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दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा तेजाब से झुलसा पीड़ित युवक
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दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा तेजाब से झुलसा पीड़ित युवक
- इलाज के दौरान लाखों रुपए के कर्ज में डूबे युवक को दिव्यांग प्रमाण पत्र से मिलेगा निशुल्क इलाज
- मार्च 2014 में रास्ते में जाते हुए युवक पर फेंक दिया था तेजाब
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। 6 साल पहले एसिड अटैक में झुलसे युवक को अब इलाज कराने के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। एसिड अटैक के बाद युवक को इन 6 सालों में कहीं भी नौकरी नहीं मिली। इससे इलाज के लिए लाखों रुपए का कर्ज हो गया। दिल्ली में एम्स के डॉक्टरों ने युवक को सलाह दिया कि अपने पैतृक जिले से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवा लो निशुल्क इलाज हो जाएगा। युवक 1 महीने से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय के चक्कर काट रहा है।
मोरटा के पास पैगा एंक्लेव में रहने वाले 27 वर्षीय युवक अमित कुमार चोपला स्थित एक ज्वैलर की दुकान पर काम करते थे। 29 मार्च 2014 को काम समाप्त होने के बाद वह दुकान से अपने घर विजयनगर जा रहे थे। इसी दौरान रेलवे लाइन के पास दो लोगों ने किसी मोहल्ले में जाने के रास्ता पूछा तो अमित ने कहा कि मुझे नहीं पता, इस पर बाइक सवार दोनों युवकों ने अमित के ऊपर तेजाब फेंक दिया। मामले की रिपोर्ट तो दर्ज हुई लेकिन, आरोपियों की गिरफ्तारी नही हुई। तत्कालीन विजय नगर थाना प्रभारी हरिदयाल ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी और आज तक आरोपियों का कोई पता नहीं लगा। इस हादसे में अमित को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। वह किसी तरह बच तो गए लेकिन आज तक इलाज कराने में करीब नौ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। अमित ने बताया कि दवाई कराने के लिए लाखों रुपए का कर्ज हो गया है। वह वर्तमान में में पैगा एंक्लेव स्थित अपना मकान कर्ज उतारने के लिए बेचना चाहते हैं लेकिन बिक भी नहीं रहा है। इलाज के लिए पैसे की व्यवस्था ना होने पर अमित को एम्स के डॉक्टरों ने दिव्यांग प्रमाण पत्र से निशुल्क इलाज कराने की राय दी। करीब एक महीने पहले अमित ने दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय में फार्म जमा किया। वह कई बार कार्यालय के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन उन्हें दो टूक जवाब दिया जाता है कि अभी प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है।
इस मामले में सीएमओ डॉ एनके गुप्ता का कहना है कि दिव्यांग प्रमाण पत्र कोरोना संक्रमण को देखते हुए पूरे प्रदेश में बंद करा दिया गया है, क्योंकि दिव्यांग लोगों की इम्युनिटी पावर आम लोगों की अपेक्षा कम होती है। जब तक कोई शासनादेश नहीं आता है हम अपनी तरफ से प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकते हैं। सीएमओ का कहना है कि जिलाधिकारी से प्रमाण पत्र बनवाने की एप्लीकेशन दे दें उस आधार पर विशेष प्रमाण पत्र जारी हो जाएगा।
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