डीयू छात्रा ने बनाया मेडिसिन बैंक, मुफ्त में करती हैं जरूरतमंद मरीजों की मदद
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दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा लोगों से दवाईयां एकत्र कर जरूरतमंद की मदद करने में जुटी है। हिंदू कॉलेज की मुद्रा शाही ने इसके लिए एक मेडिसिन बैंक तैयार किया है। इस बैंक में वह घरों से बची हुई दवाईयां लाकर अस्पतालों व डिस्पेंसरी में उपलब्ध कराती हैं।
पिता की बीमारी से उन्हें यह प्रयास शुरू करने की प्रेरणा मिली। इसके लिए हाल ही मेें उन्हें उन्नत भारत सोसायटी ने यंग हीरो अवार्ड से सम्मानित भी किया।
जूलॉजी (ऑनर्स) में प्रथम वर्ष की छात्रा मुद्रा शाही की सोच कम उम्र में ही काफी बड़ी है। मुद्रा ने बताया कि उनके पिता के लीवर ट्रांसप्लांट होने के बाद कुछ महीने बाद उन्हें बदल-बदल कर दवाईयां दी जाती थीं।
ऐसे में हर माह थोड़ी-थोड़ी दवाईयां बचती रहीं। उन्हें नष्ट करना भी मुश्किल हो रहा था और फेंकने पर डर था कि कोई इनका गलत इस्तेमाल न कर ले।
बस वहीं से आइडिया आया कि एक मेडिसिन बैंक बनाया जाए, जहां लोगों के घरों से बची हुई दवाईयों को एकत्र कर अस्पतालों व डिस्पेंसरी में पहुंचाया जाए।
लोग खुद दे जाते हैं दवाई
पहले यह प्रयास आस-पड़ोस से शुरू किया था, लेकिन अब इसने बड़ा रूप ले लिया है। अब जिसको भी पता चलता है वह खुद आकर अपनी प्रयोग में न होने वाली दवाईयां दे जाते हैं।
दवाई की समाप्त होने की तिथि को जांच कर उन्हें गुरुद्वारे, मंदिर की डिस्पेंसरी के साथ-साथ अस्पताल मेें पहुंचाया जाता है। वहीं के डॉक्टर उन्हें जांच कर नि:शुल्क उन दवाओं को गरीबों को उपलब्ध कराते हैं।
दृष्टिहीनों को सिखाती हैं शतरंज
मुद्रा शाही इसके साथ-साथ दृष्टिहीन लोगों को शतरंज खेलना भी सिखाती हैं। मुद्रा बताती हैं कि वह और उनके भाई श्रद्धा शिरोमणि फाउंडेशन से जुड़े हैं। उनका भाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व वह खुद राष्ट्रीय स्तर पर शतरंज खेल चुकी हैं।