अमेरिकन कंपनी में जीएम की नौकरी छोड़ कचरा प्रबंधन कर रहीं ‘रूचिका’
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अमेरिकन टेक्सटाइल कंपनी में बतौर जीएम (इंडिया) के पद पर कार्यरत रूचिका सेठी नौकरी छोड़ कचरे के प्रबंधन और निस्तारण को लेकर लोगों को जागरूक करने में जुटी हैं।
बिना कोई गैर सरकारी संगठन और फाउंडेशन बनाए रूचिका अपने बलबूते ‘क्लीन गुड़गांव’ नाम से अभियान चला रही हैं। वह होटल, रेस्टोरेंट और कॉरपोरेट कंपनियों को ई-मेल व सोशल साइट के जरिये किस तरह कचरा कम पैदा हो इसके तरीके बता रही हैं, जिस पर अमल भी हो रहा है।
गुड़गांव के निर्वाणा कंट्री में रहने वाली रूचिका के साथ अब कई प्रतिष्ठित लोग भी जुड़ गए हैं। अप्रैल 2014 में बच्चे को न्यूरो की समस्या आने के बाद रूचिका का ध्यान कचरे की समस्या की ओर गया।
इस घटना के बाद उन्होंने कचरा निस्तारण और प्रबंधन को लेकर मुहिम शुरू की। सोशल साइट्स पर कैंपेन चलाए, लोगों को जोड़ा। लोगों के बीच गईं और कचरे से होने वाली समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया।
लोगों को जागरूक करने में जुटी ‘रूचिका’
समस्या से लोगों को निजात कैसे मिले इसका समाधान भी बताया। कचरा कम कैसे पैदा हो इसके तरीके बताते हुए उन्होंने कई कंपनियों को ई-मेल लिखे।
इसका सार्थक नतीजा भी निकला और प्रतिष्ठित कंपनी कॉफी कैफे स्टारबक्स ने अपने यहां यूज एंड थ्रो मग की जगह मग लेकर आने वालों के लिए डिस्काउंट देना शुरू किया। इस पहल से ढेर सारा कचरा होने से बच गया।
18 रेजिडेंट विलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) भी अपने क्षेत्र में कचरे को अलग-अलग कर रही हैं। इन जगहों पर कचरे से खाद बनाई जा रही है।
अपने बलबूते चला रहीं अभियान
रूचिका की पहल पर नगर निगम गुड़गांव ने अशोक विहार के वार्ड नं. 6 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की है। यहां स्थानीय घरों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। जल्द ही रूचिका एक प्रस्ताव के साथ कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलने वाली हैं।
‘कचरा अलग-अलग जमा करने और कलेक्शन प्वाइंट को लेकर कोई कानून नहीं है। यदि यह कानून बन जाए और इस पर अमल हो तो घरों से निकलने वाले 70 फीसदी कचरे को जैविक खाद बनाकर किसानों को दिया जा सकता है। कचरा प्रबंधन केवल नगर निगम या किसी सरकार की समस्या नहीं है, यह सभी लोगों की जिम्मेदारी है।’- रूचिका सेठी
‘कचरा निस्तारण को लेकर सरकार संजीदा है। 79 नगर पालिकाओं के कचरा प्रबंधन पर हरियाणा सरकार 1540 करोड़ रुपए खर्च करेगी। वर्ष 2031 तक प्रतिदिन 6600 टन कचरे का निस्तारण किया जाएगा।’- कविता जैन (मंत्री, शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा)