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बाल दिवस पर विशेष : पढ़ने लिखने की उम्र में फैला रहे हैं दूसरे के जीवन में उजियारा

Mon, 14 Nov 2016 01:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Mon, 14 Nov 2016 01:20 AM IST
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childrens day special: these children bringing sunlight in the life of others
व‌िभोर स‌िंगला - फोटो : अमर उजाला

गुरु द्रोणाचार्य की धरती जहां एकलव्य ने गुरु दक्षिणा में अपना अंगूठा भेंट कर दिया था। इसी सरजमीं पर कुछ ऐसे बच्चे भी हैं, जो कम उम्र में उपलब्धियां हासिल कर दुनिया के सामने एक मिसाल बन गए हैं। बाल दिवस पर हम आपको रु-ब-रू कराते हैं कुछ ऐसे ही होनहार बच्चों से।

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विभोर सिंगला: 
आरडी सिटी में रहने वाले 4 साल के विभोर सिंगला के एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी टैलेंट के लिए उसे वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से 2015 में पीएचडी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। विभोर न सिर्फ दोनों हाथों से एक साथ लिख सकता है, बल्कि वह टैबलेट, लेपटॉप को आराम से चला लेता है। उसे दुनिया की 300 से अधिक गाड़ियों के नाम पता हैं। स्पैनिश, रोमन, हिंदी व अंग्रेजी में 1000 तक गिनती आती है।
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उसका नाम इंडिया बुक ऑफ रेकॉर्ड व एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है। विभोर अभी से दूसरी कक्षा की किताबें आराम से पढ़ व लिखने में सक्षम है। 200 से ज्यादा ऐप की जानकारी है। विभोर की मां ईशा कहती हैं कि 06 मिनट 18 सैकेंड्स में 20 तक टेबल सुनाने के बाद विभोर का नाम 10 जनवरी को इंडिया बुक ऑफ रेकॉर्ड में शामिल किया गया था। केमिस्ट्री की पीरयॉडिक टेबल, सिंबल और ऑटोमिक नंबर भी याद है।

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नीतिश साहनी

childrens day special: these children bringing sunlight in the life of others
nitish sahani - फोटो : अमर उजाला

निर्वाणा कंट्री में रहने वाले 15 साल का नीतीश साहनी अपने हमउम्र बच्चों के लिए रोल मॉडल बन  है। द श्रीराम स्कूल अरावली के 09वीं कक्षा का छात्र नीतीश इस छोटी सी उम्र में कैंसर पीड़ितों के अलावा कई आपदाओं के लिए मौके पर चंदा इकट्ठा कर अपना योगदान दे चुका है।

इसके लिए नीतीश ने ‘प्योर हार्ट’ ग्रुप भी बनाया है। सामाजिक कार्यों में उनके योगदान को देखते हुए 05 मई 2015 को अमेरिका के नेशनल म्यूजियम ऑफ नेशनल हिस्ट्री में आयोजित एक कार्यक्रम में उसे ‘यूएस प्रुडेंशियल स्पिरिट ऑफ कम्युनिटी अवार्ड’ से नवाजा गया था।

‘प्योर हार्ट’ ग्रुप बनाकर नीतीश बाल मजदूरी पर जागरूकता के लिए काम कर रहे हैं। जरूरतमंद श्रेणी में कैंसर के इलाज के लिए सबसे अधिक काम किया है। नीतीश बताते हैं, 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ में उनके रिश्तेदार भी फंस गए थे।

इस हादसे के बाद उन्होंने अपने छोटे भाई के साथ मिलकर ‘प्योर हार्ट’  नाम का ग्रुप बनाया। एक साल में अब इस ग्रुप में सेक्टर-50 के निर्वाणा कंट्री और आसपास के करीब 60 बच्चे जुड़े हैं।

आरिज फैसल 

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ariz - फोटो : अमर उजाला

खुद पढ़ने लिखने की उम्र में (17) आरिज फैसल गुरबत और सरकारी स्कूूल में पढ़ने वाले बच्चों की जिंदगी में उजियारा फैलाने की कोशिश में जुटे हैं। 12वीं कक्षा केे आरिज ने हेल्प इंडिया लर्न ग्रु्प के नाम से एक ग्रुप बनाया है।

इसमें वह 120 बच्चों को गणित और अन्य विषयों की जानकारी दे रहे हैं। आरिज का कहना है कि इसके लिए उन्होंने 50 से अधिक स्कूलों के शिक्षकों को बतौर वॉलंटियर पढ़ाने के लिए जोड़ा है।

हिंदी माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में गणित की कठिनाई सिखाने पर काम किया जा रहा है। इसमें 8-10 वर्ष के बच्चों पर अधिक फोकस किया जा रहा है। इसमें सरकारी और गैर लाभकारी स्कूलों को भी जोड़ा जा रहा है। 

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