मां करती थी झाड़ू पोंछा, भीख में मिली किताब ने बदली विश्वप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट की जिंदगी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘भीख में मिली मिकी माउस की किताब ने किस्मत के पन्नों का रुख ही बदल दिया। किस्मत के सितारे कुछ ऐसे चमके कि अच्छे लोगों का साथ मिलता गया और कामयाबी की राह पर कदम बढ़ते चले गए।
एक बार कामयाबी मिली तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा।’ रविवार को गाजियाबाद आए नामचीन कार्टूनिस्ट एवं लेखक आबिद सुरती ने अमर उजाला के साथ अपने जीवन के सफर को साझा किया। आबिद सुरती साहित्यकार से.रा. यात्री के आवास पर उनका हाल-चाल जानने पहुंचे थे।
गुजरात की झुग्गी से निकलकर विश्व भर में नाम कमाने वाले आबिद सुरती अपनी कामयाबी का श्रेय नियति को देते हैं। उन्होंने बताया कि भाग्य ही है, जिसने फर्श से अर्श पर पहुंचाया है।
पेट भरने के लिए काफी दिनों तक भीख मांगी
उन्होंने बताया कि उनका परिवार बेहद गरीब था और मां घरों में सफाई का काम कर उन्हें पाल रहीं थीं। पेट भरने के लिए काफी दिनों तक उन्होंने भीख भी मांगी। आबिद ने बताया कि खाने-पीने की चीजें मांगने के लिए वे बहुत सारे बच्चों के साथ ट्रेनों के पीछे भागते थे।
ऐसे में कभी कोई चॉकलेट, टॉफी व अन्य खाने-पीने के सामान ट्रेन से फेंक देता था, जिससे वह अपना पेट भरते थे। एक बार किसी मुसाफिर ने मिकी माउस की किताब फेंक दी। उस किताब पर भी बच्चे झपट पड़े।
एक पेज उनके हाथ भी लगा। इसमें मिकी माउस का कार्टून बना था। वह पेज देखकर आबिद को लगा कि ऐसा तो वे भी बना सकते हैं और फिर उसी दिन से कार्टून बनाने का सफर शुरू हो गया। अच्छी बात यह रही कि कुछ हालात ठीक हुए और उनकी अम्मी ने उनका दाखिला सरकारी स्कूल में करा दिया।
पानी बचाने की मुहिम भी चला रहे हैं सुरती
जैसे-तैसे उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। आबिद ने बताया कि वर्ष 1953 में जब वह कक्षा दस में पढ़ रहे थे, तब पहली बार उनका पॉकेट कार्टून एक इंग्लिश पेपर में छपा। उसके बाद से उनके मित्रों ने उन्हें प्रोत्साहित किया और फाइन आर्ट की पढ़ाई भी पूरी कर ली। इस तरह वह कार्टूनिस्ट बन गए।
वर्तमान में कार्टून का महत्व कम होने को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया में अब इसको तवज्जो नहीं दी जाती मगर कार्टून का महत्व कम नहीं हुआ है बल्कि लोगों तक पहुंचने का इसका जरिया बदल गया है।
अब कार्टून फिल्में और एनिमेशन के जरिए यह कला लोगों तक पहुंच रही है। कार्टून और किताबें लिखने के अलावा आबिद सुरती पानी बचाने की मुहिम भी चला रहे हैं।
उनकी मुहिम में बॉलीवुड के सितारे भी साथ
उन्होंने कहा कि इस मुहिम की शुरुआत उन्होंने अपने निवास स्थान मुंबई की मीरा रोड से की थी। वर्तमान में वहां के लोग पानी बचाने के प्रति बहुत जागरूक हो गए हैं। पानी बचाने की मुहिम में उनका साथ महानायक अमिताभ बच्चन और अभिनेता शाहरुख खान जैसी हस्तियां भी दे रही हैं।
आबिद ने बताया कि पानी बचाने के लिए अब उन्होंने ईश्वर के संदेश लिखे हुए पोस्टर बनाने शुरू किए हैं। इन्हें वह मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च में लगवाएंगे।
इसके पीछे कारण बताते हुए वह कहते हैं कि मनुष्य धर्म के जरिए जल्दी जागरूक होता है। ऐसे में उन्होंने पानी बचाने की मुहिम में इसका सहारा लिया है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि ‘लाइफ इज ब्यूटीफुल’ इसे हर किसी को सकारात्मक तौर पर जीना चाहिए।