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किसानों को किया जा रहा भ्रमित, विरोध के पीछे मंडी टैक्स: वीके सिंह

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2020 07:03 PM IST
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किसानों को किया जा रहा भ्रमित, विरोध के पीछे मंडी टैक्स: वीके सिंह
प्रेसवार्ता को संबोधित करते केंद्रीय राज्य मंत्री व सांसद वीके सिंह - फोटो : Amar Ujala
सबहेडः कृषि विधायकों पर विपक्ष के आरोपों का केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद वीके सिंह ने दिया जवाब, बोले, विरोध किसानों का नहीं पार्टियों का
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- अकाली दल के एनडीए छोड़ने पर बोले, जिन्हें अस्तित्व बचाना था, वह साथ छोड़ चले गए माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कृषि विधेयकों को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर है। किसानों से जुड़े विधेयकों को बगैर उनकी सहमति के पास कराने और किसानों को पूंजीपतियों के हाथ की कठपुतली बनाने के आरोपों का केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद वीके सिंह ने प्रेसवार्ता के जरिए जवाब दिया। सरकार का पक्ष रखते हुए सांसद वीके सिंह ने कहा कि किसानों के हित में सरकार हर संभव कदम उठा रही है। विधेयकों में क्या कमी है, इस पर चर्चा से विपक्ष बच रहा है। केवल किसानों को झूठ बोल कर भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने विरोध के पीछे मंडी टैक्स को बड़ी वजह बताया। सांसद वीके सिंह ने कहा कि मोदी सरकार आने के बाद लगातार किसानों की हालत सुधरी है। कृषि विधेयकों से पहले भी सरकार ने किसान सम्मान निधि, पेंशन योजना , किसान क्रेडिट कार्ड व फसल बीमा जैसे कदम उठा कर किसानों को मजबूत बनाया है। कृषि विधेयक भी स्वामीरंगनाथन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ही तैयार हुए हैं। विपक्षियों पर निशाना साधते हुए वीके सिंह बोले कि किसान विरोध नहीं कर रहे हैं। विरोध के पीछे विपक्ष की बड़ी साजिश है। किसानों को केवल बरगलाया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि विरोध के पीछे मुख्य वजह मंडी टैक्स है। मंडी कानून 1939 में आया था, जिसे अंग्रेज लाए थे। आज देश में 6946 मंडियां हैं, जो सलाना 8 हजार 691 करोड़ टैक्स वसूलती हैं। इस टैक्स का 90 फीसदी हिस्सा एफसीआई व सरकार देती है। हर राज्य में मंडी टैक्स अलग होता है। पंजाब में सबसे ज्यादा 8 फीसदी है, जबकि गुजरात में सबसे कम 0.3 प्रतिशत। इससे साफ होता है कि जहां टैक्स ज्यादा है, वहां विरोध ज्यादा। विरोध किसानों का नहीं उन राज्य सरकारों का है, जिनके खजाने पर खतरा मंडरा रहा है।
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इस मौके पर महापौर आशा शर्मा, साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा, मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी, भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा, महामंत्री राजेश त्यागी, पप्पू पहलवान सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
------------------- किसानों के लिए सरकार की गिनाई उपलब्धियां बीते एक दशक का आंकड़ा रखते हुए सांसद वीके सिंह ने किसानों को लेकर एनडीए की उपलब्धियां गिनाई। सांसद वीके सिंह ने बताया कि यूपीए-दो के शासनकाल में 2009-14 में 2494 लाख मैट्रिक टन धान हुआ, जिसके एवज में किसानों को 2 लाख 88 हजार 770 करोड़ का भुगतान हुआ। वहीं, मोदी सरकार के पहले शासनकाल में 2014-19 के बीच 2740 लाख मैट्रिक टन धान हुआ। जिसके एवज में 4 लाख 34 हजार 580 करोड़ का भुगतान हुआ। यानि मोदी सरकार के शासनकाल में उत्पादन के अलावा किसानों को भुगतान भी ज्यादा मिला। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर भी आकडें दिए। जिसमें उन्होंने बताया कि 2015-16 में चावल का एमएसपी 1410 रूपए था जो जब 1868 रूपए हो गया है। वहीं सोयाबीन का एमएसपी जो उस वक्त 26 सौ था आज बढक़र 3880 हो गया है।
---------------------- अस्तित्व बचाने की खातिर साथ छोड़ गए अकाली दल द्वारा एनडीए छोडऩे के सवाल पर वीके सिंह ने जवाब दिया कि अकाली दल ने किसानों के विरोध नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने के खातिर एनडीए का साथ छोड़ दिया। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार की मंशा किसानों को सशक्त बनाने की है। नए विधेयकों से किसानों के पास विकल्प होंगे। वह केवल मंडी के सहारे नहीं बैठेगा। उन्होंने मधुमक्खी पालन जैसे अन्य विकल्पों की तरफ भी लाने की कोशिश हो रही है। सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यूपीए सरकार में 2009-10 में 12 हजार करोड़ का कृषि बजट 10 गुना बढ़ा दिया गया है। ------------------
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