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75 की उम्र में गरीब मरीजों के बने मसीहा, अस्पताल को दान कर चुके हैं 21 एसी

Sun, 22 Jan 2017 03:02 PM IST
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sun, 22 Jan 2017 03:02 PM IST
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75 year old man helping poor patients in hospital in faridabad
- फोटो : अमर उजाला

जिस उम्र में लोग बिस्तर पकड़ दूसरों के मोहताज होते हैं, उस उम्र के बुजुर्ग शहर मेें गरीब मरीजों को मुफ्त में खाना खिला रहे हैं। 75 वर्षीय राजेंद्र गुप्ता ऐसे ही बुजुर्ग हैं जो रोजाना बीके सिविल अस्पताल में 200 से 250 मरीजों को तीन समय का खाना मुफ्त में परोसते हैं। एनआईटी पांच में रहने वाले राजेंद्र गुप्ता वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं।

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वे गरीबों की मदद करने वाले सामाजिक संगठन न्यू जनसेवा दल के प्रधान भी हैं। इस संगठन में 55 से 80 वर्ष उम्र के 12 सदस्य उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर मरीजों की सेवा में जुटे हैं। सभी सेवानिवृत्त हैं या फिर उनका अपना कारोबार है। संस्था ने कभी भी कोई सरकारी या गैर-सरकारी मदद नही ली है। यह सब बुजुर्ग अपनी पेंशन से करते हैं।
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कैसे शुरू हुई संस्था
उच्च सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए टीआर आनंद ने 1992 में बीके सिविल अस्पताल के गरीब मरीजों को चाय पिलाना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके साथ शहर के कई सेवानिवृत्त अधिकारी जुड़े और चाय पिलाने से शुरू हुआ यह सफर नाश्ते से लेकर तीन समय के भोजन तक पहुंच गया। सेवा को न्यू जनसेवा दल संस्था का नाम दिया गया।
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2007 में राजेंद्र गुप्ता भी इस मुहिम में शामिल हुए। उनका सेवाभाव देख सदस्यों ने उन्हें संस्था का प्रधान बना दिया। यह संस्था पिछले 25 साल में बीके सिविल अस्पताल में मरीजों को खाना देने के अलावा 21 एसी, 50 से ज्यादा स्ट्रीट लाइट, वाटर कूलर आदि लगाए हैं। इसके साथ पैसे से और श्रमदान से साफ-सफाई में भी योगदान देते हैं।

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लड़कियों को स्वावलंबी बनाने के लिए भी कर रहे काम

75 year old man helping poor patients in hospital in faridabad
संस्था द्वारा किए जाने वाले कार्य
न्यू जनसेवा दल के प्रधान राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि बीके सिविल अस्पताल के साथ-साथ गरीब लड़कियों को स्वावलंबी बनाने के लिए भी कार्य कर रहे हैं। बुजुर्ग कॉलोनियों में जाकर लड़कियों को ढूंढ कर उनको पांचवीं तक मुफ्त शिक्षा दिलाते हैं।

उसके बाद सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाने के साथ संस्था द्वारा मुफ्त में सिलाई और कंप्यूटर कोर्स करवाते हैं। इसके बाद बच्चों की प्लेसमेंट भी करवाते हैं। अभी तक 60 बच्चों को अडॉप्ट कर शिक्षा और स्वावलंबी बनाने का कार्य कर रहे हैं। मुफ्त किताबें, ड्रेस और स्कूल बैग भी दिए जाते हैं।

मरीजो को दिया जाने वाला खाना
सुबह 7 से 8.30 बजे नाश्ते में सोमवार से रविवार को चाय ,ब्रेड और रस मिलते हैं। 
दोपहर 12 से 2 बजे लंच में सोमवार से रविवार को खिचड़ी, चावल और दलिया दिया जाता है। 
शाम को 7 से 8.30 बजे डिनर में सोमवार से रविवार को दाल, हरी सब्जियां और खीर दी जाती है। 
इसके साथ सभी मरीजों को रोजाना 250 ग्राम दूध दिया जाता है।

महीने का खर्च आता है एक लाख

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- 25 साल से कार्य कर रहे हैं। संस्था के सभी मेंबर अपना योगदान दे रहे हैं। इसके साथ कोई संस्था को खाने का सामान दान में देता है। हम सभी मेंबर मिलजुल कर काम करते हैं। बीके सिविल अस्पताल में 12 से 15 घंटे रोजाना देते हैं। खाना बनाने-बांटने के लिए सात लोगों को रखा गया है। जिसमें तीन महिलाएं और चार आदमी है। महीने का करीब एक लाख रुपये का खर्च होता है। - राजेंद्र गुप्ता, प्रधान, न्यू सेवा दल

अस्पताल की उन्नति में संस्था का काफी सहयोग है। मरीजों को 25 साल से खाना उपलब्ध कराना काफी सराहनीय कार्य है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से संस्था के सभी बुजुर्ग मेंबर को सम्मानित किया गया है। - डॉ. विरेंद्र यादव, पीएमओ, बीके अस्पताल
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