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बाटला हाउस एनकाउंटर पर विवाद... ध्रुवीकरण और मौत की सजा

Tue, 16 Mar 2021 05:25 AM IST
योगेश जोशी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: योगेश जोशी Updated Tue, 16 Mar 2021 05:25 AM IST
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batla house encounter case judgement verdict
बाटला हाउस एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला

राजधानी में 13 सितंबर 2008 को कई जगह सीरियल बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में कम से कम 30 लोग मारे गए और 100 से अधिक जख्मी हुए। धमाकों की जांच का जिम्मा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंपा गया। धमाकों के छह दिन बाद 19 सितंबर की सुबह स्पेशल सेल की टीम ने आईएम के कई आतंकियों को बटला हाउस के एक फ्लैट में घेर लिया। इसके बाद हुए बटला हाउस एनकाउंटर के बाद कई विवाद हुए, ध्रुवीकरण हुआ और इस मामले को बॉलीवुड ने भी इसी नाम से फिल्म की शक्ल में दिखाया। 

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बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया था। इसके बाद नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने स्पेशल सेल के अधिकारियों पर सवाल उठाए और लोगों की राय को जुदा और इससे जुड़े विवादों का सिलसिला चलता रहा। 
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इस एनकाउंटर के भाजपा तथा कांग्रेस के बीच सालों से खींचतान का कारण रहा है। आतंक पर कड़ी कार्रवाई न करने का आरोप भाजपा लगातार कांग्रेस पर लगाती। वहीं एनकाउंटर पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों पर भी सवाल उठाती रही। इसके साथ ही इन पार्टियों से माफी मांगने का दबाव डालती रही। 
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स्पेशल सेल के तत्कालीन मुखिया करनेल सिंह ने उस दिन बटला हाउस के फ्लैट नंबर एल-18 में हुए एनकाउंटर की कई खास जानकारियां अपनी किताब ‘बटला हाउस: एन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन’ में दी हैं। उन्होंने इस किताब पर बात करते हुए 2020 में बताया था कि किस तरह एनकाउंटर को फर्जी साबित करने के लिए फर्जी खबरों और अफवाहों को राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और मीडिया ने अपना हथियार बनाया। उन्होंने स्पेशल सेल का संयुक्त आयुक्त होने के बाद इस केस की पूरी जांच की अगुवाई की थी।

इस एनकाउंटर को अब तक हुए एनकाउंटरों में सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चाओं वाला लोगों ने माना। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के उस बयान से बवाल हो गया था कि एनकाउंटर की तस्वीरें देखकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी रोने लगी थीं। इस बयान को आधार बनाकर भाजपा ने तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया था। 

राजधानी के कई चुनावों में पर्यवेक्षक रहे एक अधिकारी के अनुसार इस एनकाउंटर से पहले राजनीतिक पार्टियां वोटरों को लुभाने के लिए विकास की बात करती थीं लेकिन इसके बाद राजनीतिक परिदृश्य बदल गया। राजनीतिक ध्रुवीकरण राजधानी के राजनीति का अहम हिस्सा बन गया। 

एक राजनीतिक आलोचक और वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि एनकाउंटर के बाद राजधानी में दबे तौर पर ध्रुवीकरण की राजनीति होने लगी थी। इस मामले ने सब का ध्यान खींचा था क्योंकि ये देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा था। इसके अलावा राजनेताओं ने ध्रुवीकरण के लिए जिस भाषा का प्रयोग किया उससे मामला और बिगड़ा। 

ये एनकाउंटर बॉलीवुड में इसी नाम से बनने वाली फिल्म का भी आधार बना। इस फिल्म में जॉन अब्राहम और मृणाल ठाकुर ने मुख्य किरदार निभाए थे और इसे निखिल अडवानी ने निर्देशित किया था। 

वहीं इस एनकाउंटर के बाद इसके विरोध में जामिया के छात्रों व शिक्षकों ने रैलियां निकाली थीं। हालांकि इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दी थी।

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