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65 दिन बाद सबसे कम 613 संक्रमित, 89 फीसदी रिकवरी दर, लगातार घट रही सक्रिय मरीजों की संख्या
Tue, 28 Jul 2020 05:19 AM IST
नोएडा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 05:19 AM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : पीटीआई
दिल्लीवासियों के लिए राहत भरी खबर है कि कोरोना वायरस पर शिकंजा कसा जाने लगा है। दिल्ली सरकार और केंद्र के अलावा मेडिकल स्टाफ, तमाम संगठनों व आमजन के सहयोग का नतीजा है कि करीब 65 दिन बाद महज 613 लोग ही संक्रमित पाए गए, जबकि दोगुना से अधिक स्वस्थ हो गए। हालांकि, 26 लोगों की मौत हो गई। 23 मई के बाद संक्रमितों की यह संख्या सबसे कम रही है। एक समय नए केस की संख्या 3947 तक पहुंच गई थी। अब एक महीने से रोजाना औसतन 1600 नए मामले आ रहे हैं। बीते 15 दिनों की बात करें तो संक्रमण के केस की संख्या अब औसतन 1100 प्रतिदिन रह गई है।
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दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राजधानी में कुल संक्रमितों की संख्या 131219 हो गई है और 3853 मौत हो चुकी हैं। 116372 लोग ठीक हो चुके हैं। इस हिसाब से रिकवरी दर 89 फीसदी हो गया है। बीते 24 घंटे में 11506 लोगों के टेस्ट हुए। इनमें 7685 एंटिजन किट से और 3821 आरटी-पीसीआर जांच हुई। यानी, संक्रमण दर अब 5.4 फीसदी रह गई है। इस समय महज 10994 एक्टिव मामले हैं, जो कुल संक्रमितों का महज 8.4 फीसदी है। सक्रिय मामलों की संख्या के लिहाज से राजधानी 10वें स्थान पर है। जून में मृत्युदर 3.2 फीसदी थी, जो अब घटकर 2.94 रह गई है। जून तक रोजाना औसतन 45 मौत हो रही थी, जिसका आंकड़ा अब घटकर 32 रह गया है।
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होम आईसोलेशन में 6638 मरीज भर्ती
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इस समय कोविड अस्पतालों में 15271 बेड उपलब्ध हैं। इनमें 2835 पर मरीज भर्ती हैं। कोविड केयर सेंटर में 9412 और हेल्थ सेंटर में 554 बेड हैं। इनमें कोविड सेंटर में 761 और हेल्थ सेंटर में 147 मरीज भर्ती हैं। होम आईसोलेशन में रहने वाले मरीजों की संख्या भी घटकर 6638 रह गई है। अब तक दिल्ली में कुल 958283 लोगों की जांच की गई है।
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कम मरीज आने के ये हैं अहम कारण
1. व्यापक जांच
मई में राजधानी में प्रतिदिन औसतन 5,500 जांच हो रही थी, जिसे जुलाई की शुरुआत में बढ़ाकर 21,000 कर दिया। अब दिल्ली में प्रति 10 लाख की आबादी पर करीब 50 हजार लोगों की जांच की जा रही है, जो देश में सबसे ज्यादा है। जांच करने से सही समय पर संक्रमितों की पहचान हो सकी और उन्हें आईसोलेट किया गया। इससे नए मामले बढ़ने पर रोक लगाई गई। इस समय सभी अस्पतालों से लेकर डिस्पेंसरी तक में कोरोना की जांच की जा रही है।
2. एंबुलेंस प्रणाली
सरकार ने कई राज्यों की सरकारी एंबुलेंस सिस्टम का अवलोकन किया, जिसमें पाया गया कि एंबुलेंस की संख्या कम होने के चलते गंभीर मरीजों को अस्पतालों में शिफ्ट करने के दौरान देर हो जा रही है। कुछ मामलों में मौतें भी हुई थीं। इसे देखते सरकार ने एंबुलेंस बढ़ाने का फैसला किया। लॉकडाउन की शुरुआत में एंबुलेंस के बेड़े में मात्र 134 एंबुलेंस थी, जो जुलाई तक बढ़ कर 650 हो गई है। इससे सभी मरीजों का समय पर एंबुलेंस मिल रही है।
