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नारीवाद को भारत के परिपेक्ष में देखने की जरूरत
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भारतीय विचारधारा में महिलाओं का स्थान सर्वोच्च : स्मृति ईरानी
- भारतीय स्त्री विमर्श विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारतीय विचारधारा में महिलाओं का स्थान सर्वोच्च रहा है। महिलाएं दुनियाभर में अपनी पहचान बनाते हुए भी अपने परिवार को शक्ति, दिशा व दृष्टि दे सकती हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भारतीय स्त्री विमर्श विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए यह विचार प्रकट किए।
आर्य भट्ट कॉलेज और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् छात्र संगठन द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का मकसद नारीवाद को भारत के परिप्रेक्ष्य में जांचना और उसके विविध आयामों पर चर्चा करना था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र द ऑर्गेनाइजर के मुख्य संपादक प्रफुल्ल केतकर भी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे। नारीवाद पर उन्होंने कहा इंटरनेट का विकास एक और तरह के नारीवाद को जन्म दे रहा है। उन्होंने बताया कि नारीवाद को सिर्फ पश्चिमी देशों के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। इस पर अध्ययन के दौरान अलग-अलग सभ्यताओं और संस्कृतियों के नजरिए को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, हमें नारीवाद के अध्ययन से जुड़े मौजूदा तौर-तरीकों को चुनौती देनी होगी। इस सिलसिले में उन्होंने हंसा मेहता, रानी लक्ष्मीबाई और अहिल्या बाई होल्कर का उदाहरण दिया। सेमिनार में आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव वीके मल्होत्रा भी पहुंचे। उन्होंने कहा, जेंडर की कल्पना कभी भी समाज और सभ्यता से हटकर नहीं हो सकती है। हम पर सभ्यता का भार है, जिसे हमें हमेशा अपने साथ लेकर चलना होगा। कार्यक्रम में अलग-अलग कॉलेजों से आए शिक्षकों ने वक्ताओं से सवाल भी किए।
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- भारतीय स्त्री विमर्श विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारतीय विचारधारा में महिलाओं का स्थान सर्वोच्च रहा है। महिलाएं दुनियाभर में अपनी पहचान बनाते हुए भी अपने परिवार को शक्ति, दिशा व दृष्टि दे सकती हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भारतीय स्त्री विमर्श विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए यह विचार प्रकट किए।
आर्य भट्ट कॉलेज और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् छात्र संगठन द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का मकसद नारीवाद को भारत के परिप्रेक्ष्य में जांचना और उसके विविध आयामों पर चर्चा करना था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र द ऑर्गेनाइजर के मुख्य संपादक प्रफुल्ल केतकर भी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे। नारीवाद पर उन्होंने कहा इंटरनेट का विकास एक और तरह के नारीवाद को जन्म दे रहा है। उन्होंने बताया कि नारीवाद को सिर्फ पश्चिमी देशों के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। इस पर अध्ययन के दौरान अलग-अलग सभ्यताओं और संस्कृतियों के नजरिए को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा, हमें नारीवाद के अध्ययन से जुड़े मौजूदा तौर-तरीकों को चुनौती देनी होगी। इस सिलसिले में उन्होंने हंसा मेहता, रानी लक्ष्मीबाई और अहिल्या बाई होल्कर का उदाहरण दिया। सेमिनार में आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव वीके मल्होत्रा भी पहुंचे। उन्होंने कहा, जेंडर की कल्पना कभी भी समाज और सभ्यता से हटकर नहीं हो सकती है। हम पर सभ्यता का भार है, जिसे हमें हमेशा अपने साथ लेकर चलना होगा। कार्यक्रम में अलग-अलग कॉलेजों से आए शिक्षकों ने वक्ताओं से सवाल भी किए।
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