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धड़कते दिल ने गुरुग्राम से भरी ‘उड़ान’...दिल्ली में बचाई अजनबी पुरुष की जान
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नई दिल्ली/गुरुग्राम। अंगदान को महादान यूं ही नहीं कहा जाता है। दुनिया में ऐसे कुछ ही विरले होते हैं जो जज्बात को किनारे रखकर यह फैसला लेते हैं। गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती 53 वर्षीय महिला के परिजनों ने यह दरियादिली दिखाई है। दुनिया से जाते-जाते वह चार लोगों को नया जीवन दे गई हैं। दिल्ली में भर्ती एक पुरुष मरीज के शरीर में अब महिला का दिल धड़क रहा है। यह काफी दुर्लभ होता है कि जब किसी महिला या पुरुष का अंग किसी पुरुष या फिर महिला को प्रत्यारोपित किया जाता है। वहीं, दो रोगियों को महिला की किडनी दान की गई हैं, जबकि एक मरीज को उनका लिवर दिया गया है।
दिल्ली स्थित बीएलके अस्पताल के डॉ. नरेश गोयल ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित 53 वर्षीय महिला गुरुग्राम के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थीं। ब्रेन डेड होने और परिजनों की काउंसलिंग करने के बाद वे अंगदान के लिए तैयार हो गए। चूंकि, बीएलके अस्पताल में 50 वर्षीय भर्ती पुरुष मरीज वेटिंग में था। इसलिए अस्पताल को सूचना मिलने के बाद तत्काल एक टीम बनाई गई और वह गुरुग्राम रवाना हुई। यहां से कुछ घंटे बाद टीम दिल के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुई।
डॉ. गोयल ने बताया कि उनके यहां भर्ती पुरुष मरीज लंबे समय से बीमार थे। साल 2016 से अब तक दो बार उनकी एंजियोप्लास्टि की जा चुकी हैं। अत्यधिक हालत खराब होने के चलते इन्हें दिल प्रत्यारोपण की सलाह दी गई थी, लेकिन आमतौर पर किडनी या लिवर से ज्यादा दिल की वेटिंग रहती है, जिसकी वजह से मरीजों को समय रहते प्रत्यारोपण का लाभ नहीं मिल पाता है।
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दिल्ली और हरियाणा पुलिस ने इसमें सहयोग किया और करोलबाग तक लगभग 30 किमी ग्रीन कॉरिडोर बनाया। 37 मिनट और 58 सेकंड में यह सफर पूरा हुआ। डॉ. गोयल ने लोगों से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में अंगदान के जरिए ऐसे जरूरतमंदों की जान बचाई जा सकती है। डॉ. गोयल ने बताया कि दिल प्रत्यारोपण शुक्रवार देर रात तक चला और वह सफल रहा। फिलहाल मरीज डॉक्टरों की निगरानी में है।
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दिल्ली स्थित बीएलके अस्पताल के डॉ. नरेश गोयल ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित 53 वर्षीय महिला गुरुग्राम के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थीं। ब्रेन डेड होने और परिजनों की काउंसलिंग करने के बाद वे अंगदान के लिए तैयार हो गए। चूंकि, बीएलके अस्पताल में 50 वर्षीय भर्ती पुरुष मरीज वेटिंग में था। इसलिए अस्पताल को सूचना मिलने के बाद तत्काल एक टीम बनाई गई और वह गुरुग्राम रवाना हुई। यहां से कुछ घंटे बाद टीम दिल के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुई।
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डॉ. गोयल ने बताया कि उनके यहां भर्ती पुरुष मरीज लंबे समय से बीमार थे। साल 2016 से अब तक दो बार उनकी एंजियोप्लास्टि की जा चुकी हैं। अत्यधिक हालत खराब होने के चलते इन्हें दिल प्रत्यारोपण की सलाह दी गई थी, लेकिन आमतौर पर किडनी या लिवर से ज्यादा दिल की वेटिंग रहती है, जिसकी वजह से मरीजों को समय रहते प्रत्यारोपण का लाभ नहीं मिल पाता है।
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दिल्ली और हरियाणा पुलिस ने इसमें सहयोग किया और करोलबाग तक लगभग 30 किमी ग्रीन कॉरिडोर बनाया। 37 मिनट और 58 सेकंड में यह सफर पूरा हुआ। डॉ. गोयल ने लोगों से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में अंगदान के जरिए ऐसे जरूरतमंदों की जान बचाई जा सकती है। डॉ. गोयल ने बताया कि दिल प्रत्यारोपण शुक्रवार देर रात तक चला और वह सफल रहा। फिलहाल मरीज डॉक्टरों की निगरानी में है।