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रोते चेहरों पर फिर से मुस्कान ले आए फिजियो-डॉक्टर्स
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रोते चेहरों पर फिर से मुस्कान ले आए फिजियो-डॉक्टर्स
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-कोरोना काल में तमाम बंदीसों के बावजूद जरूरतमंदों की मदद के लिए बढ़ते रहे कदम
- मुरादनगर में घर को बनाया मिनी अस्पताल, तो लोहिया नगर में दस-दस मरीजों को दे रहे निशुल्क परामर्श
वर्ल्ड फिजियोथैरेपिस्ट-डे
सुमित कुमार
साहिबाबाद। धरती पर डॉक्टरों को भगवान का रूप माना गया है। कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में मची अफरा-तफरी के बीच इनकी बानगी भी देखने को मिली है।पुलिस-प्रशासन के बाद अस्पतालों में डॉक्टरों ने विभिन्न तरीके से अपनी जिम्मेदारियों को निभाकर मरीजों को नया जीवनदान दिया।डॉक्टरों के इन्हीं रूपों में एक फिजियोथैरेपिस्ट डॉक्टर्स भी हैं, जो शरीर के हिस्से को अचानक बंद होने के बाद उसे तमाम आयामों से दोबारा संचालित करते हैं। वर्ल्ड फिजियोरैथेपिस्ट-डे पर प्रस्तुत है जिले के कुछ ऐसे डॉक्टरों की कहानी।जिन्होंने संकट के समय में भी अपनी जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक दायित्वों का भी निर्वाहन किया।
रोते हुए मरीज को इलाज देकर निभाया दायित्व ः
फिजियोथैरेपिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष लोहिया नगर निवासी डॉ पवन कुमार सैनी द्वारा कोरोना काल में निभाए गए दायित्व को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने इस संकट काल में न केवल अपने कर्तव्य का निर्वाहन किया,बल्कि जिंदगी से तंग रोते हुए मरीज के चेहरे पर फिर से खुशियों का रंग भर दिया। डॉ पवन बताते हैं कि गाजियाबाद निवासी 68 वर्षीय महिला गठिया बाय से परेशान थीं। महिला ने रोते हुए उन्हें फोन कर मदद मांगी तो उन्होंने भी अपना फर्ज निभाने के लिए महिला के घर पहुंचकर उनका कई दिनों तक इलाज किया। आज वह महिला काफी स्वस्थ हैं और उनका आभार व्यक्त करती रहती हैं।इतना ही नहीं,देश-विदेश के लोगों को फोन पर निशुल्क परामर्श भी देते हैं। मंगलवार को उन्होंने दस मरीजों को निशुल्क इलाज के लिए आमंत्रित भी किया है।कोरोना की वजह से मरीजों की संख्या सीमित ही तय की है। मोरटा में 500 लोगों को मुफ्त खाना खिलाकर सामाजिक दायित्व भी निभाया।
घर बनाया मिनी अस्पताल ः
मुरादनगर में महिलाओं और बच्चों के लिए द पिंक फिजियोथैरेपिस्ट क्लीनिक चलाने वाली वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. प्रियंका त्यागी ने भी इस संकट के समय में अपने अदम्य साहस के साथ जिम्मेदारियों को निभाया है। उनका कहना है कि लॉकडाउन से पहले क्लीनिक बंद करने को लेकर असमंजस थी। तो मैंने चुनिंदा बच्चे और महिलाओं के लिए अपने घर के बाहर कमरे को ही मिनी अस्पताल का रूप दे दिया था। वहां पर सिर्फ बेहद इमरजेंसी वाले मरीजों को ही आने की परमिशन दी गई। इस बीच जरूरतमंदों से फीस न लेकर उन्हें राहत भी दी गई। वह बताती हैं कि कोरोना के दौरान एक चार वर्षीय बच्ची को फ्रैक्चर हो गया था, तो उसे घर पर जाकर ट्रीटमेंट दिया। इसके लिए कोई अतिरिक्त चार्ज भी नहीं लिया। इतना ही नहीं, अपने क्लीनिक पर अलग-अलग समय पर महज दस-दस लोगों को ही बुलाती थी। जिससे कि यदि किसी को कोरोना हो गया तो कम ही लोग उसकी चपेट में आए।इतना ही नहीं, एक दिन मरीजों की सेवा करते हुए अचानक पीपीई किट के अंदर उनकी तबीयत खराब हो गई थी, लेकिन उन्होंने अपना दर्द और तबीयत भूलकर मरीजों की सेवा जारी रखी।
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सोसायटी सील होने पर भी निभाया फर्ज ः
न्यूरो-फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. हिमांद्री कपिल वैशाली की नीलपदम कुंज में रहती हैं।कोरोना के कई मरीजा आने के बाद प्रशासन ने उनकी सोसायटी सील कर दी थी।इस बीच उन्होंने फर्ज को समझकर इंदिरापुरम में एक स्पेशल बच्ची को रोजाना घर पर जाकर ठीक करने की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। इलाज से पहले वह रोजाना स्कूटी को सैनिटाइज करतीं और पीपीई किट पहनकर छोटी बच्ची का इलाज करतीं। इस दौरान वह अपने परिवार से दूर भी रहती हैं। यह सिलसिला अभी तक जारी है।डॉ. हिमांद्री मरीजों को फ्री में वीडियो कॉलिंग से परामर्श देती हैं।इतना ही नहीं, कोरोना काल में उन्होंने मरीजों के लिए अपनी फीस में राहत भी दी हुई है।
मरीजों की सेवा के साथ सामाजिक दायित्व निभाया ः
वैशाली निवासी फिजियोथैरेपिस्ट डॉ नमित वार्ष्णेय बीते 13 वर्षों से अपनी सेवा दे रहे हैं। कोरोना काल में इनका दायित्व भी सराहनीय रहा है।उन्होंने छोटे बच्चों का उनके घर जाकर कुछ राहत के साथ इलाज किया तो बड़े-बुजुर्ग और महिलाओं को अपने क्लीनिक पर आने पर उन्हें मास्क भी बांटे। इसके अलावा उन्होंने स्लम एरिये के लोग व सड़कों पर पैदल राहगीरों को खाना बांटकर उनकी भूख मिटाई। कई परिवारों को घर-घर राशन सामग्री भी पहुंचाई। डॉ. नमित बताते हैं कि कोरोना के दौरान उन्होंने वीडियो कॉलिंंग से लोगों से समस्याएं भी सुनीं। इसके अलावा स्पर्श संस्था के साथ जरूरतमंद लोगों के स्वास्थ्य जांच भी कर सामाजिक दायित्वों का निर्वाहन करते हैं।
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सुमित कुमार
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