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Hindi News ›   Delhi ›   Appointment will be made on 126 vacant posts of Principal and Deputy Education Officer

Delhi: प्रधानाचार्य व उप शिक्षा अधिकारी के 126 रिक्त पदों पर होगी नियुक्ति, सिसोदिया ने राज्यपाल पर बोला हमला

Sun, 05 Feb 2023 04:51 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 05 Feb 2023 04:51 AM IST
सार

राजनिवास कार्यालय का मानना है कि शिक्षा विभाग के कामकाज के लिए एक प्रधानाध्यापक का पद एक महत्वपूर्ण पद है और इसे न तो खाली रहना चाहिए और न ही पदोन्नति के माध्यम से भरने की मजबूरी  होनी चाहिए।
 

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Appointment will be made on 126 vacant posts of Principal and Deputy Education Officer
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना खुद सक्रिय हो गए है। उन्होंने प्राचार्य व उप शिक्षा अधिकारी के 126 रिक्त पद पर फिर से बहाली करने की स्वीकृति प्रदान की है। यह पद दो वर्ष से अधिक समय से रिक्त था। शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित प्राचार्य व उप शिक्षा अधिकारी के 244 पदों को समाप्त करने के प्रस्ताव को भी स्थगित कर दिया है। यह पद भी पिछले पांच वर्ष से रिक्त पड़े थे। 

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शिक्षा निदेशालय द्वारा वर्ष 2013-14 से 2019 तक भर्ती नियमों के अनुसार इन 370 पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरा जाना था। हालांकि इनमें से कोई भी पद पदोन्नति के माध्यम से नहीं भरा गया और खाली ही रहने दिया गया। सरकारी नियम यह कहता है कि अगर दो साल से अधिक समय से कोई पद खाली रह जाता है तो उसे समाप्त समझा या माना जाता है और पांच साल से अधिक समय से खाली पड़े पदों को समाप्त माना जाता है। 
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राजनिवास कार्यालय का मानना है कि शिक्षा विभाग के कामकाज के लिए एक प्रधानाध्यापक का पद एक महत्वपूर्ण पद है और इसे न तो खाली रहना चाहिए और न ही पदोन्नति के माध्यम से भरने की मजबूरी  होनी चाहिए।
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प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति के मामले में झूठ बोल रहे हैं उपराज्यपाल : सिसोदिया
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति के संबंध में दिल्ली के उपराज्यपाल के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने उनसे इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने और इसके बजाय यह बताने को कहा कि वह इतनी महत्वपूर्ण नियुक्तियों में देरी क्यों हो रही है। कहा है कि उपराज्यपाल ने व्यापक अध्ययन के नाम पर 244 पदों के पुनरुद्धार को रोक दिया है। स्कूल बिना प्रिंसिपल के चल रहे हैं और वे अध्ययन की बात कह रहे हैं। 

सिसोदिया ने कहा कि हर स्कूल को एक प्रिंसिपल की जरूरत होती है। अगर कोई पद रिक्त है तो उसे आवश्यकता का अध्ययन करने के बजाय भरा जाना चाहिए। फाइलों को सार्वजनिक करना चाहिए। उपराज्यपाल समझाएं कि नियुक्ति में देरी क्यों कर रहे हैं। सिसोदिया ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा है कि स्कूल के प्रधानाध्यापकों के पदों को पुनर्जीवित करने के संबंध में उपराज्यपाल झूठे दावे कर रहे है। एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि  स्कूलों में प्रिंसिपल के पद खाली पड़े हैं। वाइस प्रिंसिपल ही प्रिंसिपल का काम कर रहे हैं। 

उपराज्यपाल कार्यालय का यह दावा झूठ का एक नया पुलिंदा है। उपराज्यपाल कार्यालय का यह कहना कि स्कूल प्रधानाध्यापकों के 126 पदों के पुनरुद्धार को मंजूरी दे दी गई है, जो आप सरकार की उदासीनता और निष्क्रियता के कारण समाप्त हो गए थे। यह उपराज्यपाल कार्यालय का एक और झूठ है। सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति को 7 साल से अधिक समय से रोक रखा है।


केजरीवाल बोले- सभी से लड़ रही केंद्र सरकार 
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार सभी से लड़ रही है। न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रणाली से जुड़ी एक खबर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को दूसरों के काम में दखल नहीं देना चाहिए।  यदि केंद्र सरकार हर किसी से झगड़ा करेगी  तो देश तरक्की कैसे करेगा। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के साथ भी केंद्र की लड़ाई  चल रही है। केंद्र के नियुक्त उपराज्यपाल  की एक सीमा है, लेकिन वे क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर काम कर रहे हैं। 

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