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Delhi News: एसआईआर से पहले ही मतदाता सूची से 11 लाख नाम हटे
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अकेले अप्रैल 2026 में 3.39 लाख नाम हटाए गए, आंकड़ों के विश्लेषण में मिली जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने से पहले ही मतदाता सूची से 11 लाख से अधिक नाम हटाए गए। इनमें अकेले अप्रैल 2026 में 3,39,509 नाम हटाए गए। मतदाता अधिकार मंच और सबर संस्थान के आंकड़ों के विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है। यह विश्लेषण निर्वाचन आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रकाशित मतदाता सूची और मासिक नाम जोड़ने-हटाने के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। विश्लेषण में दिल्ली के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों को शामिल किया गया है।
31 जनवरी 2025 को दिल्ली की मतदाता सूची में 1,56,14,000 मतदाता थे। इसी सूची के आधार पर फरवरी 2025 में विधानसभा चुनाव हुआ था। 30 जून 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने के समय मतदाताओं की संख्या घटकर 1,45,10,299 रह गई यानी इस अवधि में मतदाता सूची से 11,03,701 नाम कम हुए। आंकड़ों के विश्लेषण में अप्रैल 2026 में नाम हटाए जाने की संख्या में अचानक बड़ी वृद्धि सामने आई। इस महीने अकेले 3,39,509 नाम हटाए गए। यह संख्या इससे पहले के छह महीनों में हर महीने हटाए गए नामों के औसत से करीब 20 गुना बताई गई है। इतना ही नहीं, जुलाई से दिसंबर 2025 के दौरान किसी भी महीने जितने नाम हटाए गए थे, अप्रैल 2026 की संख्या उससे तीन गुना से भी अधिक रही।
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से दिसंबर 2025 के दौरान दिल्ली के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में कुल 1,70,451 की वृद्धि हुई थी। इसके उलट जनवरी से जून 2026 के दौरान मतदाताओं की संख्या में 11,70,885 की शुद्ध कमी दर्ज की गई। यहां कमी का अर्थ उस अवधि में जोड़े गए नामों को घटाने के बाद बची कमी से है। आंकड़ों के विश्लेषण में पांच विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े भी दिए गए हैं। इनके अनुसार 2025 के फरवरी से दिसंबर तक जितने नाम हटाए गए, उससे अधिक नाम 2026 में केवल एक महीने में हटाए गए।
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तुगलकाबाद में वर्ष 2025 के दौरान 1,439 नाम हटाए गए थे, जबकि अप्रैल 2026 में ही 6,448 नाम हटे। ओखला में वर्ष 2025 के दौरान 9,170 नाम हटे थे, जबकि मई 2026 में 12,383 नाम हटाए गए। मालवीय नगर में वर्ष 2025 में 2,544 नाम हटे थे और मई 2026 में 3,961 नाम हटाए गए। इसी तरह बुराड़ी में वर्ष 2025 में 3,603 नाम हटाए गए, जबकि अप्रैल 2026 में 6,297 नाम हटे। चांदनी चौक में 2025 के दौरान 1,690 नाम हटे और जून 2026 में 1,618 नाम हटाए गए।
नाम हटाने की वजह और प्रक्रिया पर सवाल
विश्लेषण में कहा गया है कि दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए हर महीने नाम जोड़ने और हटाने की सूची प्रकाशित की जाती है। इन्हीं सूचियों के अध्ययन में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने से दो-तीन महीने पहले नाम हटाने की रफ्तार बढ़ने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटाए जाने की इस अवधि के बारे में कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।
68 विधानसभा क्षेत्रों में जीत के अंतर से ज्यादा नाम बाहर
