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वैचारिक क्रांति के जनक थे महर्षि दयानंद
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माई सिटी रिपोर्टर
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गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद ने आर्य समाज के संस्थापक और समाज सुधारक महर्षि दयानन्द सरस्वती के 137 वें बलिदान दिवस पर आर्य गोष्ठी का आयोजन किया ।केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद का बलिदान सदियों तक समाज का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा। महर्षि दयानन्द महान क्रांतिकारी थे, उन्होंने हजारों लोगों के जीवन को प्रकाशित किया। मुख्य वक्ता डॉ.करुणा चांदना ने कहा कि महर्षि दयानन्द ने सत्यार्थ प्रकाश में शुद्ध आहार- व्यवहार का उल्लेख किया है और आज का विज्ञान भी मानता है कि उचित पौष्टिक आहार खाने से हम मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं और बीमारियों से भी दूर रहने में इससे सहायता मिलती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आर्य नेत्री पुष्पा शास्त्री ने कहा कि नारी जाति जो आज समाज निर्माण मे अपना योगदान दे रही है। उसके प्रणेता महर्षि दयानन्द सरस्वती ही है। प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि सत्यार्थ प्रकाश की रचना मानव कल्याण का आधार सिद्ध हुआ। इस दौरान प्रमुख रूप से आनन्द प्रकाश आर्य, देवेन्द्र गुप्ता, डॉ कल्पना रस्तोगी, अनिल आहूजा, रमेश गाड़ी, राजेश मेहंदीरत्ता, कविता रानी,राजश्री यादव,नरेश प्रसाद,सुदेश वीर आर्य आदि मौजूद रहे।