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किसान आंदोलन : सरकार न्योता भेजेगी तो बात करेंगे, टिकैत बोले-जहां रुकी थी, वहीं से शुरू होगी वार्ता
Sun, 11 Apr 2021 11:22 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 11 Apr 2021 11:22 PM IST
सार
सरकार न्यौता भेजेगी तो बात करेंगे: राकेश टिकैत
'किसान नेता ने कहा, जहां बात रुकी थी, वहीं से शुरू होगी'
हरियाणा के मुख्यमंत्री को बड़ौली में 14 को प्रवेश करने से रोंकेंगे किसान: टिकैत
खाप पंचायतें भी संयुक्त किसान मोर्चा के साथ
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राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनिन
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
भारतीय किसान यूनियन ( अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार यदि संयुक्त किसान मोर्चा को वार्ता को न्यौता भेजेगी तो मोर्चा उस पर विचार करेगा। सरकार से वार्ता वहीं से शुरू होगी, जहां 22 जनवरी को रुकी थी। तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी , एमएसपी के लिए कानून पर बात होगी। किसानों के मुद्दे वहीं रहेंगे। यह बातें राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार के कृषि मंत्री की ओर से आए बयान के जबाब में कहीं।
रविवार को चौधरी राकेश टिकैत सिंघु बार्डर पर आयोजित सर्वखाप पंचायत में हिस्सा लेने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल को बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर के जन्मदिवस पर किसानों का मोर्चों संविधान बचाओ दिवस मनाएगा।
उससे पहले 13 अप्रैल को आंदोलन के सभी मोर्चों पर खालसा पंथ स्थापना दिवस मनाया जाएगा और जलियांवाला बाग कांड की बरसी पर शहीदों को याद किया जाएगा।
कृषि मंत्री के बयान के सवाल पर चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार जैसे 22 जनवरी से पहले संयुक्त किसान मोर्चा को वार्ता का न्यौता भेजती रही है, उसी तरह न्यौता भेजेगी, तो मोर्चा उस पर विचार करेगा। वार्ता के मुद्दों के सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि वार्ता के मुद्दे पहले वाले ही रहेंगे।
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रविवार को चौधरी राकेश टिकैत सिंघु बार्डर पर आयोजित सर्वखाप पंचायत में हिस्सा लेने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल को बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर के जन्मदिवस पर किसानों का मोर्चों संविधान बचाओ दिवस मनाएगा।
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उससे पहले 13 अप्रैल को आंदोलन के सभी मोर्चों पर खालसा पंथ स्थापना दिवस मनाया जाएगा और जलियांवाला बाग कांड की बरसी पर शहीदों को याद किया जाएगा।
कृषि मंत्री के बयान के सवाल पर चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार जैसे 22 जनवरी से पहले संयुक्त किसान मोर्चा को वार्ता का न्यौता भेजती रही है, उसी तरह न्यौता भेजेगी, तो मोर्चा उस पर विचार करेगा। वार्ता के मुद्दों के सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि वार्ता के मुद्दे पहले वाले ही रहेंगे।
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हरियाणा के मुख्यमंत्री को बड़ौली में 14 को प्रवेश करने से रोंकेंगे किसान: टिकैत
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को 14 अप्रैल को पानीपत के बड़ौली में आयोजित कार्यक्रम में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। आरोप लगाया कि बाबा साहेब की प्रतिमा के अनावरण की आड़ में खट्टर के पहुंचने से आपसी ताना बाना खराब हो सकता है।
संयुक्त किसान मोर्चा मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के खिलाफ है और तमाम खाप पंचायतें भी साथ हैं। 14 अप्रैल को बडौली में डॉ. बी आर अंबेडकर की मूर्ति के अनावरण के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। टिकैत ने कहा कि हम, बाबा साहेब की प्रतिमा के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन मोर्चा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री यहां प्रतिमा का अनावरण करने नहीं बल्कि भाजपा के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं ताकि इस क्षेत्र में सामाजिक ताना बाना खराब हो। टिकैत ने कहा कि इस क्षेत्र में शांति और अमन को खराब नहीं होने देंगे। टिकैत ने कहा कि अगर इस प्रतिमा का अनावरण कोई और करना चाहता है तो इजाजत होगी।
26 नवंबर, 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर के किसान अभी भी डेरा डाले हुए हैं। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने सहित एमएसपी की गारंटी की मांग पर किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले करीब साढ़े चार महीने से डटे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई है।
संयुक्त किसान मोर्चा मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के खिलाफ है और तमाम खाप पंचायतें भी साथ हैं। 14 अप्रैल को बडौली में डॉ. बी आर अंबेडकर की मूर्ति के अनावरण के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। टिकैत ने कहा कि हम, बाबा साहेब की प्रतिमा के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन मोर्चा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री यहां प्रतिमा का अनावरण करने नहीं बल्कि भाजपा के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं ताकि इस क्षेत्र में सामाजिक ताना बाना खराब हो। टिकैत ने कहा कि इस क्षेत्र में शांति और अमन को खराब नहीं होने देंगे। टिकैत ने कहा कि अगर इस प्रतिमा का अनावरण कोई और करना चाहता है तो इजाजत होगी।
26 नवंबर, 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर के किसान अभी भी डेरा डाले हुए हैं। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने सहित एमएसपी की गारंटी की मांग पर किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले करीब साढ़े चार महीने से डटे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई है।