{"_id":"5964ea764f1c1b9b288b46b5","slug":"world-population-day-mewat-woman-has-23-children-hardly-remember-everyone-name","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"इस महिला के 23 बच्चे, याद नहीं रहता हर किसी का नाम, 6 साल की है सबसे छोटी बेटी","category":{"title":"Bashindey","title_hn":"बाशिंदे ","slug":"bashindey"}}
इस महिला के 23 बच्चे, याद नहीं रहता हर किसी का नाम, 6 साल की है सबसे छोटी बेटी
राजुद्दीन जंग/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Thu, 13 Jul 2017 09:51 AM IST
विज्ञापन
बिस्सर उर्फ बिस्मिल्लाह
एक मां ऐसी भी है, जिसने 23 संतानों को जन्म दिया और ताज्जुब की बात है कि उसे अपने ही आधा दर्जन बच्चों के नाम तक याद नहीं हैं।
विज्ञापन
आजकल देश में बढ़ती हुई आबादी चर्चा का विषय बनी हुई है लेकिन सच यह भी है कि सही जानकारी न होने से ऐसी अनगिनत महिलाएं हैं, जो दर्जनों बच्चों को अभी भी जन्म दे रही हैं, कुछ ऐसी भी हैं जो बेटा होने की चाहत में जरूरत से अधिक बच्चों को जन्म देती हैं।
विज्ञापन
हम बात कर रहे हैं दिल्ली से महज 70 किलोमीटर दूर बसे हरियाणा के मेवात जिले की। यहां आकेड़ा गांव की रहने वाली बिस्सर नाम की महिला ने 23 बच्चों को जन्म दिया, जिनमें आधी लड़कियां और आधे लड़के शामिल हैं।
विज्ञापन
महिला बताती है कि उसे परिवार नियोजन के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। वहीं मजहबी उलमाओं के डर से वह चाहकर भी छोटा परिवार नहीं रख पाई।
उसने अपनी उम्र 49 वर्ष बताई है साथ ही यह भी बताया कि उसके पति के देहांत को तीन साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। परन्तु मुझे अभी तक विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिला है। उसकी सबसे छोटी संतान शाबरा है जो पहली कक्षा में पढ़ने जाती है।
इसके परिवार में सबसे अधिक पढ़ाई नवीं तक हुई है। कई बच्चों को अक्षर ज्ञान तो कुछ अनपढ़ भी हैं। आज भी परिवार के पालन पोषण के लिए मजदूरी ही मात्र एक सहारा है।
यह हैं 23 संतान:
महिला के सबसे बड़ी बेटी का नाम साहुनी है, इसके बाद बस्सी, फखरूद्दीन, सकरूदीन, नजरूदीन, साहिद, साबिर, अपसीना व साबरा हैं। साहुन, मामुर, मुजाहिद, कयुम, साजिद, बसगरी, फरजाना, साहिस्ता, आसमां आदि की एक, दो जीवित होकर मौत हो गई। पांच बच्चों के नाम बिस्सर को याद नहीं हैं।
पेंशन न मिलने से हैं परेशान
बिस्सर उर्फ बिस्मिल्लाह
वर्ष 2014 में उसके पति इसाक की मौत हो गई। उसी साल महिला ने विधवा पेंशन पाने के लिए विभाग का दरवाजा खटखटाया लेकिन तीन साल बीत गए, अभी तक उसे पेंशन मिलनी शुरू नहीं हुई है। उसने बताया कि मुझे कुछ दिन बुढ़ापा पेंशन मिली थी जो विभाग ने कम उम्र होने के कारण काट दी थी। इसी वजह से शायद विभाग मेरी विधवा पेंशन नहीं बांध रहा है जबकि मैं पेंशन पाने की पूरी हकदार हूं। पेंशन न मिलने से बहुत परेशानी हो रही है।
क्या कहते हैं कानूनविद
एडवोकेट अली मोहम्मद ने बताया कि महिला बिस्सर विधवा पेंशन पाने की पात्र है उसे यह कहकर मना नहीं किया जा सकता कि उसने बुढ़ापा पेंशन पहले ली थी। दोनों पेंशन अलग हैं, अब वह विधवा है तो उसे विधवा पेंशन मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि पेंशन विभाग महिला को विधवा पेंशन भत्ता नहीं देता है तो एक जनहित याचिका डालकर इंसाफ दिलाया जाएगा।
क्या कहते हैं कानूनविद
एडवोकेट अली मोहम्मद ने बताया कि महिला बिस्सर विधवा पेंशन पाने की पात्र है उसे यह कहकर मना नहीं किया जा सकता कि उसने बुढ़ापा पेंशन पहले ली थी। दोनों पेंशन अलग हैं, अब वह विधवा है तो उसे विधवा पेंशन मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि पेंशन विभाग महिला को विधवा पेंशन भत्ता नहीं देता है तो एक जनहित याचिका डालकर इंसाफ दिलाया जाएगा।