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बेबस बचपन में आशा की किरण बनीं ऊषा, अकेली होकर भी संवार रहीं गरीब बच्चों की जिंदगी
Tue, 16 Jul 2019 10:43 AM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 16 Jul 2019 10:43 AM IST
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आरके ऊषा
- फोटो : अमर उजाला
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ग्रेटर नोएडा की 73 वर्षीय आरके ऊषा उस जीवटता की मिशाल हैं, जो खुद की चिंता छोड़ गरीब बच्चों का जीवन संवारने में जुट गईं। बेबस बचपन को सुधारने की जिद में अकेली घर से निकलने वाली ऊषा आज काफिला तैयार कर चुकी हैं। उनके विकास विश्रांति ट्रस्ट से जुड़े 25 वरिष्ठजन 450 बच्चों को पठन-पाठन करा रहे हैं।
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गामा-1 निवासी आरके ऊषा संस्था की संस्थापक हैं। उन्होंने बताया कि मार्च 2011 में ट्रस्ट की शुरुआत की थी। इसका मकसद उन बच्चों की मदद करना है, जिनके पिता भट्टे या किसी ऐसे संस्थान पर काम करते हैं, जहां आमदनी का जरिया बेहद कम है।
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ग्रेनो के विभिन्न कोनों से ऐसे बच्चों की तलाश कर उन्हें शिक्षा दी जा रही है। डेल्टा थ्री में बिल्डिंग किराये पर लेकर कुछ महिलाओं एवं लड़कियों को कंप्यूटर, सिलाई आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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आर्थिक मदद के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली। आम लोगों से ही आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। शेष निजी स्तर से कदम उठाए जाते हैं।
अकेली हुईं तो बच्चों की मदद का उठाया बीड़ा
सूरजपुर कोर्ट में वकालत कर रहीं आरके ऊषा के पति करीब पांच दशक पहले उनका साथ छोड़ गए। पढ़ाई करने अमेरिका गईं दोनों बेटियां वहीं की होकर रह गईं। घर पर अकेली रहने वाली ऊषा का मन नहीं लगा तो उन्होंने गरीब बच्चों का भविष्य संवारने का दृढ़ संकल्प कर लिया।
उसी संकल्प को ऊषा आज भली-भांति जमीन पर उतार रही हैं। उन्होंने अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इससे लड़कियों के प्रति समाज के नजरिए में बदलाव आएगा।
यहां संवर रहा बचपन
- सूरजपुर में दुर्गा टॉकिज के सामने 85 बच्चों को दे रहीं शिक्षा
- गामा-1 में 80 बच्चों का पठन-पाठन
- बिरोंडा के आगे 55 बच्चों का संवारा जा रहा है जीवन
- कांशीराम आवासीय कालोनी में 120 बच्चों को मिल रही दीक्षा
- डेल्टा 3 में 65 लड़के एवं लड़कियों को कंप्यूटर, सिलाई मशीन आदि का प्रशिक्षण
उसी संकल्प को ऊषा आज भली-भांति जमीन पर उतार रही हैं। उन्होंने अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इससे लड़कियों के प्रति समाज के नजरिए में बदलाव आएगा।
यहां संवर रहा बचपन
- सूरजपुर में दुर्गा टॉकिज के सामने 85 बच्चों को दे रहीं शिक्षा
- गामा-1 में 80 बच्चों का पठन-पाठन
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- डेल्टा 3 में 65 लड़के एवं लड़कियों को कंप्यूटर, सिलाई मशीन आदि का प्रशिक्षण