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एथिकल हैकिंग की दुनिया में शुभम गुप्ता बने जाना-पहचाना नाम, बताया कहां से मिली प्रेरणा

Mon, 20 Jul 2020 06:02 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 20 Jul 2020 06:02 PM IST
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ethical hacker shubham gupta know all about him
शुभम गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

भारत के एक छोटे से शहर में जन्मे शुभम गुप्ता एथिकल हैकिंग की दुनिया में जाना-पहचाना नाम हैं। हालांकि आज के दौर में भी एथिकल हैकिंग को लोग करीब से नहीं जानते हैं। दरअसल, एथिकल हैकिंग और एथिकल हैकर का इस्तेमाल किसी कंप्यूटर या नेटवर्क पर संभावित खतरों की पहचान करने में मदद करने के लिए किया जाता है। आमतौर जब किसी कंपनी या व्यक्ति को हैकर अपना निशाना बनाते हैं तो उस व्यक्ति या शख्स को एथिकल हैकर जरूरत पड़ती है। ताकि वो उस हैकिंग के खतरे को सही तरीके से समझ पाए और ये काम केवल एथिकल हैकर ही करते हैं।

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शुभम गुप्ता एक युवा एथिकल हैकर हैं। उनकी उम्र अभी महज 25 साल है। वो मध्य प्रदेश के डबरा में जन्मे और अब दिल्ली में रहते हैं। जब उनसे उनकी एथिकल हैकिंग में आने की प्रेरणा को लेकर बात करते हैं तो वो कहते हैं कि ये सब उनके शुभचिंतकों और अपने गुरु डॉ मुकेश कुमार राणा के चलते हुआ है। इनके मार्गदर्शन में ही शुभम अपनी एथिकल हैकिंग की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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बता दें कि शुभम अब महज देश में ही नहीं बल्कि विदेशी कंपनियों/बैंकों तक को सेवाएं देते हैं। यही नहीं उन्हें अलग-अलग मौकों पर खुद विदेशी कंपनियां अपने यहां बुलाती हैं। हालांकि इन दिनों लॉकडाउन के चलते उनका देश से बाहर जाना नहीं हो पा रहा है। लेकिन पहले दर्जनभर से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुके हैं। शुभम कहते हैं कि उनकी आकांक्षा पूरी दुनिया की यात्रा करने की है। शुभम गुप्ता का मानना है कि कड़ी मेहनत और ईमानदारी ही एक ऐसी चीज है जो किसी के जीवन को बदल सकती है।
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अगर शुभम गुप्ता की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने कंप्यूटर एप्लीकेशन में BCA किया है। लेकिन असल में शुभम गुप्ता का पूरा जीवन कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के इर्द-गिर्द घूमता है। वो बताते हैं कि पढ़ाई उन्होंने जरूर बीसीए तक ही अभी की है। लेकिन उन्हें कंप्यूटर के साथ वक्त गुजारना बहुत अच्छा लगता है। इसलिए उन्हें कंप्यूटर से जुड़ी कई ऐसी जानकारियां हासिल हो गईं जो कई बार किसी बड़े शिक्षण संस्थान से शिक्षा लेने के बाद भी नहीं मिल पातीं।

 
अपने परिवार के बारे में शुभम बताते हैं कि एक समय था जब उनके परिवार के पास खाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं था, लेकिन अब उनके पास नई दिल्ली में अपना घर और अपनी रुचि के मुताबिक सभी नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं, जिनसे वो खुद की स्किल और ज्यादा निखारने का काम कर रहे हैं।

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