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तन से लेकर मन तक प्रदूषण कर रहा बीमार
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तन से लेकर मन तक प्रदूषण कर रहा बीमार
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- प्रदूषण की विभिन्न गैसें शरीर के अंग को पहुंचाती हैं नुकसान
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के कारण शरीर का ऐसा कोई अंग नहीं है जो प्रदूषण की चपेट में न हो। सिर के बाल से लेकर पैर के नाखून तक, सब पर प्रदूषण अपना असर छोड़ रहा है। शरीर के साथ ही मन भी बीमार हो रहा है। वायु प्रदूषण के जहरीले तत्व सांस में घुल कर शरीर में पहुंच रहे हैं और अपना असर शरीर के विभिन्न अंगों पर छोड़ रहे हैं। प्रदूषण का असर हर उम्र के लोगों को हो रहा है लेकिन विशेष तौर पर कोरोना संक्रमण मुक्त हो चुके लोग, बुजुर्ग और बच्चे परेशान हो रहे हैं।
प्रदूषण में फैली जहरीली गैसों का शरीर के अंगों पर दुष्प्रभाव
ओजोन: अगर हवा में ओजोन की मात्रा बढ़ जाती है तो यह फेफड़ों के काम करने की क्षमता को सीधा प्रभावित करती है। सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, अस्थमा के मरीजों के लिए दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
नाइट्रोजन ऑक्साइडः गैस का सीधा असर फेफड़ों पर होता है। अस्थमा के मरीजों में खांसी और ब्रोंकाइटिस की समस्या बढ़ जाती है और लंबे समय तक इस गैस के संपर्क में रहने से बच्चों में सांस की समस्या पैदा होती है। साथ ही याददाश्त पर भी इसका असर होता है।
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सल्फर डाई ऑक्साइड : इसका सीधा असर आंखों और सांस की नली पर होता है। आंखों में खुजली और सांस की नली में जलन महसूस होने लगती है। सांस की नली में इंफेक्शन के चांस बढ़ जाते हैं। यह गैस पानी के साथ मिलकर सल्फ्यूरिक एसिड बनाती है और एसिड रेन का कारण बनती है।
प्रदूषण से इन बीमारियों से लोग परेशान
आंखों पर असर
नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. नरेंद्र कुमार का कहना है कि जो लोग ज्यादा प्रदूषण वाले इलाके में रहते हैं, उनकी आंखें अक्सर लाल हो जाती हैं, जलन होती है, पानी आने लगता है, खुजली होती है और ड्राईनेस की शिकायत रहती है।
त्वचा और बालों पर असर
त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. भावुक मित्तल का कहना है कि प्रदूषण से बाल गिरने लगते हैं। रुसी भी बढ़ जाती है। बालों की चमक खोने लगती है। त्वचा पर दाग-धब्बे हो जाते हैं और वह रूखी व बेजान लगती है। प्रदूषण से चेहरे की चमक खोने लग जाती है। एग्जिमा, स्किन एलर्जी, रैशेज, उम्र से पहले झुर्रियां आने से लेकर स्किन के कैंसर तक की आशंका बढ़ जाती है।
बेचैनी व चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है
मनोचिकित्सक डा. हेमिका अग्रवाल का कहना है कि प्रदूषण से बेचैनी व चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। रात में पूरी तरह से नींद नहीं आती है। काम करने में मन नहीं लगता है और हर समय थकान लगी रहती हैञ।
गर्भपात या समय से पूर्व प्रसव की आशंका
महिला रोग विशेषज्ञ डा. श्रद्धा यादव का कहना है कि प्रदूषण से पुरुष और महिला, दोनों की सेक्सुअल परफॉर्मेंस और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। स्पर्म और एग बनने की क्षमता कम हो जाती है। गर्भपात, समय से पहले प्रसव और बच्चे का वजन कम होने की आशंका बढ़ जाती है। बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी असर पड़ता है।
दिल पर प्रभाव
हृदय रोग विशेषज्ञ डा. सुनील कात्याल का कहना है कि ज्यादा प्रदूषित इलाके में रहने वाले लोगों में हार्ट अटैक के खतरे ज्यादा होते हैं। हार्ट से जुड़ी दूसरी समस्याओं की आशंका भी बढ़ जाती है। सांस की नली पर बहुत असर होता है। उसमें जलन होने लगती है और सांस लेने में रुकावट महसूस होती है।
इनसे करें बचाव
- अक्सर हम घर में पौधे लगाते हैं, लेकिन वे प्लास्टिक के सजावटी पौधे होते हैं। ये प्रदूषण को बढ़ाते हैं। इन पर धूल जमती है जो हमें साइनस और एलर्जी देती है। बेहतर होगा कि घरों में असली इनडोर प्लांट लगाएं।
- हम घर में दीया और अगरबत्ती, कपूर आदि जलाते हैं, लेकिन घर में जितना धुआं होगा, हमारा घर उतना अशुद्ध होगा। जिस भी चीज को जलाने पर कार्बन (कालिख) निकलता है, वह सेहत के लिए नुकसानदेह है।
- घर में साफ-सफाई के साथ-साथ गद्दे-तकिये को भी धूप में रखें। अगर नहीं रख सकते तो हफ्ते में कम-से-कम एक बार उन्हें अच्छी तरह झाड़ें और इनके कवर बदलें।
इनका प्रयोग कर प्रदूषण से करें बचाव
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. अशोक राना का कहना है कि नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर नहाएं और रात में सोने से पहले इस पानी से चेहरा धोएं तो प्रदूषण का असर कम होगा। नीम की तीन-चार पत्तियां सुबह-सुबह खाएं।
- घर में तुलसी लगाएं। तुलसी घर के प्रदूषण को कम करती है। हर दिन तुलसी की चार-पांच पत्तियों का सेवन करने से सांस की नली साफ रहती है।
- एक चम्मच हल्दी आधा चम्मच घी या शहद के साथ सुबह-सुबह खाली पेट लेने से कई बीमारियां दूर रहती हैं।
- गिलोय का जूस खाली पेट पिएं या फिर आधा चम्मच हल्दी के साथ लें। इससे प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
- शरीर की नियमित मसाज से भी बहुत फायदा होता है। अगर सरसों का तेल या देसी घी गर्म करके मसाज करते हैं तो यह ब्लड के सर्कुलेशन को बढ़ाता है और प्रदूषण से होने वाली कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
- प्राणायाम प्रदूषण से लड़ने में मदद करता है। प्राणायाम करने के लिए ऐसा पार्क चुनें, जहां पेड़-पौधे बहुत हों और गाड़ियों की आवाजाही कम हो।
- अनुलोम-विलोम, कपालभाति, गहरी सांस और जलनेति क्रिया शरीर में प्रदूषण के प्रभाव को कम करती है।
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आशुतोष यादव
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