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कोरोना संक्रमण मुक्त हुए युवाओं में बढ़ रहा निमोनिया

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2020 04:43 PM IST
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कोरोना संक्रमण मुक्त हुए युवाओं में बढ़ रहा निमोनिया
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- नही हुई दोबारा कोरोना संक्रमण की पुष्टि माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके युवाओं में अब निमोनिया और फेफड़े में इंफेक्शन की परेशानी डॉक्टरों को चिंता में डाल रही है। पिछले 2 महीने में तीन अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में 28 से 38 साल के ऐसे युवा इलाज के लिए पहुंच चुके हैं, जो पहले कोरोना वायरस की चपेट में आए थे, लेकिन उनके अंदर किसी भी तरीके का कोई लक्षण नहीं था। इन मरीजों में दोबारा कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन फेफड़े में संक्रमण और निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं। हालांकि इलाज के बाद ज्यादातर स्वस्थ हो चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के दौरान मरीज की इम्युनिटी कम हो जाती है, जिसके चलते उनमें निमोनिया होने का खतरा बन जाता है। जिले में लगभग तीन महीने पहले कोरोना संक्रमण का शिकार हुए एक सरकारी डॉक्टर 14 दिन अस्पताल में भर्ती रहे थे। इस पूरी अवधी में उनमें कोई लक्षण सामने नहीं आया। दूसरी बार करवाई गई कोरोना जांच की रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था लेकिन, लगभग एक महीने बाद उन्हें निमोनिया की शिकायत हो गई। जिसके लिए उनका उपचार चला, हालांकि दोबारा करवाई जांच में उनमें कोरोना की पुष्टि नहीं हुई थी।
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शहर के प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में 30 से ज्यादा ऐसे मरीज सामने आ चुके हैं, जिन्हें लगभग दो महीने पहले कोरोना हुआ था और संक्रमण मुक्त होने के बाद उन्हें अस्पतालों से डिस्चार्ज कर दिया गया था। लगभग डेढ़ महीने बाद उन्हें निमोनिया की शिकायत हो गई। ऐसे मरीजों का कहना है कि उन्होंने कोरोना संक्रमण के दौरान अस्पताल में भर्ती रहते हुए सभी नियमों का पालन किया था और डिस्चार्ज होने के बाद 10 से 14 दिन होम क्वारंटीन में रहते हुए जरूरी सावधानियां बरतने के साथ डॉक्टरी सलाह का भी पूरी तरह से पालन किया था।
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संक्रमण मुक्त होने के बाद भी कमजोर हो जाती है इम्यूनिटी संयुक्त अस्पताल कोविड लेवल-2 के सीनियर फिजीशियन डॉ आरसी गुप्ता का कहना है कि कोरोना के कारण मरीज की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। जिन मरीजों में लक्षण नहीं होते उन्हें विशेष तौर पर किसी तरह दवा की जरूरत नहीं होती है। उन्हें एल-1 अस्पताल के आईसोलेशन में रखने के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है। हो सकता है कि इस दौरान फेफड़ों में कुछ इंफैक्शन रह जाता हो। स्वस्थ हो चुके मरीज शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होते ही निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए डॉक्टर डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को दो महीने तक विशेष एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।
------------ कोरोना संक्रमण मुक्त होने के बाद भी कमजोरी आ जाती है। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है, जिसके कारण निमोनिया की शिकायत देखी जा रही है। हालांकि अभी तक ऐसे किसी भी मरीज में दोबारा कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है। संक्रमण मुक्त होने वालों को दो महीने तक विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ ----------
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