{"_id":"60e5e603e49023792003a6e6","slug":"5g-network-case-delhi-court-refuses-to-forgive-fine-amount-of-20-lakh-imposed-on-actor-juhi-chawla-and-two-others","type":"story","status":"publish","title_hn":"5जी नेटवर्क मामला: जूही चावला व दो अन्य के खिलाफ 20 लाख रुपये के जुर्माने को माफ करने से अदालत ने किया इनकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
5जी नेटवर्क मामला: जूही चावला व दो अन्य के खिलाफ 20 लाख रुपये के जुर्माने को माफ करने से अदालत ने किया इनकार
Wed, 07 Jul 2021 11:06 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 07 Jul 2021 11:06 PM IST
सार
अदालत ने जुर्माना माफ करने व कोर्ट फीस को वापस मांगने संबंधी उनके रवैये पर नाराजगी भी जताई। अदालत के रवैये को देख चावला की ओर से पेश वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मीत मल्होत्रा ने जुर्माना भरने के लिये एक सप्ताह का समय मांगा।
विज्ञापन
juhi chawla
- फोटो : social media
विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला और दो अन्य को 5जी वायरलेस नेटवर्क प्रौद्योगिकी को चुनौती देने के मामले में कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर लगाया गया 20 लाख का जुर्माना भरने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। इतना ही नहीं याचिकाकर्ता द्वारा जुर्माना माफ करने व कोर्ट फीस को वापस मांगने संबंधी उनके रवैये पर नाराजगी भी जताई हे।
न्यायमूर्ति जे आर मिढ्ढा ने कहा अदालत याची के आचरण को लेकर स्तब्ध है। उन्होंने कहा कि चावला और अन्य सम्मानपूर्वक धनराशि जमा कराने के इच्छुक तक नहीं हैं। अदालत अभिनेत्री द्वारा दाखिल किए गए अदालती फीस की वापसी, जुर्माने में छूट और फैसले में 'खारिज' शब्द को 'अस्वीकार' करने की अपील संबंधी आवेदन पर सुनवाई कर रही है।
अदालत के रवैये को देख चावला की ओर से पेश वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मीत मल्होत्रा ने जुर्माना भरने के लिये एक सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने सहमति जताते हुए सुनवाई 12 जुलाई तक स्थगित कर दी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार जून को 5जी वायरलेस नेटवर्क तकनीक को चुनौती देने वाली चावला की याचिका को खारिज कर उन पर तथा सह याचिकाकर्ताओं पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।अदालत ने कहा था कि याचिका 'दोषपूर्ण', कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और प्रचार पाने के लिए दायर की गई थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक तरफ आप तुच्छ आवेदन ले जाते हैं और दूसरी ओर आप आवेदन वापस लेते हैं। जुर्माना जमा करवाने के लिए भी तैयार नहीं है। अदालत ने कहा कि वास्तव में याची की याचिका पर नरमी से विचार किया जब चावला और अन्य पर 20 लाख रुपये की लागत लगाई और अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की।
उन्होंने कहा कि वे आनके रवैये पर स्तंभ है, अदालत को तुरंत आपके रवैये पर अवमानना की कार्रवाई शुरु करनी चाहिए थी। आप कैसे कह सकते है कि अदालत को जुमार्ना करने का अधिकार नहीं है। अदालत को अवमानना कार्रवाई शुरु करने का अधिकार है।
जूही के अधिवक्ता मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है कि जुर्माने का भुगतान नहीं किया जाएगा यह आवादेन मात्र छूट के लिए दायर किया गया था।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति जे आर मिढ्ढा ने कहा अदालत याची के आचरण को लेकर स्तब्ध है। उन्होंने कहा कि चावला और अन्य सम्मानपूर्वक धनराशि जमा कराने के इच्छुक तक नहीं हैं। अदालत अभिनेत्री द्वारा दाखिल किए गए अदालती फीस की वापसी, जुर्माने में छूट और फैसले में 'खारिज' शब्द को 'अस्वीकार' करने की अपील संबंधी आवेदन पर सुनवाई कर रही है।
विज्ञापन
अदालत के रवैये को देख चावला की ओर से पेश वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मीत मल्होत्रा ने जुर्माना भरने के लिये एक सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने सहमति जताते हुए सुनवाई 12 जुलाई तक स्थगित कर दी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार जून को 5जी वायरलेस नेटवर्क तकनीक को चुनौती देने वाली चावला की याचिका को खारिज कर उन पर तथा सह याचिकाकर्ताओं पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।अदालत ने कहा था कि याचिका 'दोषपूर्ण', कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और प्रचार पाने के लिए दायर की गई थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक तरफ आप तुच्छ आवेदन ले जाते हैं और दूसरी ओर आप आवेदन वापस लेते हैं। जुर्माना जमा करवाने के लिए भी तैयार नहीं है। अदालत ने कहा कि वास्तव में याची की याचिका पर नरमी से विचार किया जब चावला और अन्य पर 20 लाख रुपये की लागत लगाई और अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की।
उन्होंने कहा कि वे आनके रवैये पर स्तंभ है, अदालत को तुरंत आपके रवैये पर अवमानना की कार्रवाई शुरु करनी चाहिए थी। आप कैसे कह सकते है कि अदालत को जुमार्ना करने का अधिकार नहीं है। अदालत को अवमानना कार्रवाई शुरु करने का अधिकार है।
जूही के अधिवक्ता मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है कि जुर्माने का भुगतान नहीं किया जाएगा यह आवादेन मात्र छूट के लिए दायर किया गया था।