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कोरोना के बाद एमआईएस से ग्रसित बच्ची को डॉक्टरों ने बचाया

Fri, 25 Jun 2021 05:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 25 Jun 2021 05:54 AM IST
सार

  • अपोलो अस्पताल में मिला उपचार
  • बच्ची में बहुत अधिक मात्रा में कोविड एंटीबॉडीज पाए जाने के बाद रिपोर्ट में एमआईएस-सी की पुष्टि हुई थी

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After Corona, doctors saved the girl suffering from MIS in delhi
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विस्तार

कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले बच्चों में काफी तेजी से मल्टी सिस्टम इन्फ्लामेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) की शिकायत मिल रही है। दिल्ली के अपोलो अस्पताल में ऐसा ही एक मामला सामने आने के बाद एक बच्ची को नया जीवन मिल पाया। बच्ची में बहुत अधिक मात्रा में कोविड एंटीबॉडीज पाए जाने के बाद रिपोर्ट में एमआईएस-सी की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों ने बताया कि जब आठ वर्षीय बच्ची को अस्पताल लाया गया तो उस दौरान उसकी हालत काफी नाजुक थी। वेंटिलेटर के अलावा वह ईसीएमओ सपोर्ट पर थी।

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एक सप्ताह तक बुखार, पेट में दर्द, उल्टी और लगातार सिरदर्द की शिकायत के बाद बच्ची को एक अन्य स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत बिगड़ती चली गई और उसे एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रैस हो गया। इसके बाद पीडिएट्रिक टीम ने उसे अपोलो अस्पताल भेजा था।
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अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. नमीत जेरथ ने बताया कि मल्टी सिस्टम इन्फ्लामेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) एक पोस्ट कोविड जटिलता है, जो संक्रमण के तीन से छह सप्ताह बाद हो सकती है। इस बीमारी में जल्द से जल्द निदान होने से जान बचाई जा सकती है। 
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उन्होंने बताया कि जब इस बच्ची को अपोलो लाया गया, उसकी हालत बहुत खराब थी। उसका ब्लड प्रेशर, आक्सीजन का स्तर बहुत कम था और पल्स रेट भी गिर रही थी। हालांकि, वह कोविड-19 के लिए नेगेटिव हो चुकी थी, लेकिन उसमें कोविड एंटीबॉडीज बहुत अधिक थीं। धीरे-धीरे उसमें सुधार हुआ और एक सप्ताह के बाद उसे ईसीएमओ सपोर्ट से हटा लिया गया। उन्होंने बताया कि फिलहाल बच्ची की हालत पहले से काफी बेहतर है। 


वहीं, डॉ. मुथु ज्योथी ने बताया कि अगर एमआईएस-सी का निदान जल्द से जल्द कर इलाज शुरू न किया जाए तो मरीज की हालत कुछ ही घंटे में बिगड़ जाती है और यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। यह उन बच्चों में भी हो सकता है जिनमें कोविड-19 के लक्षण गंभीर नहीं थे।

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