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पर्यावरणविद, समाजशास्त्री और राजनीतिक चिंतक ‘पानी बाबा’ नहीं रहे
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 10 May 2016 12:19 PM IST
सार
- जल संरक्षण पर लोगों को जागरूक करने के साथ ही कई शोध किए
- परिवार में हैं बेटा और पत्नी, घर पर लगा रहा शोक प्रकट करने वालों का तांता
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पानी बाबा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पर्यावरणविद, समाजशास्त्री और राजनीतिक चिंतक अरुण कुमार उर्फ ‘पानी बाबा’ का सोमवार की सुबह 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके फेफड़े में इंफेक्शन था और वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
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सुबह तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें मैक्स अस्पताल वैशाली ले जा रहे थे, इस दौरान एंबुलेंस में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। वसुंधरा सेक्टर-9 स्थित जनसत्ता अपार्टमेंट के फ्लैट संख्या ए-301 में उनके निवास पर दिनभर शोक प्रकट करने वालों का तांता लगा रहा।
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वह अपने पीछे बेटे वेंकटराम और पत्नी पूर्णिमा अरुण को छोड़ गए हैं। बेटे वेंकटराम ने बताया कि सोमवार सुबह करीब पौने 10 बजे उनका देहांत हुआ। उन्होंने जल संरक्षण पर लोगों को जागरूक करने के साथ ही कई शोध किए।
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अपनी पुस्तक ‘भारत जलधर्म’ के जरिए उन्होंने जल संरक्षण पर जोर दिया। दिल्ली में जन्मे और इलाहाबाद में पढ़े अरुण कुमार ने वर्ष 1985-87 में राजस्थान के मरुस्थल में पानी मार्च निकाला और पानी बाबा कहलाए।
इसके साथ ही उन्होंने गाय, गंगा और हिमालय बचाओ अभियान चलाया। लोगों में पानी के प्रति चेतना जगाने के लिए पानी चेतना समिति का गठन किया। उन्होंने यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी टोक्यो के लिए सामाजिक शोध कार्य भी किया।
सेंटर फॉर सोशल स्टडीज सूरत के फेलो रहे और अकाल सर्वेक्षण कार्य संपादित किया। अकाल की विभीषिका और पानी की समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने वर्ष 1990 में मरुस्थल विज्ञान भारती की जोधपुर में स्थापना की।