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सीएम पोर्टल पर लगातार समस्या निस्तारण की झूठी आख्या लगा रहे अधिकारी

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2020 05:40 PM IST
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सीएम पोर्टल पर लगातार समस्या निस्तारण की झूठी आख्या लगा रहे अधिकारी
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- वसुंधरा में स्ट्रीट लाइट लगाए बिना पोर्टल पर कर दिया समस्या का निस्तारण - ऐसे ही शिखर एंक्लेव सोसायटी में भी समस्या का निस्तारण किए बिना लगा दी झूठी आख्या माई सिटी रिपोर्टर साहिबाबाद। सीएम पोर्टल पर की जाने वाली शिकायतों पर लगातार झूठी आख्या लगाए जाने का मामला सामने आया है। वसुंधरा की दो अलग-अलग शिकायतों में शिकायतकर्ता ने समस्या का निस्तारण किए बिना झूठी आख्या लगाने का आरोप लगाया है और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि वह मौके पर मामले की जांच कर, उचित कार्रवाई करें। झूठी आख्या लगाने का पहला मामला वसुंधरा नगर निगम के पथ प्रकाश से जुड़ा हुआ है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष कैलाश शर्मा ने बताया कि वसुंधरा सेक्टर 1 कॉलोनी के अंदर और बाहर वनस्थली रोड, गार्डेनिया चौक, अमेठी रोड, एलिवेटेड रोड के नीचे ग्रीन बेल्ट की सभी  स्ट्रीट लाइट पिछले 1 माह से बन्द हैं। इसकी शिकायत 25अगस्त 2020 को जनसुनवाई पोर्टल पर की गई थी । पोर्टल पर समस्या निर्धारण की नीयत तिथि 1.9.2020 निर्धारित हुई। कैलाश शर्मा का कहना है कि हैरत की बात यह है कि अब तक भी लाइट ठीक नहीं हुई और 12 सितंबर को विभाग की ओरसे बिना लाइट ठीक किए झूठी आख्या प्रस्तुत कर दी गई है। आख्या में कहा गया है स्ट्रीट लाइट ठीक कराकर प्रकाश व्यवस्था सुचारू कर दी गई है। आरडब्लयूए अध्यक्ष ने बताया कि कोई भी लाइट ठीक नहीं की गई है। पूरा वसुंधरा सेक्टर 1 चारों ओर से अंधकार में डूबा हुआ है।
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ऐसे ही दूसरा मामला भी वसुंधरा, सेक्टर 15 स्थित शिखर एनक्लेव से जुड़ा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ समय पहले जन सुनवाई पोर्टल पर बंदरों के आतंक की शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में परिसर में रहने वाले निवासियों ने उनपर हो रहे बंदरों के लगातार हमलों की बात कही थीं। सोसायटी निवासी संदीप का कहना है कि समस्या का निस्तारण किए बिना नगर आयुक्त की ओर से पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण की फ़र्ज़ी आख्या लगाई गई है जो काफी अफसोसजनक है।  इस आख्या में नगर आयुक्त द्वारा बंदरों को पकड़ने के लिए प्राइवेट संस्थान पीएफए के जो मोबाइल नंबर दिए गए हैं उन पर बात करने पर पता लगा कि वो मोबाइल नंबर बैल, गाय और सांड को पकड़ने वाली पीएएफए संस्थान के हैं न कि बंदरों को पकड़ने वाली। सोसायटी में न तो कोई पहुंचा और न ही कोई बंदर पकड़ा गया, ऐसे में समस्या जस की तस बनी हुई है जबकि ऑनलाइन इस समस्या का निस्तारण कर दिया गया है।
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------------- निशा ठाकुर ——
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