3. बेड और कोरोना एप की उपलब्धता
मरीजों को अस्पताल में आसानी से बेड मिल सके। यह सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली कोरोना एप लांच करने का निर्णय लिया। यह देश के किसी भी शहर या राज्य के लिए पहला और एकमात्र ऐसा एप है, जिसने यह सुनिश्चित किया कि गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में उपलब्ध बेड का आसानी से पता लगाया जा सके। एप की सहायता से इससे मरीज सही समय पर अस्पताल में भर्ती हो गया और उससे संक्रमण आगे नहीं फैला। मई की शुरुआत में दिल्ली में लगभग 3700 बेड थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 15271 हो गई है।
4 कंटेनमेंट जोन बढ़ाए गए
दिल्ली में बीते एक महीने में 300 से अधिक नए कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। पहले कंटेनमेंट जोन से भी लगातार नए मामले आ रहे थे। इससे संक्रमण फैल रहा था। सरकार ने इसे रोकने के लिए माइक्रो कंटेनमेेंट जोन की रणनीति बनाई गई। अब जिस घर में भी संक्रमण का मामला आता है। उस घर को और आसपास के एक दो घरों को ही सील किया जाता है। पहले पूरे इलाके को कंटेनमेंट जोन बनाया जाता था। इससे लोग आसपास घूमते रहते थे और संक्रमण फैलता था। इन रणनीति से इन लोगों पर बेहतर तरीके से निगरानी की जाती है। 14 दिनों तक इन्हें आईसोलेशन में रखा जाता है। इससे संक्रमण आसानी से रोका गया।
5. ऑक्सीमीटर
सरकार ने होम आईसोलेशन में रहने वाले मरीजों की सहायता के लिए ऑक्सीमीटर खरीदने का निर्णय लिया। कुल 59,600 ऑक्सीमीटर खरीदे गए और मरीजों में वितरित किए गए। इससे मरीजों ने अपने शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा की निगरानी की। मात्रा कम होने पर की स्थिति में बिना समय गंवाए मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया। इससे मृत्युदर कम की गई।
6. आईसीयू बेड पर ध्यान
गंभीर मरीजों की समय पर जान बचाई जा सके। इसके लिए सरकार ने आईसीयू बेड के विस्तार पर बल दिया। जून की शुरुआत में 500 से कम आईसीयू बेड थे, जबकि अब में दिल्ली के कोविड अस्पतालों में 2200 से अधिक आईसीयू बेड हैं। इनमें से 40 फीसदी से अधिक खाली हैं।
7. प्लाज्मा थेरेपी
इस समय राजधानी में एलएनजेपी और आईएलबीएस अस्पताल में प्लाज्मा बैंक बनाया गया है। यहां से कोरोना के मरीजों को आसानी से प्लाज्मा मिल जाता है। इससे गंभीर मरीजों की जान बचाने में सहायता मिल रही है।
8. जांच कम होना भी कम मामलो की वजह
सोमवार को दिल्ली में 11506 लोगों की जांच की गई। इसमें 613 मामले आए। बीते एक सप्ताह से रोजाना औसतन 1800 जांच हो रही थी और 1100 मामले आ रहे थे। कम जांच होना भी मामले घटने की एक वजह है।
मई में राजधानी में प्रतिदिन औसतन 5,500 जांच हो रही थी, जिसे जुलाई की शुरुआत में बढ़ाकर 21,000 कर दिया। अब दिल्ली में प्रति 10 लाख की आबादी पर करीब 50 हजार लोगों की जांच की जा रही है, जो देश में सबसे ज्यादा है। जांच करने से सही समय पर संक्रमितों की पहचान हो सकी और उन्हें आईसोलेट किया गया। इससे नए मामले बढ़ने पर रोक लगाई गई। इस समय सभी अस्पतालों से लेकर डिस्पेंसरी तक में कोरोना की जांच की जा रही है।
2. एंबुलेंस प्रणाली
सरकार ने कई राज्यों की सरकारी एंबुलेंस सिस्टम का अवलोकन किया, जिसमें पाया गया कि एंबुलेंस की संख्या कम होने के चलते गंभीर मरीजों को अस्पतालों में शिफ्ट करने के दौरान देर हो जा रही है। कुछ मामलों में मौतें भी हुई थीं। इसे देखते सरकार ने एंबुलेंस बढ़ाने का फैसला किया। लॉकडाउन की शुरुआत में एंबुलेंस के बेड़े में मात्र 134 एंबुलेंस थी, जो जुलाई तक बढ़ कर 650 हो गई है। इससे सभी मरीजों का समय पर एंबुलेंस मिल रही है।
3. बेड और कोरोना एप की उपलब्धता
मरीजों को अस्पताल में आसानी से बेड मिल सके। यह सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली कोरोना एप लांच करने का निर्णय लिया। यह देश के किसी भी शहर या राज्य के लिए पहला और एकमात्र ऐसा एप है, जिसने यह सुनिश्चित किया कि गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में उपलब्ध बेड का आसानी से पता लगाया जा सके। एप की सहायता से इससे मरीज सही समय पर अस्पताल में भर्ती हो गया और उससे संक्रमण आगे नहीं फैला। मई की शुरुआत में दिल्ली में लगभग 3700 बेड थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 15271 हो गई है।
4 कंटेनमेंट जोन बढ़ाए गए
दिल्ली में बीते एक महीने में 300 से अधिक नए कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। पहले कंटेनमेंट जोन से भी लगातार नए मामले आ रहे थे। इससे संक्रमण फैल रहा था। सरकार ने इसे रोकने के लिए माइक्रो कंटेनमेेंट जोन की रणनीति बनाई गई। अब जिस घर में भी संक्रमण का मामला आता है। उस घर को और आसपास के एक दो घरों को ही सील किया जाता है। पहले पूरे इलाके को कंटेनमेंट जोन बनाया जाता था। इससे लोग आसपास घूमते रहते थे और संक्रमण फैलता था। इन रणनीति से इन लोगों पर बेहतर तरीके से निगरानी की जाती है। 14 दिनों तक इन्हें आईसोलेशन में रखा जाता है। इससे संक्रमण आसानी से रोका गया।
5. ऑक्सीमीटर
सरकार ने होम आईसोलेशन में रहने वाले मरीजों की सहायता के लिए ऑक्सीमीटर खरीदने का निर्णय लिया। कुल 59,600 ऑक्सीमीटर खरीदे गए और मरीजों में वितरित किए गए। इससे मरीजों ने अपने शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा की निगरानी की। मात्रा कम होने पर की स्थिति में बिना समय गंवाए मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया। इससे मृत्युदर कम की गई।
6. आईसीयू बेड पर ध्यान
गंभीर मरीजों की समय पर जान बचाई जा सके। इसके लिए सरकार ने आईसीयू बेड के विस्तार पर बल दिया। जून की शुरुआत में 500 से कम आईसीयू बेड थे, जबकि अब में दिल्ली के कोविड अस्पतालों में 2200 से अधिक आईसीयू बेड हैं। इनमें से 40 फीसदी से अधिक खाली हैं।
7. प्लाज्मा थेरेपी
इस समय राजधानी में एलएनजेपी और आईएलबीएस अस्पताल में प्लाज्मा बैंक बनाया गया है। यहां से कोरोना के मरीजों को आसानी से प्लाज्मा मिल जाता है। इससे गंभीर मरीजों की जान बचाने में सहायता मिल रही है।
8. जांच कम होना भी कम मामलो की वजह
सोमवार को दिल्ली में 11506 लोगों की जांच की गई। इसमें 613 मामले आए। बीते एक सप्ताह से रोजाना औसतन 1800 जांच हो रही थी और 1100 मामले आ रहे थे। कम जांच होना भी मामले घटने की एक वजह है।
ऐसे बढ़े और घटे मामले
तारीख मामले
23 मई 591
8 जून 1510
12 जून 2137
18 जून 2877
20 जून- 3630
23 जून- 3947 ( सबसे ज्यादा मामले इसी दिन आए हैं)
30 जून- 2199
7 जुलाई- 2008
11 जुलाई- 1781
17 जुलाई- 1462
20 जुलाई- 954
23 जुलाई- 1041
27 जुलाई- 613
23 मई 591
8 जून 1510
12 जून 2137
18 जून 2877
20 जून- 3630
23 जून- 3947 ( सबसे ज्यादा मामले इसी दिन आए हैं)
30 जून- 2199
7 जुलाई- 2008
11 जुलाई- 1781
17 जुलाई- 1462
20 जुलाई- 954
23 जुलाई- 1041
27 जुलाई- 613