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डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर शुरू न होने से अक्षम बच्चों के इलाज में परेशानी
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डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर शुरू न होने से अक्षम बच्चों के इलाज में परेशानी
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- मार्च महीने में 70 अक्षम बच्चों का चल रहा था इलाज
लॉकडाउन के समय से बंद पड़ा है सेंटर
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। संयुक्त अस्पताल में संचालित डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर आठ महीने से बंद होने के कारण शारीरिक व मानसिक रूप से अक्षम बच्चों के इलाज में परेशानी हो रही है। सेंटर को कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉक डाउन के दौरान मार्च में बंद कर दिया गया था। उस समय केंद्र पर शून्य से छह साल तक के 70 बच्चों का इलाज चल रहा था। उपचाराधीन बच्चे कहां हैं? इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। सभी चीजें अनलॉक होने के बाद भी सेंटर शुरू होने की दूर-दूर तक कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रयास किया जा रहा है जल्द ही कुछ बदलाव करके सेंटर शुरु कराया जाए।
इसलिए शुरू किया गया था सेंटर
मां के गर्भ में ही बीमारियों की चपेट में आने वाले बच्चों की देखभाल के लिए माता-पिता को डॉक्टरों के यहां चक्कर न काटना पड़े, इसके लिए संयुक्त जिला अस्पताल में केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर शुरू किया गया था। इसमें शून्य से छह वर्ष तक बच्चों का इलाज चार अलग-अलग वर्गों में किया जाता था। पहला नवजात शिशु के जन्म से होने वाली बीमारियों के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी, दूसरे वर्ग में विटामिन की कमी व आसपास के प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूक किया जाता था, जबकि तृतीय वर्ग में दांतों में कीड़े लगने और चौथी कटगेरी में मानसिक रूप से कमजोर बच्चों का इलाज किया जाता था।
76 लाख की लागत से बना है केंद्र
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 76 लाख रुपये की लागत से इंटरवेंशन सेंटर हिन्दुस्तान लेटेक्स फैमिली प्लानिंग प्रमोशन ट्रस्ट संस्था द्वारा तैयार किया गया था। जिले के प्रथम सेंटर की खासियत यह है कि वहां पहुंचने पर बच्चे व उसके माता पिता को यह बिल्कुल नहीं लगता था कि वह इलाज कराने के लिए आए हैं। हर कमरे की सजावट इस तरह से की गई है कि बच्चे वहां पर खेलने कूदने या पढ़ने जाते थे। चिकित्सक कक्ष में रखे गए उपकरण बच्चे को दिखाई नहीं देते थे। खेल- खेल में ही डॉक्टर बच्चे की जांच करते थे। सेंटर पर एक मोबाइल वैन भी थी। सेंटर में कार्यरत स्टॉफ मोबाइल वैन से ग्रामीण क्षेत्रों व स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर ऐसे बच्चों को ढूंढ कर सेंटर तक लाती थी, जो बीमारी की चपेट में होते थे। आठ महीने से वैन भी खड़ी है।
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कहां गए बच्चे नहीं है जानकारी
सेंटर पर कई बच्चे ऐसे थे जिनके उपचार के बाद स्थिति में सुधार हो रहा था, लेकिन संयुक्त अस्पताल को कोविड लेवल-2 घोषित होने के बाद उसमें कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती होने लगे। इसके बाद बच्चे कहां गए, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। सेंटर पर गाजियाबाद के अलावा मध्यप्रदेश, झारखंड व बिहार के भी कई बच्चों का इलाज चल रहा था। यह सभी लोग गाजियाबाद में रहकर इलाज करा रहे थे।
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अस्पताल में इस समय 80 से 90 कोरोना के मरीज भर्ती हो रहे हैं। इंटरवेंशन सेंटर में बच्चों को भर्ती करने में रिस्क है। इसलिए सेंटर बंद किया गया है।
डा. संजय तेवतिया, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक संयुक्त अस्पताल
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सेंटर शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही विभाग के इंजीनियर के साथ मीटिंग की जाएगी। इसमें प्लानिंग की जा रही है कि अगर दूसरी तरफ से सेंटर का रास्ता खुल जाए तो बच्चों के लिए सुरक्षित सेंटर बना दिया जाएगा, इसके बाद शुरू किया जाएगा।
डा. एनके गुप्ता, सीएमओ
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आशुतोष यादव
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