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युवा दिवस 2022: तैराकी में कई राज्य व राष्ट्रीय मेडल जीते, अब ओलंपिक की ओर 'दिशा'

Wed, 12 Jan 2022 02:39 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 12 Jan 2022 02:39 PM IST
सार

मूल रूप से पौड़ी निवासी दिशा भंडारी ने 10 साल की उम्र से तैराकी शुरू की और 12 साल की उम्र में पहली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड जीता। 

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youth day 2022: Won many state and national medals in swimming, now direction towards Olympics
दिशा भंडारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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तैराकी में कई राज्य एवं राष्ट्रीय मेडल जीत चुकी राष्ट्रीय तैराक उत्तराखंड की दिशा भंडारी का सपना अब देश के लिए भी गोल्ड जीतने का है। दिशा खुद को कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स और ओलम्पिक के लिए तैयार कर रही हैं। दिशा का कहना है कि देश ने हमें बहुत कुछ दिया है। इसलिए देश को गौरवान्वित करने वाला क्षण देना चाहती।

मूल रूप से पौड़ी निवासी दिशा भंडारी ने 10 साल की उम्र से तैराकी शुरू की और 12 साल की उम्र में पहली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड जीता। राज्य स्तरीय तैराकी प्रतियोगिताओं में दिशा अब तक 20 से ज्यादा रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिताओं में भी दिशा सिल्वर जीत चुकी हैं, लेकिन दिशा का लक्ष्य ओलम्पिक में  देश के लिए  गोल्ड जीतने का है। जिसके लिए वह बेहद सख्त नियमों के साथ अपनी तैयारी कर रही हैं। दिशा को यूपी की सर्वश्रेष्ठ तैराकी का ख़िताब भी मिला है। 2019 में राजकोट में हुए जूनियर नेशनल में दिशा सिल्वर मेडल जीता। जबकि इंटर डीपीएस नेशनल प्रतियोगिता में पांच गोल्ड मेडल अपने नाम किए।

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बेंगलुरु में 2021 में हुई सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में दिशा ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके अलावा भी वे कई प्रतियोगिताओं में अपना लोहा मनवा चुकी हैं। वर्तमान में दिशा ग्रेटर नोएडा में रह रही हैं। मिशन शक्ति अभियान तीन  के नायिका इवेंट के तहत राष्ट्रीय तैराक दिशा को एक दिन के लिए मुख्य विकास अधिकारी भी बनाया गया था। दिशा कहती हैं कि युवा अपनी ऊर्जा को देश हित में लगाएं। ताकि आने वाले समय में हमें ज्यादा से ज्यादा गोल्ड जीतने वाले खिलाड़ी मिले। 
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बचपन में कहते थे सब जलपरी 
दिशा ने बताया कि जब वह तीन साल की थी तब उनका परिवार बेंगलुरु में रहता था। यहां सोसाइटी में काफी बड़े स्विमिंग पूल होते हैं। बतौर दिशा मेरी मां ने मुझे बताया  कि बचपन में मैं अपने भाई को देखकर तैराकी करता देख बहुत उत्सुक होती थी। और जैसे ही मेरी माँ की नजर मुझसे हटती थी मैं दौड़ती हुई स्विमिंग पूल के पास जाती थी और डुबकी मार देती थी। पानी में जाना मुझे बहुत पसंद था। इसलिए आसपास के सभी लोगों ने मेरा नाम जलपरी रख दिया। लेकिन हकीकत में मैं एक दिन तैराकी बनूंगी ये किसी ने नहीं सोचा था। 

गलतियों से सीखें और मुस्कराहट के साथ आगे बढ़ें : मानसी
मुझे याद है कि बचपन में हमारे घर में एक कैलेंडर लगा होता था, जिसमें स्वामी विवेकानंद जी का विचार ‘उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए’ लिखा था। यह विचार मुझे बहुत हिम्मत देता है। आज की युवा पीढ़ी सब कुछ जल्दी चाहती है और जब नहीं मिलता तो तनाव का शिकार होती है। इसलिए असफलता को स्वीकार करें। गलतियों से सीखें और मुस्कराहट के साथ आगे बढ़ें।

यह कहना है भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज मानसी जोशी का। देहरादून निवासी मानसी जोशी अमर उजाला से बातचीत में मानसी ने कहा कि आज युवाओं के सामने कई अवसर हैं। बस धैर्य रखना और कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होती है। असफलता को अपने ऊपर इतना हावी न होने दें। मेरे सामने कई बार ऐसे मोड़ आए जहां पर असफलता देखनी पड़ी, लेकिन अपनी गलतियों से सीखा। अपनी प्रेक्टिस जारी रखी और फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दिया।


मानसी ने ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा को युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बताया। नीरज चोपड़ा ने गौरवान्वित करने वाला क्षण देश को दिया है। बतौर मानसी अब हमारे देश में मेडल आने लगे हैं। अब इनकी संख्या बढ़ती जानी चाहिए। गांव का टैलेंट विश्व मंच पर अपनी छाप छोड़ा रहा है। क्रिकेट में भी पहले बहुत ज्यादा लड़कियां नहीं आती थी, लेकिन अब समय बदला है। 
 

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