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विवेक बने उम्मीद की मशालः हरियाली के लिए बंद कर दी कंपनी

Mon, 07 Mar 2016 04:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Mon, 07 Mar 2016 04:10 PM IST
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vivek kamboj shut his company for betterment of environment
vivek kamboj - फोटो : अमर उजाला

पर्यावरण के क्षेत्र में आज विवेक कंबोज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। शहर की आबोहवा को सुधारने व हरियाली बचाने के लिए इन्होंने इन्होंने सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट में लड़ाई लड़ी।

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विवेक कंबोज के मुताबिक मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद अपने मित्र के साथ साझेदारी में मनु फाइनेंशियल सर्विस नाम से कंपनी शुरू की। निदेशक के रूप में काम इतना की फुर्सत के कुछ पल ही आराम के मिलते थे, इसी बीच एक ऐसी घटना घटी कि उन्होंने आराम की जिंदगी छोड़कर जंगल और हरियाली को बचाने के लिए संघर्ष शुरू किया।
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विवेक का कहना है कि एक बार घर के बाहर पार्किंग के लिए नीम का छोटा सा पेड़ कटवाना पड़ा, लेकिन इस घटना ने मन को अंदर से झकझोर दिया। इसके बाद 20 नीम के पेड़ खरीदे और लगवाए।

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'पर्यावरण पर काम करते हुए आज कई दुश्मन पाल लिए हैं'

vivek kamboj shut his company for betterment of environment
file photo - फोटो : अमर उजाला

फिर किसी की मृत्यु पर लगा कि एक व्यक्ति के मरने के साथ एक पेड़ को मरना पड़ता है, लेकिन कोई इसके लिए नहीं सोच रहा। तभी से पर्यावरण, अरावली और हरियाली को लेकर काम शुरू कर दिया।

विवेक बताते हैं कि पर्यावरण पर काम करते हुए आज कई दुश्मन पाल लिए हैं। कई बार कोर्ट और सरकार के समक्ष मुद्दे उठाने पर धमकी तक मिल चुकी है, लेकिन आज तक अपने कदम पीछे नहीं हटाए हैं।

विवेक का दावा है कि बीते 12 वर्षों में करीब 50 हजार से अधिक पेड़ों को वह बचा चुके हैं। उन्होंने मांगर-बनी और टिंबर माफियाओं के खिलाफ अभियान शुरू किया। मांगर-बनी को बचाने के लिए एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। अब निशानदेही के बाद इसे सुरक्षित करने के लिए अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

इनके यह कदम रहे चर्चा में

vivek kamboj shut his company for betterment of environment
forest - फोटो : अमर उजाला

•सुप्रीम कोर्ट के नियम के खिलाफ सरकार ने टिंबर को लेकर प्राइवेट ठेका दे दिया। जिसके बाद विवेक सुप्रीम कोर्ट गए। एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। तब जाकर सरकार ने इसे रद्द किया।

•बिना किसी शोध के एलोसटोनिया पौधा काटने की अनुमति दे दी गई। इस मामले को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय तक उठाया। जिसके बाद मामला टला।

•मांगर-बनी को सुरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने के लिए मामला एनजीटी में उठाया। सरकार द्वारा 50 मीटर के बफर जोन को गलत बताते हुए कोर्ट गए। इसके बाद सरकार ने फिर से से निशानदेही की और 500 मीटर बफर जोन घोषित किया।

•पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट को हटाने को लेकर एनजीटी में इसे चुनौती दी। जिसके बाद स्थानीय निकायों को इसे हटाने का आदेश दिया गया।

•600 एकड़ में स्थापित बायो डायवर्सिटी पार्क के वीरान हालत को सुधारने में अहम भूमिका निभाई।

शख्सियत का परिचय और काम

नाम-विवेक कंबोज

शिक्षा: मैकेनिकल इंजीनियरिंग

रोजगार: फाइनेंशियल कंसल्टेंट

शौक : हरियाली बढ़ाना और पेड़ बचाना

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