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एएसजी बोले, यूनिवर्सिटी शिक्षा के लिए है, असामंजस्य पैदा करने के लिए नहीं
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नई दिल्ली। विश्वविद्यालय शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं, न कि असामंजस्य में पैदा करने के लिए। यह दलील जामिया हिंसा मामले में शुक्रवार को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अमन लेखी ने हाईकोर्ट में दी। हिंसा के दौरान पुलिस को तत्कालीन हालात के मद्देनजर जो जरूरी लगा वह कार्रवाई की गई। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष अमन लेखी ने कहा कि दिसंबर 2019 में जामिया यूनिवर्सिटी में और उसके आसपास हिंसा को लेकर दायर याचिकाएं केवल राय और एजेंडे पर आधारित हैं। उन्होंने कहा यनिवर्सिटी परिसर शिक्षा के लिए है न कि वहां पर असामंजस्य पैदा करने के लिए। हालात के मद्देनजर पुलिस ने जो कार्रवाई की वह बेहद जरूरी थी।
दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए उन्होंने दावा किया कि याचिकाकर्ताओं ने टुकड़ों में जानकारी एकत्र की और उसी के आधार पर पुलिस पर आरोप लगाए गए। उन्होंने उस आरोप का भी खंडन किया जिसमें कहा गया कि पुलिस ने एक विशेष समुदाय के साथ गठबंधन किया और बिना अनुमति के यूनिवर्सिटी में प्रवेश किया। उन्होंने दावा किया कि यह एक खुद से लगाया गया आरोप है।
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उन्होंने कहा यूनिवर्सिटी में छात्र भी गलत कर सकते हैं। जब कोई अपराध होता है, तब ही पुलिस का हस्तक्षेप होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आगजनी और विनाश को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी में प्रवेश किया।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में कई याचिकाएं दायर हैं। इनमें कहा गया है कि हिंसा के दौरान पुलिस ने यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति प्रवेश कर छात्रों पर बर्बरता की। इस संबंध में पुलिस पर कार्रवाई करने और एफआईआर दर्ज करने समेत अन्य मांगें की गई हैं।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष अमन लेखी ने कहा कि दिसंबर 2019 में जामिया यूनिवर्सिटी में और उसके आसपास हिंसा को लेकर दायर याचिकाएं केवल राय और एजेंडे पर आधारित हैं। उन्होंने कहा यनिवर्सिटी परिसर शिक्षा के लिए है न कि वहां पर असामंजस्य पैदा करने के लिए। हालात के मद्देनजर पुलिस ने जो कार्रवाई की वह बेहद जरूरी थी।
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दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए उन्होंने दावा किया कि याचिकाकर्ताओं ने टुकड़ों में जानकारी एकत्र की और उसी के आधार पर पुलिस पर आरोप लगाए गए। उन्होंने उस आरोप का भी खंडन किया जिसमें कहा गया कि पुलिस ने एक विशेष समुदाय के साथ गठबंधन किया और बिना अनुमति के यूनिवर्सिटी में प्रवेश किया। उन्होंने दावा किया कि यह एक खुद से लगाया गया आरोप है।
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उन्होंने कहा यूनिवर्सिटी में छात्र भी गलत कर सकते हैं। जब कोई अपराध होता है, तब ही पुलिस का हस्तक्षेप होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आगजनी और विनाश को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी में प्रवेश किया।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में कई याचिकाएं दायर हैं। इनमें कहा गया है कि हिंसा के दौरान पुलिस ने यूनिवर्सिटी में बिना अनुमति प्रवेश कर छात्रों पर बर्बरता की। इस संबंध में पुलिस पर कार्रवाई करने और एफआईआर दर्ज करने समेत अन्य मांगें की गई हैं।