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शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शुरू होगा विशेष सप्ताह

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 15 Nov 2020 05:14 PM IST
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शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शुरू होगा विशेष सप्ताह
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21 नवम्बर तक मनाया जाएगा नवजात शिशु देखभाल सप्ताह माई सिटी रिपोर्टर  गाजियाबाद। नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के तहत शिशु स्वास्थ्य के साथ बेहतर देखभाल के बारे में जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसमें कंगारू मदर केयर और स्तनपान को बढ़ावा देने के साथ ही बीमार नवजात शिशुओं की पहचान के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। शासन से जारी  निर्देश के तहत चलाये जा रहे बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसमें स्वैच्छिक संस्थाओं की भी मदद ली जायगी ताकि शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सके। केंद्र सरकार द्वारा जारी (एसआरएस) की रिपोर्ट के अनुसार शिशु मृत्यु दर 43 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह सूचकांक 32 प्रति 1000 जीवित जन्म है । इनमें से तीन चौथाई शिशुओं की मृत्यु पहले महीने में हो जाती है। जन्म के एक घंटे के अन्दर स्तनपान और छह माह तक केवल मां का दूध दिए जाने से शिशु मृत्यु दर में 20 से 22 प्रतिशत तक की कमी लायी जा सकती है
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सीएमओ डा. एनके गुप्ता ने बताया कि नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल के लिए जरूरी है कि प्रसव चिकित्सालय में ही कराएं। प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए चिकित्सालय में रुकें। नवजात को तुरंत न नहलायें केवल शरीर पोंछकर नर्म साफ कपड़े पहनाएं। जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाना शुरू कर दें और छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराएं। जन्म के तुरंत बाद नवजात का वजन लें और विटामिन के का इंजेक्शन लगवाएं। नियमित और सम्पूर्ण टीकाकरण कराएं। नवजात की नाभि सूखी एवं साफ रखें, संक्रमण से बचाएं और मां व शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें । कम वजन और समय से पहले जन्में बच्चों पर विशेष ध्यान दें और शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) की विधि अपनाएं । शिशु जितनी बार चाहे दिन या रात में बार-बार स्तनपान कराएं । कुपोषण और संक्रमण से बचाव के लिए छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाएं, शहद, घुट्टी, पानी आदि बिल्कुल न पिलाएं।  
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सप्ताह के मुख्य उद्देश्य नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल करने के बारे में जनसमुदाय को जागरूक कर नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, जन्म के तुरंत बाद स्तनपान, छह माह तक केवल स्तनपान और छह माह के बाद ऊपरी आहार देकर बच्चों को सुपोषित बनाना और शिशुओं का समय से नियमित टीकाकरण कराना आदि के बारे में विधिवत जानकारी देना नवजात शिशु देखभाल सप्ताह का प्रमुख उद्देश्य है।
----------- आशुतोष यादव 
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