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एम्स निदेशक डॉ. गुलेरिया बोले- कोरोना के नए स्वरूपों को ध्यान में रखते हुए टीकों को भी बदलते रहना होगा
Wed, 24 Feb 2021 06:37 PM IST
सुशील कुमार कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Wed, 24 Feb 2021 06:37 PM IST
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दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया
- फोटो : ANI
कोरोना वायरस को लेकर देश में नए-नए स्वरूप सामने आए हैं। ब्रिटेन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के अलावा और भी कई तरह के स्ट्रेन अब तक देखने को मिल चुके हैं। इन नए स्वरुप ने पूरी दुनिया में फिर से कोहराम मचाना शुरू कर दिया है। भारत में भी कोरोना की फिर से लहर आ गई है। देश के कई इलाकों में कोरोना स्ट्रेन के मामले देखने को मिल रहे हैं।
इस बीच एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कोरोना के नए प्रकार को लेकर चेतावनी दी है। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि कोरोना के नए प्रकार को ध्यान में रखते हुए हमें टीकों को भी बदलते रहना होगा। फिलहाल, हमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन हमें स्थिति पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। यह सुनिश्चित करें कि उनमें से कोई भी पूरी तरह से नया न हो, जिससे हमारी वैक्सीन की प्रभावकारिता क्षमता गिर जाए।
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि टीके निश्चित रूप से गंभीर बीमारियों को रोकेंगे। जिससे लोगों की मृत्यु की संख्या में कमी आ सकती है। कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन चिंता का विषय है। फिलहाल, हमारे पास जो टीके हैं, उसकी प्रभावकारिता क्षमता 70 से 90 फीसदी है। उन्होंने कहा कि भले ही प्रभावकारिता क्षमता में मामूली गिरावट हो, तभ भी हमारी वैक्सीन प्रभावी रहेगी।
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इस बीच एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कोरोना के नए प्रकार को लेकर चेतावनी दी है। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि कोरोना के नए प्रकार को ध्यान में रखते हुए हमें टीकों को भी बदलते रहना होगा। फिलहाल, हमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन हमें स्थिति पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। यह सुनिश्चित करें कि उनमें से कोई भी पूरी तरह से नया न हो, जिससे हमारी वैक्सीन की प्रभावकारिता क्षमता गिर जाए।
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डॉ. गुलेरिया ने कहा कि टीके निश्चित रूप से गंभीर बीमारियों को रोकेंगे। जिससे लोगों की मृत्यु की संख्या में कमी आ सकती है। कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन चिंता का विषय है। फिलहाल, हमारे पास जो टीके हैं, उसकी प्रभावकारिता क्षमता 70 से 90 फीसदी है। उन्होंने कहा कि भले ही प्रभावकारिता क्षमता में मामूली गिरावट हो, तभ भी हमारी वैक्सीन प्रभावी रहेगी।
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