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आम आदमी पार्टी ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था पर केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर उठाया सवाल
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के सरकारी स्कूलों पर जारी की गई रिपोर्ट पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अपनी एक रिपोर्ट में पंजाब के खस्ताहाल सरकारी स्कूलों को देश में नंबर वन बताया है। ये रिपोर्ट केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब की कैप्टन सरकार की 2022 के चुनावों से पहले की जुगलबंदी को दिखाती है।
सिसोदिया ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि जिस राज्य के स्कूलों में शराब की फैक्ट्री पाई गई हो, 800 सरकारी स्कूल बंद हो गए हों, उस राज्य की शिक्षा व्यवस्था को कोई नंबर वन कैसे बता सकता है। इस तरह का तमगा देना सिर्फ और सिर्फ राजनीति जुगलबंदी का हिस्सा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जारी रिपोर्ट में पंजाब के खस्ताहाल सरकारी स्कूल जिनमें न बुनियादी ढांचा है और न ही सुविधाएं, उन्हें शानदार बताया गया है। वहीं दिल्ली के स्कूलों को बेकार बताया गया है। पंजाब के चुनाव से पहले कैप्टन सरकार को मोदी सरकार का आशीर्वाद मिला है। पिछले विधानसभा चुनाव की तरह ही केंद्र सरकार अभी से ही भूमिका बनाने लगी है।
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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ये रिपोर्ट उस समय जारी हुई है जब पंजाब की जनता कैप्टन सरकार से पिछले 4 साल में शिक्षा को लेकर उनके किए गए कामों का हिसाब मांग रही है कि अब तक पंजाब के स्कूल ठीक क्यों नहीं हुए। पंजाब के सरकारी स्कूलों में न पढ़ाई हो रही है, न ही उनके बुनियादी ढांचे को सुधारने पर कोई काम किया गया है। लेकिन नाकामियों पर पर्दा डालने का प्रयास हो रहा है।
स्कूलों के बदतर हालात से पंजाब में अभिभावकों को अपने बच्चों को मजबूरी में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना पड़ रहा है। पंजाब की सरकार ने वहां की शिक्षा व्यवस्था का मजाक बनाकर रख दिया है और उसे और बदतर बनाने केंद्र सरकार मददगार साबित हो रही है।
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सिसोदिया ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि जिस राज्य के स्कूलों में शराब की फैक्ट्री पाई गई हो, 800 सरकारी स्कूल बंद हो गए हों, उस राज्य की शिक्षा व्यवस्था को कोई नंबर वन कैसे बता सकता है। इस तरह का तमगा देना सिर्फ और सिर्फ राजनीति जुगलबंदी का हिस्सा है।
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उन्होंने यह भी कहा कि जारी रिपोर्ट में पंजाब के खस्ताहाल सरकारी स्कूल जिनमें न बुनियादी ढांचा है और न ही सुविधाएं, उन्हें शानदार बताया गया है। वहीं दिल्ली के स्कूलों को बेकार बताया गया है। पंजाब के चुनाव से पहले कैप्टन सरकार को मोदी सरकार का आशीर्वाद मिला है। पिछले विधानसभा चुनाव की तरह ही केंद्र सरकार अभी से ही भूमिका बनाने लगी है।
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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ये रिपोर्ट उस समय जारी हुई है जब पंजाब की जनता कैप्टन सरकार से पिछले 4 साल में शिक्षा को लेकर उनके किए गए कामों का हिसाब मांग रही है कि अब तक पंजाब के स्कूल ठीक क्यों नहीं हुए। पंजाब के सरकारी स्कूलों में न पढ़ाई हो रही है, न ही उनके बुनियादी ढांचे को सुधारने पर कोई काम किया गया है। लेकिन नाकामियों पर पर्दा डालने का प्रयास हो रहा है।
स्कूलों के बदतर हालात से पंजाब में अभिभावकों को अपने बच्चों को मजबूरी में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना पड़ रहा है। पंजाब की सरकार ने वहां की शिक्षा व्यवस्था का मजाक बनाकर रख दिया है और उसे और बदतर बनाने केंद्र सरकार मददगार साबित हो रही है।