आंकड़ों के विश्लेषण में 2025 के विधानसभा चुनाव के परिणामों की तुलना पुनरीक्षण में बाहर किए गए मतदाताओं से भी की गई है। इसके अनुसार दिल्ली के 70 में से 68 विधानसभा क्षेत्रों में बाहर किए गए मतदाताओं की संख्या उस क्षेत्र में जीत के अंतर से अधिक है। विश्लेषण के अनुसार तुगलकाबाद में मतदाताओं के बाहर होने की दर सबसे अधिक 47.83 प्रतिशत रही। इसके बाद ओखला में 45.16, आरके पुरम में 44.36, कस्तूरबा नगर में 43.92, कालकाजी में 42.71, बदरपुर में 42.55, नई दिल्ली में 41.61 और जंगपुरा में 41.37 प्रतिशत रही।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने से पहले ही मतदाता सूची से 11 लाख से अधिक नाम हटाए गए। इनमें अकेले अप्रैल 2026 में 3,39,509 नाम हटाए गए। मतदाता अधिकार मंच और सबर संस्थान के आंकड़ों के विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है। यह विश्लेषण निर्वाचन आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रकाशित मतदाता सूची और मासिक नाम जोड़ने-हटाने के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। विश्लेषण में दिल्ली के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों को शामिल किया गया है।
31 जनवरी 2025 को दिल्ली की मतदाता सूची में 1,56,14,000 मतदाता थे। इसी सूची के आधार पर फरवरी 2025 में विधानसभा चुनाव हुआ था। 30 जून 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने के समय मतदाताओं की संख्या घटकर 1,45,10,299 रह गई यानी इस अवधि में मतदाता सूची से 11,03,701 नाम कम हुए। आंकड़ों के विश्लेषण में अप्रैल 2026 में नाम हटाए जाने की संख्या में अचानक बड़ी वृद्धि सामने आई। इस महीने अकेले 3,39,509 नाम हटाए गए। यह संख्या इससे पहले के छह महीनों में हर महीने हटाए गए नामों के औसत से करीब 20 गुना बताई गई है। इतना ही नहीं, जुलाई से दिसंबर 2025 के दौरान किसी भी महीने जितने नाम हटाए गए थे, अप्रैल 2026 की संख्या उससे तीन गुना से भी अधिक रही।
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आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से दिसंबर 2025 के दौरान दिल्ली के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में कुल 1,70,451 की वृद्धि हुई थी। इसके उलट जनवरी से जून 2026 के दौरान मतदाताओं की संख्या में 11,70,885 की शुद्ध कमी दर्ज की गई। यहां कमी का अर्थ उस अवधि में जोड़े गए नामों को घटाने के बाद बची कमी से है। आंकड़ों के विश्लेषण में पांच विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े भी दिए गए हैं। इनके अनुसार 2025 के फरवरी से दिसंबर तक जितने नाम हटाए गए, उससे अधिक नाम 2026 में केवल एक महीने में हटाए गए।
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तुगलकाबाद में वर्ष 2025 के दौरान 1,439 नाम हटाए गए थे, जबकि अप्रैल 2026 में ही 6,448 नाम हटे। ओखला में वर्ष 2025 के दौरान 9,170 नाम हटे थे, जबकि मई 2026 में 12,383 नाम हटाए गए। मालवीय नगर में वर्ष 2025 में 2,544 नाम हटे थे और मई 2026 में 3,961 नाम हटाए गए। इसी तरह बुराड़ी में वर्ष 2025 में 3,603 नाम हटाए गए, जबकि अप्रैल 2026 में 6,297 नाम हटे। चांदनी चौक में 2025 के दौरान 1,690 नाम हटे और जून 2026 में 1,618 नाम हटाए गए।
नाम हटाने की वजह और प्रक्रिया पर सवाल
विश्लेषण में कहा गया है कि दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए हर महीने नाम जोड़ने और हटाने की सूची प्रकाशित की जाती है। इन्हीं सूचियों के अध्ययन में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने से दो-तीन महीने पहले नाम हटाने की रफ्तार बढ़ने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटाए जाने की इस अवधि के बारे में कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।
68 विधानसभा क्षेत्रों में जीत के अंतर से ज्यादा नाम बाहर
आंकड़ों के विश्लेषण में 2025 के विधानसभा चुनाव के परिणामों की तुलना पुनरीक्षण में बाहर किए गए मतदाताओं से भी की गई है। इसके अनुसार दिल्ली के 70 में से 68 विधानसभा क्षेत्रों में बाहर किए गए मतदाताओं की संख्या उस क्षेत्र में जीत के अंतर से अधिक है। विश्लेषण के अनुसार तुगलकाबाद में मतदाताओं के बाहर होने की दर सबसे अधिक 47.83 प्रतिशत रही। इसके बाद ओखला में 45.16, आरके पुरम में 44.36, कस्तूरबा नगर में 43.92, कालकाजी में 42.71, बदरपुर में 42.55, नई दिल्ली में 41.61 और जंगपुरा में 41.37 प्रतिशत रही।