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लचर सरकारी व्यवस्था, हरित पट्टिओं में सूखने लगे पौधे

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 05:19 PM IST
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लचर सरकारी व्यवस्था, हरित पट्टिओं में सूखने लगे पौधे
राजनगर एक्सटेंशन स्थित हरित पट्टीओं में सूखने लगे पेड़ पौधे - फोटो : Amar Ujala
सबहेडः आठ माह बीते, नहीं हो सके टेंडर, मजदूर की कमी से गहराई समस्या, अधिकांश हरित पट्टिओं और सेंट्रल वर्ज का बुरा हाल
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- महानगर में जीडीए के 140 छोटे बड़े हैं पार्क, 35 किलोमीटर है ग्रीन बेल्ट माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। करोना काल में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की हरित पटि्टयों, सेंट्रल वर्ज और पार्कों की दशा बेहद खराब है। जीडीए उद्यान अनुभाग से जुड़े कार्यों के टेंडर नहीं होने और सात माह से मजदूरों की कमी के चलते अब हरित पट्टियों, सेंट्रल वर्ज और पार्कों में लगे पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। जीडीए की करहेड़ा, हापुड़ रोड, राजनगर एक्सटेंशन सहित अन्य हरित पट्टियों का बुरा हाल है। पौधों की देखभाल न होने और उचित तरीके से उनकी सिंचाई न होने के कारण पौधे अब सूखने की स्थिति में पहुंच गए हैं। महानगर के बड़े सेंट्रल पार्क में खड़ी लंबी-लंबी घास और गंदगी का मुद्दा स्थानीय पार्षद राजेंद्र त्यागी ने उठाया था। इसके बाद प्राधिकरण उद्यान विभाग ने जैसे-तैसे मजदूरों की व्यवस्था कर घास को कटवाने का काम शुरू किया है। लेकिन उद्यान से जुड़े का कार्यों की निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं होने के चलते अधिकांश पार्को और हरित पट्टियों की हालत बेहद खराब है। राजनगर एक्सटेंशन के लोगों ने ग्रीन बेल्ट की बदहाली को लेकर कई बार शिकायत की है, लेकिन समस्या का अब तक समाधान नहीं हुआ है।
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बता दें कि जुलाई माह में जीडीए ने उद्यान से जुड़े तमाम टेंडर को निकालने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन मजदूरों की कमी के चलते कोई ठेकेदार आगे नहीं आया। जीडीए ने फिर से उद्यान से जुड़े कई टेंडर निकाले हैं। निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही होने के बाद ही पार्को और ग्रीन बेल्ट की दशा सुधारने का काम शुरू हो पाएगा। महानगर में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के छोटे बड़े 140 पार्क हैं। इसके अलावा 35 किलोमीटर लंबी ग्रीन बेल्ट की देखरेख जीडीए उद्यान अनुभाग करता है। उद्यान से जुड़े कार्यों के टेंडर न होने और मजदूरों की कमी के चलते पार्कों और ग्रीन बेल्ट की खराब दशा अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं। जीडीए सचिव संतोष कुमार राय ने बताया कि ध्यान से जुड़े कार्यों की करीब दो बार निविदा प्रक्रिया निकाली गई, लेकिन कोई आगे नहीं आया। वर्तमान में जारी प्रक्रिया माह के अंत तक पूरी होने के साथ ही उद्यान से जुड़े सभी काम विधिवत रूप से शुरू हो जाएंगे।
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