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'अपराजिता बनने के लिए महिलाओं का आत्मनिर्भर होना जरूरी'
Sun, 03 Mar 2019 09:35 AM IST
vivek shukla
ब्यूरो, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 03 Mar 2019 09:35 AM IST
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डॉ. रीता वाधवा
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महिलाएं तब सशक्त बन सकतीं हैं जब वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएं। ऐसे में वह सभी जरूरतें भी पूरी कर सकेंगी। परिवार को सपोर्ट कर बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकेंगी। यह कहना है डॉ. रीता वाधवा का। अपराजिता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान से समाज में जागरूकता आएगी। यह महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और बराबरी का हक दिलाने में योगदान देगा।
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नोएडा के जिला अस्पताल से सेवानिवृत्ति के बाद डॉक्टर रीता सेक्टर-40 स्थित साईं मंदिर व सेक्टर-21 स्थित श्री सत्य साईं मंदिर में धर्मार्थ अस्पताल से जुड़ीं और गरीब महिलाओं का निशुल्क इलाज करने लगीं। इसके अलावा सेक्टर-93 के गेझा में सत्य साईं सेवा समिति की तरफ से हर बुधवार को लगने वाले शिविर में यह गरीबों का निशुल्क इलाज करती हैं। डॉ. रीता वाधवा का जन्म दौराला (मेरठ) में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा खतौली (मुजफ्फरनगर) में हुई। एमबीबीएस की पढ़ाई 1969 से 1973 में पूरी की।
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1976 में परास्नातक के बाद 1977 में सरकारी डॉक्टर के रूप में सेवा शुरू की। लक्सर, रुड़की, आगरा, देहरादून, लखनऊ व आखिर में नोएडा के जिला अस्पताल में तैनात रहीं। जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग की इंचार्ज भी रहीं। 2010 में सेवानिवृत्त के बाद डॉ. रीता वाधवा को बतौर सीनियर गाइनो कई बड़े अस्पतालों ने ओपीडी के लिए ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। पति केसी वाधवा सिविल इंजीनियर रहे हैं।
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डॉ. रीता वाधवा के दाहिने पैर में बचपन से पोलियो है। 2004 और 2007 में उसी पैर में उन्हें चोट भी लगी। चलने फिरने में भी दिक्कत होती है, फिर भी गरीब महिलाओं के इलाज की सेवा भावना से घर नहीं बैठती।
एक्सप्रेसवे स्थित एमराल्ड कोर्ट सोसायटी में रहती हैं। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा सोचती थी कि सेवानिवृत्त के बाद गरीब महिलाओं का निशुल्क इलाज करती रहूूंगी। यही संस्कार बचपन में माता-पिता से भी मिले। उसी दिशा में मेरा प्रयास अब भी जारी है।