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मिसाल: मौत को मात देने के लिए बन गया दुआओं का खरीदार

Fri, 08 Jul 2016 07:31 PM IST
हर्षित गौतम/अमर उजाला, नई दिल्ली
हर्षित गौतम/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 08 Jul 2016 07:31 PM IST
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Example: The buyer of prayers defeated death
दिलबाग सिंह - फोटो : अमर उजाला

किसी को पता हो मौत धीरे-धीरे उसके नजदीक आ रही है और उसके बावजूद चेहरे पर मुस्कान और लोगों की मदद का हौसला जिंदा दिखाई दे तो हैरानी तो होती ही है।

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धीरुभाई अंबानी ने एक सांस मांगी, ऊपर वाले ने उन्हें भी नहीं दी मुझे तो कई साल दे दिए। ये शब्द अचानक 59 साल के दिलबाग के मुंह से निकल जाते हैं।


दिलबाग,  राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर बिना किसी लालच के लोगों को रास्ता बताते हैं। ये उनका रोज का काम है। इसके लिए उन्हें कोई तनख्वाह नहीं मिलती, बल्कि दुआएं मिलती हैं। जिन्हें वो लोगों की मदद करके हर रोज खरीदते हैं।

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मैने इच्छाएं मार लीं

Example: The buyer of prayers defeated death
दिलबाग - फोटो : अमर उजाला

दिलबाग कुछ देर बात करते हैं और मेट्रो स्टेशन पर अपने हर रोज के काम में मशरुफ हो जाते हैं। उनकी कहानी के बारे में और ज्यादा तांक-झांक करने पर पता चलता है कि चेहरे पर मुस्कुराहट समेटे दूसरों की मदद करने वाले इस शख्स की जिंदगी में भी अंधेरा है।

बेस ऑफ टंग कार्सिनोमा नाम के कैंसर से हर रोज दिलबाग की लड़ाई चलती है। 2006 में बीमारी का पता लगने के बाद से वो मायूस नहीं होते खुशियां तलाशते हैं। लोगों के चेहरों में उनकी मदद करते हुए।

जब सवाल पूछा गया कि इतनी हिम्मत कहां से आती है तो कहते हैं मैने इच्छाएं मार लीं। इच्छाएं खत्म नहीं होतीं इंसान खत्म हो जाता है।

अस्पताल से लोगों की मदद के लिए निकल पड़े

Example: The buyer of prayers defeated death
दिलबाग एक मिसाल - फोटो : अमर उजाला

59 साल के दिलबाग नांगलोई में रहते हैं। आर्मी के बेस हॉस्पिटल में रेडियोग्राफर के तौर पर काम करते थे। बीमारी ने भी अस्पताल से नाता तोड़ने नहीं दिया।

नौकरी के बाद बीमारी की वजह से अस्पताल में भर्ती हो गए। डॉक्टर ने कहा कि ईश्वर तुम्हारी जिंदगी खत्म कर रहा है, तो अस्पताल से डिस्चार्ज होकर लोगों की मदद करने के लिए निकल पड़े।

हालांकि बीमारी से लड़ने के लिए घर पर ऑक्सीजन मास्क समेत सारा इंतजाम कर रखा है। ज्यादा तबियत खराब होने पर अस्पताल भी जाते हैं।

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बेटे के जिक्र पर दिलबाग चुप हो जाते हैं

Example: The buyer of prayers defeated death
दिलबाग एक मिसाल - फोटो : अमर उजाला

दिलबाग पिछले दिनों मार्च में भी अस्पताल में भर्ती होकर आए हैं, लेकिन लोगों की मदद करने का हौसला नहीं छूटता। सिर्फ रास्ता बताने का काम ही दिलबाग नहीं करते बल्कि लोगों की आर्थिक तौर पर भी मदद करते हैं।

घर में पत्नी दो बेटियां एक बेटा है। एक बेटी ने आयरलैंड से फाइनेंस में पढ़ाई पूरी की और दूसरी ने एमबीए किया। एक बेटी की शादी कर चुके हैं। बेटे का जिक्र आते ही दिलबाग चुप हो जाते हैं कहते हैं इसे कहीं लिखिएगा नहीं।

बेटे ने भी आयरलैंड से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, कुछ समय शिकागो में रहा और अब जर्मनी में है। हर रोज हर तरह के लोगों से दिलबाग का सामना होता है कुछ लोग उनका मजाक बनाते हैं।

मुस्कुरा कर गॉड ब्लैस यू बोल देते हैं दिलबाग

Example: The buyer of prayers defeated death
दिलबाग - फोटो : अमर उजाला

मेट्रो मैप के पास लोगों को रास्ता पूछने के लिए बुलाते हुए दिलबाग इन बातों से उदास नहीं होते और मुस्कुरा कर गॉड ब्लैस यू बोल देते हैं। मेट्रो स्टेशन पर स्वीपर और गार्ड से दिलबाग की अच्छी पहचान है।

स्वीपर और मेट्रो सिक्योरिटी स्टाफ को टॉफी बिल्कुट खिलाना उनका रोज का काम है। दिलबाग के बैग में स्वीपर्स के बच्चों के लिए भी कुछ ना कुछ होता है।

 

जब पूछा ये क्यों करते हैं तो बोले इससे उन्हें और दुआएं मिलती हैं।

इनके साथी और इनके लिए खास हैं वो

Example: The buyer of prayers defeated death
दिलबाग के साथी - फोटो : अमर उजाला

मेट्रो स्टाफ को दिलबाग की फोटो दिखाकर पूछने पर कि क्या आप इन्हें जानते हैं। तो इन लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट दौड़ जाती है। मेट्रो स्टेशन पर रज्जन के साथ दयाराम नाम के शख्स मिलते हैं।

30 साल के रज्जन और 50 साल के दयाराम उन्हें अंकल जी बुलाते हैं। मेट्रो स्टेशन पर स्वीपिंग का काम करने वाले रज्जन और उनके साथी कहते हैं अंकल जी उन्हें रोज मिल जाते हैं वो मेट्रो स्टेशन पर लोगों को रास्ता बताते हैं उन्हें टॉफी बिस्कुट देते हैं और उनके बच्चों के लिए भी।
 

 

वहीं दिलबाग को खोजने में हमारी मदद करने वाले मेट्रो सिक्योरिटी स्टाफ के देशराज तब तक हमारा साथ देते हैं जब तक दिलबाग को हम खोज नहीं लेते। मेट्रो स्टेशन पर अजनबियों को अपना साथी बना लेने वाले दिलबाग कहते हैं आप परेशान मत होइए मेरी उम्र तो भीष्म पितामाह की तरह है। अभी बहुत जिंदगी जीनी बाकी है।

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