{"_id":"61de98bf20ecf0434e4ce0d6","slug":"youth-day-2022-skill-development-is-being-enhanced-by-kafal-kuldeep-is-keeping-hill-flavor-in-new-york","type":"story","status":"publish","title_hn":"युवा दिवस 2022: ‘काफल’ की सलाह से संवर रहा कौशल विकास, न्यूयॉर्क में पहाड़ी तड़का लगा रहे कुलदीप","category":{"title":"Bashindey","title_hn":"बाशिंदे ","slug":"bashindey"}}
युवा दिवस 2022: ‘काफल’ की सलाह से संवर रहा कौशल विकास, न्यूयॉर्क में पहाड़ी तड़का लगा रहे कुलदीप
Wed, 12 Jan 2022 02:35 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 12 Jan 2022 02:35 PM IST
सार
दोनों युवा अपने कौशल से पहाड़ के अन्य युवाओं का कौशल निखार रहे हैं। रुद्रपुर के सौरभ जोशी और देहरादून के नागेंद्र रावत की नई सोच ‘काफल’ को देखते हुए उद्यान विभाग ने इन्हें स्टार्टअप के रूप में शामिल किया है।
विज्ञापन
नागेंद्र और सौरभ
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विदेश में पढ़ाई करने का सपना लेकर कई युवा जाते हैं, लेकिन लौटकर अपने देश में सेवा देने का जज्बा कम ही युवाओं में होता है। उत्तराखंड के दो युवाओं ने इस धारणा को पीछे ढकेल दिया है और अपनी जन्मभूमि में सेवा का संकल्प लिया है। इन दोनों आईआईटीयंस ने ‘काफल’ (क्रिएटिव आजीविका फॉर ऑल) ब्रांड से राष्ट्रीय-अतंरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
विज्ञापन
दोनों युवा अपने कौशल से पहाड़ के अन्य युवाओं का कौशल निखार रहे हैं। रुद्रपुर के सौरभ जोशी और देहरादून के नागेंद्र रावत की नई सोच ‘काफल’ को देखते हुए उद्यान विभाग ने इन्हें स्टार्टअप के रूप में शामिल किया है। नागेंद्र और सौरभ के द्वारा शुरू किया गया काफल एडवाइजर मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म है। जिसका उद्देश्य शोध, विश्लेषण एवं प्रबंधन के माध्यम से राज्य में कौशल, रोजगार एवं आजीविका के क्षेत्र में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और परिणाम लाने में सहयोग करना है।
विज्ञापन
युवाओं का कहना है, कि आज इंडस्ट्री में बहुत से बदलाव हो गए हैं। जिस तरह की जरूरतें आज हैं, उसके अनुसार शिक्षा में बदलाव नहीं हो रहा है। पढ़ाई के बाद भी युवा बेरोजगार भटकते हैं। इसलिए जरूरी है कि रोजगार पाने के लिए युवाओं का कौशल विकास सही हो। बताया कि पहले वह रिसर्च करते हैं। किस क्षेत्र में किस तरह के रोजगार की संभावनाएं हैं, और युवाओं को किस तरह से उन अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार किया जा सकता है। कौशल विकास एक बड़े स्तर की योजना है। धरातल पर इसके सही क्रियनान्वयन के लिए हम एक्पर्ट का काम करते हैं।
विज्ञापन
नागेंद्र और सौरभ ने बताया कि सरकार पॉलिसी बनाने के दौरान विज्ञापन देकर बाहर से एक्सपर्ट बुलाती है। जबकि यहां का टैलेंट बाहर देश-विदेश में अपनी सेवा दे रहा है। यहां का टैलेंट यहां के काम आए, इसलिए वे सरकार की बेहद महत्वपूर्ण कौशल विकास जैसी योजना में एक्सपर्ट का काम कर रहे हैं। इसके अलावा कई फाउंडेशन और जर्मनी जैसे देश की योजनाओं में एक्सपर्ट का काम कर रहे हैं। आईआईटी, एमबीए कर रहे युवाओं को टीम में शामिल किया जा रहा है।
सौरभ और नागेंद्र ने आईआईटी रुड़की से अपनी पढ़ाई की। इसके बाद सौरभ एमबीए करने के लिए फ्रांस गए और नागेंद्र इटली। अप्रैल 2021 में दोनों ने लोकल फॉर ग्लोबल के उद्देश्य से इस फर्म की शुरुआत की। दोनों की मुलाकात एक ट्रेकिंग के दौरान हुई। फिर दोनों ने साथ में स्टार्टअप करने की ठानी। सौरभ और नागेंद्र का कहना है कि युवा भले ही पढ़ने के लिए और अनुभव लेने के लिए बाहर जाएं, लेकिन अपने घर जरूर लौटें।
न्यूयॉर्क में उत्तराखंड के कुलदीप लगा रहे पहाड़ी व्यंजन का तड़का
किसी भी राष्ट्र व राज्य की तरक्की युवा शक्ति पर निर्भर है। युवाओं की काबिलियत से ही राष्ट्र व राज्य की पहचान होती है। उत्तराखंड में ऐसी प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। ऐसे ही उत्तराखंड के शेफ कुलदीप सिंह न्यूयॉर्क में पहाड़ी व्यंजनों का तड़का लगा प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
कुलदीप न्यूयॉर्क के एक रेस्टोरेंट में बतौर सीनियर शेफ कार्यरत हैं। हाल ही में उन्होंने न्यूयॉर्क की जेम्स बियर्ड फाउंडेशन संस्थान में पहाड़ी खाना बनाकर इस जायके से लोगों को रूबरू कराया था। वह मंडुआ की रोटी, बाजरा चपाती, भांग की चटनी का स्वाद अक्सर वहां के नागरिकों को चखाते रहते हैं।
कुलदीप ने कहा कि मेरा हमेशा पहाड़ी व्यंजनों का आधुनिकीकरण करके देश और विदेशों तक इसकी पहचान बनाने का सपना रहा है। इसका नतीजा यह होगा की हमारे क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ मिलेगा और विलुप्त होती हुई अपनी कृषि संपदा को हम बचाएंगे। इससे युवा पीढ़ी को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे और पालयन रोकने में भी सार्थक होगा।