड़े हैं। उन्हें सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योकि यह वायरस लोगों में भी फैल सकता है।
इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के डॉक्टर विजय दत्ता ने बताया कि जिन मृत पक्षियों में यह वायरस पाया गया है। उनके सीधे संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के भी इससे संक्रमित होने की संभावना है। हालांकि, बर्ड फ्लू का एच-5एन-1 स्ट्रेन की लोगों में फैलता है, लेकिन सभी को पूरी सावधानी बरतनी होगी खासकर पक्षी पालन से जुड़े लोगों को पक्षियों के संपर्क में आने से बचना होगा।
डॉक्टर के मुताबिक, बर्ड फ्लू का यह स्ट्रेन काफी घातक है। इसका पहला मामला 1997 में आया था। इस वायरस से पीड़ित होने के बाद 60 फीसदी तक जान का खतरा रहता है। इसलिए, इस समय पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। पक्षी पालन से जुड़े लोगों को पोल्ट्री फार्म में जाने से पहले पीपीई किट पहननी जरूरी है। अगर किसी संक्रमित पक्षी के संपर्क में आए हैं और खांसी बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने की समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह ले।
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इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के डॉक्टर विजय दत्ता ने बताया कि जिन मृत पक्षियों में यह वायरस पाया गया है। उनके सीधे संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के भी इससे संक्रमित होने की संभावना है। हालांकि, बर्ड फ्लू का एच-5एन-1 स्ट्रेन की लोगों में फैलता है, लेकिन सभी को पूरी सावधानी बरतनी होगी खासकर पक्षी पालन से जुड़े लोगों को पक्षियों के संपर्क में आने से बचना होगा।
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डॉक्टर के मुताबिक, बर्ड फ्लू का यह स्ट्रेन काफी घातक है। इसका पहला मामला 1997 में आया था। इस वायरस से पीड़ित होने के बाद 60 फीसदी तक जान का खतरा रहता है। इसलिए, इस समय पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। पक्षी पालन से जुड़े लोगों को पोल्ट्री फार्म में जाने से पहले पीपीई किट पहननी जरूरी है। अगर किसी संक्रमित पक्षी के संपर्क में आए हैं और खांसी बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने की समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह ले।
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