फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   महंगाई से टमाटर फिर लाल, 80 रुपए किलो पर पहुंचा

महंगाई से टमाटर फिर लाल, 80 रुपए किलो पर पहुंचा

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2020 05:54 PM IST
विज्ञापन
महंगाई से टमाटर फिर लाल, 80 रुपए किलो पर पहुंचा
विज्ञापन
- फसल न होने से बढ़े हैं रेट, सहारनपुर, शिमला से है आवक माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। सब्जियों के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। इस बीच टमाटर के दाम भी बढ़कर 80 रुपए किलो पर पहुंच गए हैं। सब्जियों के रेट में बढ़ोत्तरी से लोगों की जेब भी ढीली हो रही है। मंडी के थोक कारोबारियों का कहना है कि इस बार अधिक बारिश के चलते बाजार में नई फसल नहीं आ पा रही है। टमाटर की आवक शिमला और सहारनपुर से है और महंगे रेट पर कम आवक हो रही है। पिछले एक महीने में सब्जियों के रेट 30 से 40 रुपये तक बढ़ गए हैं। पिछले पांच दिन में टमाटर फुटकर बाजार में 60 रुपये किलो से बढ़कर 80 रुपए किलो तक बिक रहा है। फुटकर के मुलाबले सब्जी मंडी में टमाटर की कीमत 10 से 15 रुपए कम है। सब्जियों में टमाटर ही नहीं अन्य हरी सब्जियों के रेट भी बढ़े हुए हैं।
विज्ञापन
थोक कारोबारी ने बताया कि बारिश का सीजन और लोकल सब्जी न होने से सब्जियों के रेट बढ़ गए हैं। अधिकांश सब्जियां अन्य शहरों से भी आ रही हैं, जहां से बढ़े हुए रेट पर मंडी में सब्जियों की आवक है।
विज्ञापन
विज्ञापन
---- फुटकर में सब्जियों के रेट: सब्जी- रुपये प्रति किलो टमाटर- 80 आलू- 35 से 40 अरबी- 60 लौकी- 40 तोरई- 40 प्याज- 20 बैंगन- 60 गोभी- 80 धनिया- 300 अदरक- 200 बीन्स- 60 पत्ता गोभी- 60 ---- बोली पर महंगा उठ रहा है टमाटर: सहारनपुर और शिमला से टमाटर महंगे रेट पर कारोबारियों को मिल रहा है। आवक में लागत जोड़कर इसके रेट बढ़े हुए हैं। मंडी कारोबारियों का कहना है कि इन दिनों मांग के मुकाबले आवक काफी कम है। दूसरे शहरों में बोली पर बड़े कारोबारी महंगा टमाटर उठा रहे हैं।
----- क्या कहते हैं कारोबारी: ------ टमाटर सहित कई सब्जियां बाहर से आ रही हैं। इसका असर रेट पर भी पड़ रहा है। श्राद्ध पक्ष के बाद सब्जियों के रेट कम होंगे। - मुकेश प्रजापति, सब्जी विक्रेता ---- इस बार बारिश से फसल को नुकसान भी हुआ है और लोकल फसल भी जल्दी खत्म हो गई। थोक मंडी में फुटकर के मुकाबले रेट कुछ कम हैं। - ऋषिपाल यादव, थोक कारोबारी
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed