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एम्स निदेशक का खुलासा: 10 दिन तक ही स्टेरॉयड की जरूरत, ज्यादा देने पर ब्लैक फंगस का खतरा
Sun, 16 May 2021 09:03 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 16 May 2021 09:03 AM IST
सार
एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा अनियंत्रित मधुमेह, स्टेरॉयड का अधिक एवं बेवजह इस्तेमाल और कोरोना संक्रमण से ब्लैक फंगस जानलेवा हो सकता है।
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डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कोरोना से ठीक होने वाले या संक्रमण के दौरान मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते मरीजों की मौत तक हो रही है। एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा, आमतौर पर पांच से 10 दिन तक ही स्टेरॉयड की जरूरत पड़ती है, इससे ज्यादा दिनों तक मरीज को यह दवाएं दी जाएं तो ब्लैक फंगस की आशंका काफी बढ़ जाती है।
स्टेरॉयड दे रहे हैं तो मरीज की पूरी निगरानी करना भी स्वास्थ्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। ब्लैक फंगस से बचने के लिए मरीज की निगरानी बहुत जरूरी है।
उन्होंने बताया कि एम्स में अब तक 23 मरीज ब्लैक फंगस के चलते भर्ती हुए हैं। इनमें 20 मरीज कोविड संक्रमित है। जबकि तीन हाल ही में कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस की चपेट में आए हैं। इसके अलावा देश के कई राज्यों में म्यूकरमाइकोसिस के 500 से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा, अगर इससे बचना है तो मरीज, अस्पताल और स्वास्थ्य कर्मचारियों को सतर्कता बरतनी होगी।
अनियंत्रित मधुमेह, स्टेरॉयड का अधिक एवं बेवजह इस्तेमाल और कोरोना संक्रमण से ब्लैक फंगस जानलेवा हो सकता है। यह संक्रमण पहले से ही भारत में है, लेकिन काफी सीमित मामले सामने आते रहे हैं।
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स्टेरॉयड दे रहे हैं तो मरीज की पूरी निगरानी करना भी स्वास्थ्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। ब्लैक फंगस से बचने के लिए मरीज की निगरानी बहुत जरूरी है।
उन्होंने बताया कि एम्स में अब तक 23 मरीज ब्लैक फंगस के चलते भर्ती हुए हैं। इनमें 20 मरीज कोविड संक्रमित है। जबकि तीन हाल ही में कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस की चपेट में आए हैं। इसके अलावा देश के कई राज्यों में म्यूकरमाइकोसिस के 500 से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा, अगर इससे बचना है तो मरीज, अस्पताल और स्वास्थ्य कर्मचारियों को सतर्कता बरतनी होगी।
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अनियंत्रित मधुमेह, स्टेरॉयड का अधिक एवं बेवजह इस्तेमाल और कोरोना संक्रमण से ब्लैक फंगस जानलेवा हो सकता है। यह संक्रमण पहले से ही भारत में है, लेकिन काफी सीमित मामले सामने आते रहे हैं।
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अगस्त तक बड़ी मात्रा में उपलब्ध होंगे टीके
डॉ. गुलेरिया ने कहा, करीब दो महीने में देश में बड़ी मात्रा में टीके उपलब्ध हो जाएंगे, क्योंकि टीका बनाने वाली कंपनियां अपने विनिर्माण संयंत्र खोलना शुरू कर देंगी और टीके की खुराक उपलब्ध होगी। हमें उम्मीद है कि जॉनसन एंड जॉनसन के टीके को भी जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। गुलेरिया ने कहा, जुलाई अगस्त तक हमारे पास बड़ी मात्रा में खुराक उपलब्ध होगी।
कोरोना मरीज घर पर न लें रेमडेसिविर
एम्स दिल्ली के डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के मरीज घर पर रहने के दौरान रेमडेसिविर न लें। इसे अस्पताल में तभी लिया जा सकता है, जब ऑक्सीजन का स्तर 94 से नीचे आ जाए। एम्स के डॉक्टरों ने ये बातें होम आइसोलेशन के दौरान चिकित्सा और देखभाल विषय पर आयोजित एक वेबिनार में कहीं।
एम्स के डॉक्टर नीरज निश्चल ने कहा कि रेमडेसिविर घर पर न लें। होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को सकारात्मक नजरिया और नियमित कसरत करना जरूरी है। डॉ. नीरज ने कहा 80 फीसदी मरीजों में हल्के वाले लक्षण होते हैं। वहीं, अगर पहली रिपोर्ट निगेटिव आती है और लक्षण कायम हैं तो आरटी-पीसीआर टेस्ट फिर कराएं। गंभीर स्थिति होने पर ही अस्पताल में भर्ती हों। डॉक्टरों को सही समय और उचित मात्रा में दवाएं देनी चाहिए। हल्के लक्षणों वाले और बिना लक्षणों वाले मरीजों को घर पर ही आइसोलेट करना चाहिए।
कोरोना मरीज घर पर न लें रेमडेसिविर
एम्स दिल्ली के डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के मरीज घर पर रहने के दौरान रेमडेसिविर न लें। इसे अस्पताल में तभी लिया जा सकता है, जब ऑक्सीजन का स्तर 94 से नीचे आ जाए। एम्स के डॉक्टरों ने ये बातें होम आइसोलेशन के दौरान चिकित्सा और देखभाल विषय पर आयोजित एक वेबिनार में कहीं।
एम्स के डॉक्टर नीरज निश्चल ने कहा कि रेमडेसिविर घर पर न लें। होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को सकारात्मक नजरिया और नियमित कसरत करना जरूरी है। डॉ. नीरज ने कहा 80 फीसदी मरीजों में हल्के वाले लक्षण होते हैं। वहीं, अगर पहली रिपोर्ट निगेटिव आती है और लक्षण कायम हैं तो आरटी-पीसीआर टेस्ट फिर कराएं। गंभीर स्थिति होने पर ही अस्पताल में भर्ती हों। डॉक्टरों को सही समय और उचित मात्रा में दवाएं देनी चाहिए। हल्के लक्षणों वाले और बिना लक्षणों वाले मरीजों को घर पर ही आइसोलेट करना चाहिए।