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Delhi News: युवती ने कार में गोली मारकर की मैनेजर की हत्या, दोस्त समेत गिरफ्तार
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- युवक का शव गुरुग्राम में नाले में मिला था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर में मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या कर उनका शव गुरुग्राम में एक नाले में फेंक दिया गया था, जिसे गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में युवराज की दोस्त आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया है।
शुरुआती जांच में हत्या का कारण पैसे का लेन-देन बताया जा रहा है। आरोपी युवती आन्या वत्स बार-बार अपने बयान बदल रही है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को बृहस्पतिवार को अदालत में पेश कर पांच दिन की पुलिस हिरासत पर लिया है।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि युवराज के गायब होने की शिकायत सरिता विहार, दिल्ली में रहने वाली उनकी बहन हरसिमरन मनचंदा ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि युवराज छह सितंबर को गुरुग्राम में आन्या वत्स से मिलने गए थे। इसके बाद युवराज नहीं लौटे और उनका मोबाइल फोन बंद मिला।
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पुलिस जांच में पता लगा कि युवराज ने आखिरी बार अपनी पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स से बात की थी। जांच में आन्या वत्स के एक नए मोबाइल नंबर का पता चला, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। आन्या कबूल किया है कि उसने युवराज की हत्या अपनी क्रेटा कार में दो गोली गर्दन में मारकर की थी।
गुरुग्राम में शव बरामदगी और अंतिम संस्कार
युवराज का शव 10 सितंबर को गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना इलाके में एक नाले से बरामद हुआ था। शव सड़ी-गली हालत में था और तीन दिन तक पहचान के लिए रखा गया। पहचान न होने पर 14 सितंबर को शव परीक्षण के बाद पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार करा दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शुरुआती तौर पर डूबने से मौत की बात सामने आई थी।
पुलिस समन्वय पर उठे सवाल
इस पूरे मामले से दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। युवराज सेक्टर-29 स्थित अडानी रियल्टी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। उनकी बहन को दिल्ली पुलिस के माध्यम से अज्ञात शव मिलने की जानकारी मिली थी। बादशाहपुर थाना पुलिस ने शव के फोटो जिपनेट पोर्टल पर अपलोड किए थे। परिवार ने फोटो और शव के पास मिले सामान के आधार पर युवराज की पहचान की।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर में मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या कर उनका शव गुरुग्राम में एक नाले में फेंक दिया गया था, जिसे गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में युवराज की दोस्त आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया है।
शुरुआती जांच में हत्या का कारण पैसे का लेन-देन बताया जा रहा है। आरोपी युवती आन्या वत्स बार-बार अपने बयान बदल रही है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को बृहस्पतिवार को अदालत में पेश कर पांच दिन की पुलिस हिरासत पर लिया है।
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दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि युवराज के गायब होने की शिकायत सरिता विहार, दिल्ली में रहने वाली उनकी बहन हरसिमरन मनचंदा ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि युवराज छह सितंबर को गुरुग्राम में आन्या वत्स से मिलने गए थे। इसके बाद युवराज नहीं लौटे और उनका मोबाइल फोन बंद मिला।
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पुलिस जांच में पता लगा कि युवराज ने आखिरी बार अपनी पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स से बात की थी। जांच में आन्या वत्स के एक नए मोबाइल नंबर का पता चला, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। आन्या कबूल किया है कि उसने युवराज की हत्या अपनी क्रेटा कार में दो गोली गर्दन में मारकर की थी।
गुरुग्राम में शव बरामदगी और अंतिम संस्कार
युवराज का शव 10 सितंबर को गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना इलाके में एक नाले से बरामद हुआ था। शव सड़ी-गली हालत में था और तीन दिन तक पहचान के लिए रखा गया। पहचान न होने पर 14 सितंबर को शव परीक्षण के बाद पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार करा दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शुरुआती तौर पर डूबने से मौत की बात सामने आई थी।
पुलिस समन्वय पर उठे सवाल
इस पूरे मामले से दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। युवराज सेक्टर-29 स्थित अडानी रियल्टी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। उनकी बहन को दिल्ली पुलिस के माध्यम से अज्ञात शव मिलने की जानकारी मिली थी। बादशाहपुर थाना पुलिस ने शव के फोटो जिपनेट पोर्टल पर अपलोड किए थे। परिवार ने फोटो और शव के पास मिले सामान के आधार पर युवराज की पहचान की।